मप्र: गुरिल्ला युद्ध को तैयार कांग्रेस, बगैर नेतृत्व मुआयना करने,साथ निकले सिपहसालार

व्ही.एस.भुल्ले/ म.प्र. में भाजपा के सेनापति बने शिवराज भले ही अपने सिपहसालारो के साथ प्रदेश भर का दौरा कर हर विधानसभा सीट पर तैनात अपने सूवेदारो को शाबासी दे।
2013 के समर युद्ध में जी जान से ढटे रहने और हर र्मोचा फतह करने ताकीत कर भोपाल में लाखों भाजपा कार्यकर्žााओं से सजी सतरंगी सेना का अपने जनरलो के सामने ऐतहासिक प्रदर्शन कर पाये हो कि जो भी हो 2013 के चुनावों में फतह भाजपा की ही होगी। वहीं दूसरी ओर गुरिल्ला युद्ध छेड़ फतह पाने बगैर नेतृत्व के एक साथ निकले कांग्रेसी सिपहसालारों ने साजो सामान के साथ भाजपा की 10 साल पुरानी सल्तनत पर आरोपों के ताबड़ तोड़ हमले शुरु कर दिये है।

कांग्रेस ने मालवा से 2013 के संग्राम का शंखनाद करते हुए महाकौशल होते हुए अब र्मोचा  ग्वालियर-चम्बल की ओर कर दिया है। आखिर कांग्रेसी की जो भी रणनीति हों मगर जिस तरह की तैयारी भाजपा ने म.प्र. में तीसरी मर्तवा अपनी सरकार बनाने कर रखी है। उसके सामने कांग्रेस का यह गुरिल्ला युद्ध कितना कारगार होगा फिलहॉल तो भविष्य के गर्व में है।

देखा जाये तेा औपचारिक अनौचारिक रुप से उसके शुभचिन्तक संगठन चाहे वह आर.एस.एस.,विश्व हिन्दू परिषद,बंजरंग दल,हो या फिर उसके सहयोगी संगठन महिला भाजपा र्मोचा , युवा र्मोचा,विद्यार्थी परिषद,अनुसूचित जाति एवं जन जाति,पिछड़ा वर्ग,अल्प संख्यक र्मोचा,व्यापारी प्रकोष्ठ,चिकित्सा प्रकोष्ठ,मजदूर संगठन,पालक संघ,और भी ना जाने किस किस र्मोचे के कार्यकर्žाा है। पेालिंग बूथ स्तर तक पूरे जोश खरोश के साथ तैनात है। इतना ही नहीं मुख्यमंत्री निवास पर निरन्तर चलती रही विभिन्न जाति, वर्गो,की बैठके ढेर सारी लोक लुभावन नीतियों योजनाओं के साथ धुंआ धार प्रचार-प्रसार कर एक प्रकार से भाजपा ने 2013 का चुनाव फतह करने चाक चौबन्द व्यवस्था कर रखी है।

वहीं गुटीय राजनीति के दंश से जूझती कांग्रेस विगत वर्षो में एक भी आंदोलन संगठनात्मक रुप से खड़ा नहीं कर पायी। एन चुनाव के वक्त वे मुद्दे एका की हुंकार भरती कांग्रेस फिलहॉल तो कमजोर र्मोचे तलाशती घूम रही है। मंच पर हुजूम इतना कि सुनने वाली भी उवाई भरते नजर आते है। मगर कांग्रेस नेताओं का एक मंच से एक सुर जरुर सुनाई देता है। कि हम एक है,और इस बार सरकार कांग्रेस की ही बनेगी। मुख्यमंत्री का चुनाव भी चुनावों के बाद हेागा क्योकि कांग्रेस में लेाकतंात्रिक प्रणाली है जिसे विधायक  चुनेगें वहीं मुख्यमंत्री होगा।

बहरहॉल म.प्र. में किसकी सरकार बनेगी कौन विपक्ष में बैठेगा ये तो फिलहॉल भविष्य के गर्व में है। मगर जो चमक कांग्रेस के गुरिल्ला युद्ध में दिखनी थी,वह अभी भी काफुर है वहीं मीडिया प्रबन्धन जितना धार-दार होना था वह भी पूरी तरह मोथरा दिखाई देता है। जब चुनाव सर पर है ऐसे में मुद्दा विहीन हुंकार और प्रचार होता तार-तार कितना कुछ कांग्रेस की फतह में कर पायेगें, फिलहॉल कहना मुश्किल।
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