किया बच्चों का बन्टाढार: छात्रावास छोड़ गाँव लौटने पर मजबूर छात्र

म.प्र. शिवपुरी। कई महिनों से दहशत में रह असामाजिक तत्वों से परेशान अर्दशासकीय,अनुसूचित जाति,छात्रावास के छात्रों ने आखिर कार पढ़ाई बन्द कर अपने घर जाने का निर्णय ले ही लिया। उक्त छात्रावास के छात्र अपने पालको सहित सारा सामान साथ ले कलेक्टर कार्यालय पहुंचे। मगर उन्हें हर बार की तरह इस बार भी बैठकों के चलते निराश ही लौटना पड़ा।

उक्त छात्रों के पालक लालजी राम,लल्लाराम,फूल्लू,कड़ोरी,फूल सिहं,ने हमारे संवाददाता को कलेक्टर कार्यालय के सामने अपने ब"ाों का दुखड़ा सुनाते हुये कहां कि हमारे ब"ाों को कई महिनों से कुछ शराबी और असामाजिक तत्वों द्वारा छात्रावास के अन्दर आकर बेवजह मारपीट की जाती है। और उन्हें धमकाया जाता है। जिसकेे चलते हमारे ब'चे न तो पड़ पा रहे है न ही इन असामाजिक तत्वो से छुटकारा पा  पा रहे है। कई बार हमारे द्वारा वरिष्ठ अधिकारियों को शिकायत की जा चुकी है। मगर आज दिनांक तक उन असामाजिक तत्वों के खिलाफ कोई कारगार कार्यवाही नहीं की गई। हम आज हताश हों अपने ब"ाों को अपने घर वापिस मजबूरी में ले जाने पर मजबूर है।

कलेक्टर कार्यालय के बाहर अपना सामान लिये कलेक्टर से शिकायत करने बैठे छात्र विजय कक्षा 10,शतेन्द्र कक्षा 9,कल्याण कक्षा 8,दुर्गेश कक्षा 6,सिट्टू कक्षा 9,भरत कक्षा 8,बल्लू कक्षा 9,माखन कक्षा 7,आकाश कक्षा 6 इत्यादि ने कहां कि जब जब हम कलेक्टर साहब से मिलने आते है,यहां बैठके ही चलती रहती है। मगर आज हम सब छात्र सामान सहित कलेक्टर कार्यालय आये है,जिससे हम अपना दुखड़ा सुना सके। सभी छात्र विकासखण्ड कोलारस ग्राम सजाई के रहने वाले थे। उन्होंने कहां हम अशाह एवं निराश आखिर हम छात्र किस दरवाजे पर अपना दुखड़ा रोये जिससे हमारी समस्याओं का समाधान हो सके। अगर आज भी कलेक्टर महोदय से हम नहीं मिल सके तेा निश्चित ही यहां से हम अपने गाँव सजाई लौट जायेगें। ज्ञात हो कि उक्त छात्रावास का संचालन अनुसूचित जाति मद से किया जाता है।

उम्र 70 की वोट आज तक नहीं दिया

मप्र शिवपुरी। शहर की आदिवासी वस्ती वार्ड क्रमांक 39 के निवासी नेनू आदिवासी अपनी पत्नी ज्ञ्यासों के साथ आज कलेक्ट्रट परिसर में इस उम्मीद में बैठे थे कि भले ही सात दशको में उन्होंने एक भी मर्तवा अपना मत नहीं डाला हों। मगर इस बार वह शायद डाल पाये। शासकीय योजनाओं से मेहरुम 70 वर्षीय नेनू का कहना है,कि वह अपनी बीमारी के चलते यूं तो एक पैर से विकलांग है न तो उनके पास विकलांगता का प्रमाण पत्र है,न ही मतदाता पहचान पत्र उसे समझ नहीं आ रहा कि वह कैसे अपना मतदाता परिचय पत्र बनवाये। जिला मुख्यालय के नगरीय क्षेत्र का निवासी नेनू की क्या यह आकांक्षा पूरी होगी। कि वह इस मर्तवा अपना वोट डाल पाये। अजीव है सरकार योजनाये और धन्य है उसके पैरो कार।
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