तेरे शहर को,धूल का ढेर न बना दूं तो कहना.......................?

 तीरंदाज/व्ही.एस.भुल्ले. भैया- बोल कैसी रही,चुप कर मुये कीड़े पड़े थारे मुंह में नासपीटे शुभ-शुभ बोल म्हारे सुन्दर शहर शिवपुरी सिंधिया स्टेट की ग्रीष्म कालीन राजधानी के बारे में। कै थारे को मालूम कोणी जब थारे जैसे पत्रकारों को हाड़ तोड़ मेहनत के बावजूद 21वी सदी मे जो सुविधाये नसीब नहीं  वह सुविधाये पूरे 100 वर्ष पूर्व म्हारे शहर को नसीब थी।
फिर चाहे वह रेल,बस,बिजली टेलीफोन, होटल, क्लब, खेल, मैदान, सांस्कृतिक भवन, शुद्ध पेयजल, निस्तारी तालाब,शहर से गजुरते तालाबों के वेस्ट वीयर सीवर लाइन ,चौड़ी चाड़ी सुन्दर सड़के,रिंग रोड़,चौराहे,फलयुक्त बाग बचीचे,स्कूल भवन, 52 कोठी, वृहत सचिवालय और प्राकृतिक रुप से वातानूकित शहर था। जिसमें गॢमयों के दिनों में भी ठंड से बचने लेागों को रात में कम्भल तक ओढऩा पड़ता थ।  इतड़ा ही नहीं जगह-जगह प्राकृतिक झरने,हरा भरा जंगल,हिरण शेरो के झुन्ड से सारा जिला पटा पड़ा था।

आखिर तू तो, मने ये बता कि आखिर थारी जुबाड़ इतनी तीखी और काली कैसे हुइ्र्र। जो तू म्हारे सुन्दर शहर को सबारने के बजाये उसके बारे में अर्र-बर्र बके जा रिया है।

भैये- थारी बात सौआड़े सच मगर कै करु इस सुन्दर शहर और शहर वासियों की दुर्गति देख म्हारा तो कलेजा भी मुंह को आवे,मगर कै करु किसके घर,दरवाजे छाती कूटू। कोई तो हो जिसके आगे मने दुखड़ा रोलू मैं तो बौल्यू भैये नौकरशाही के साढ़ों ने म्हारा जिला ही न चरा, शहर की सुविधाओं को भी खूँद खाया। आखिर मने तो सिर्फ ये जाडऩा चाहंू कि आखिर बैलगाम सांड ये किसके है। जो खेत भी चर रहे है। और खँूद खँूद उसका सत्यानाश भी कर रहे है। अब ऐसे में म्हारे पास मुंह बजाने के अलावा चारा भी  कै।

भैया- तने तो बावला शै कै थारे को मालूम कोणी म्हारे महान लेाकतंत्र में म्हारे शहर के लिये हजारों करोड़ रुपये की अटालिकाये टिकी है।  तू तो सिन्ध को लेकर संसकित है। यहां तो विकास के रुप में स्वयं गंगा वह रही है। किसी को दो बूंद श्ुाद्ध पेयजल नसीब हो या न हो, गली मोहल्ले,गाँव-गाँव पाश्चिरीकृत शराब तो बिच रही है। कै थारे को मालूम कोणी 150 करोड़ का शराब कारोबार इकिल्ले म्हारे शिवपुरी जिले मे ही हैं,80 करोड़ की सिन्ध जलार्वधन,60 करोड़ की सीवर लाइन,हजार करोड़ से अधिक का शिवपुरी-ग्वालियर फॉरेलेन  मार्ग,हवा में उड़ता 40 करोड़ का पायलट प्रोजक्ट,नवीन स्टेडियम,उन्नयित, सांस्कृतिक भवन,करोड़ों का घसीटता पॉलोटेन्टिक,नवीन चिकित्सालय भवन के नाम बर्बाद होते 19 करोड़,धक्के खादी कृषि मण्डी,जमीन को मोहताज,125 करोड़ का ईन्जीनियर कॉलेज,दम तोड़ती सेकड़ों करोड़ की प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़केे,500 करोड़  के  पलीते के बावजूद हाफनी भरती महात्मा गांधी रोजगार गारन्टी,और भी न जाने क्या क्या है। म्हारे विकास उन्नमुख जिले के बारे में तो बोलने बैठू तो म्हारे विकास की फेरिस्त घड़ी करते करते थक जाओगे अगर लपेटने बैठे भाया तो दो चार हिचके भी कम पढ़ जायेगें।

