देश और देश वासियों से बड़ी न पगड़ी है, न टोपी, लेाकतंत्र की रक्षा हर देश वासी का धर्म

व्ही.एस.भुल्ले। देश व देश वासियों के हित और लोकतंत्र की रक्षा के  लिए दिये गये राहुल के बयान को लेकर जिस तरह से विपक्षी दल ने बाक युद्ध छेड़ रखा है। उससे किसी को राजनैतिक नफानुकशान भले ही हों,मगर देश का भला नहीं हो सकता। न ही इस तरह के विवादो से लोकतंत्र ही सुरक्षित रह सकता।

राहुल ने जब भी जिस भी वक्त अध्यादेश को लेकर वयान दिया है,वह देश और देश में मौजूद लेाकतंत्र के हित में है। क्योकि लेाकतंत्र में विचार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता हर नागरिक को है। ये सही है,कि दागी नेताओं को राजनीति से दूर रखने देश के सर्वो"ा न्यायालय अपने निर्णय में अपनी मंशा जाहिर कर दी थी। 

जिसको लेकर कुछ दिनों से विभिन्न राजनैतिक दल इस बात को लेकर सम्बत: एक थे कि माननीय न्यायालय के निर्णय की काट निकालने समुचे मसले को संसद में रखा जाये विचार उपरान्त कोई निर्णय हो, मगर आनन-फानन में यूपीए सरकार द्वारा अध्यादेश लाये जाने को लेकर देश में तीखी प्रतिक्रिया हुई और विपक्षी दल भाजपा ने राष्ट्रपति जी से मिल अपना विरोध दर्ज कराया।

इतना सब कुछ चल ही रहा था,कि कांग्रेस नेताओं द्वारा आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेस चल रही थी। कि अचानक प्रेस कॉन्फ्रेस में आये राहुल ने देश की मीडिया के सामने अपनी व्यक्तिगत राय रखी जिसको लेकर विपक्ष ने हाय तौबा मचा रखी है। विपक्ष का आरोप है,कि यह यूपीए सरकार के मुखिया प्रधानमंत्री का अपमान है। तो कोई कहता है,कि यह नोटंकी है। 

तो कोई पगड़ी टोपी उछालने की बात कह रहा है। क्या कोई बता सकता है,कि देश,देश वासियो,लेाकतंत्र से बड़ा कौन है। सम्भव: कोई नहीं और देश और देश के लेाकतंत्र को बचाने अगर किसी की पगड़ी उछले या टोपी इसमें हर्ज ही क्या? जो हाय तौबा मची है।

मगर आज न तो किसी को अपने स्वार्थो से ऊपर उठकर न तो देश की चिन्ता है,न ही लेाकतंत्र की रक्षा की परवाह। अगर राहुल ने दो कदम आगे बढ़कर देश और लेाकतंत्र की रक्षा के लिए कोई पहल की है। तो उस पर छीटा कसी के बजाय उनके उस कदम का स्वागत होना चाहिए जो उन्होंने अध्यादेश का विरोध कर उठाया है। 

और यह हर नागरिक का भी कर्žाव्य बनता है,कि वह देश और देश में मौजूद लेाकतंत्र की रक्षा के लिए सबको भुला अपने कर्žाव्यों का निर्वहन करना चाहिए। जिससे देश की सवा अरब आबादी स्वास्थ लेाकतंत्र में सांस ले सके।



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