भैये मैं न सुडऩा चाहंू थारे ये विकास की आला,म्हारे को तो तने बस इतड़ा बता दे कि क्यों म्हारी जलावर्धन रुक गयी? क्यों सीवेज डलने से पूर्व ही ठेकेदार की हिटेची थाने पहुंच थाना कचहरी हो गई? कौड़ पूछेगा उन पार्क वालो से जिनके एक तुगलकी फरमान से जलावर्धन दम तोडऩे के कगार पर पहुंच गई। कौन पूछे इन पर्यावरण विद नौकरशाहों से कि पार्क के शेर तेन्दुऐं,चीतल,हिरन,नील गायों,के झुण्ड सहित हरे भरे जंगल करोड़ो खर्चने के बावजूद कहां समा गऐं। वन्य जीव और घने जंगल काफूर हो गये। जिन्हें लेाग निहार स्वयं को गोरान्वित मेहसूस करते थे। कौन पूछेगा उस पी.डŽलू.डी वाले से करोड़ो रुपया सड़को के रख-रखाव के नाम खर्चने बावजूदकहां गयी शहर की चौड़ी चौड़ी  सुन्दर सड़के क्यों गड्डों से पटा पड़ा है म्हारा  शहर? किसकी सह है जो शहर के विनाश पर रोटियाँ सेकने की साजिस हो रही है ? मैं तों बोल्यू राजनीति अभी इतनी गूढ़ नहीं हुई जो लेाग न समझ सके।

भैये- मने ठहरा गाँव का गवई गंबार मैं कै जाड़ू मने तो इतड़ा जाड़ू कि क्यों इस शहर की दुर्गति हो रही है।

भैया- अब छोड़ भी तू ये जली कटी बाते अब तो चुनाव है। मतदान की बात कर सरकार कैसे बने इस बात पर विचार कर।

भैये- विचार करे म्हारी जूती मने तो पूछड़ा चाहूं कि क्यों जुल्म सह रहे हो शहर वासी। तीन पीढ़ी से पीते वर्षाती गन्दे नाले के पानी पर कोई क्यों  नहीं बोल रहा है।  मुझे तो दुख है इसीलिये ख्ुालकर बोलूंगा, जरुरत पढ़ी तो षडय़ंत्रकारियों की पूरी की पूरी जन्म कुण्डली भी खोलूंगा।

भैया- मने समझ लिया, अब समझ लिया तो समझदार कहलाऊंगा, नहीं तो अगले पाँच वर्ष तक धूल के ढेर पर बैठ सिन्ध,सीवर का मातम मना पऊआ जरुर लगाऊगां। बोल भैया कैसी रही

कभी हर चीज मयस्सर ही थी, मेरे शहर में

जब मुर्दे सामने हों,तो शिकायत कैसी

औद्योगिक निवेश प्रस्ताव के अमल में मध्यप्रदेश 16 बड़े रा'यों में पाँचवें स्थान पर

इंदौर. रा'य सरकार द्वारा विगत वर्षों में उद्योग के क्षेत्र में निवेश बढ़ाने के लिये किये जा रहे अथक प्रयासों की बदौलत औद्योगिक निवेश प्रस्तावों पर अमल में मध्यप्रदेश आज देश के 16 बड़े रा'यों में पाँचवें स्थान पर है। मध्यप्रदेश मे औद्योगिक निवेश प्रस्तावों का क्रियान्वयन वर्ष 2004-05 में 41 प्रतिशत था, जो वर्ष 2012-13 में बढ़कर 55 प्रतिशत हो गया है। वर्ष 2007 से अब तक किये गये करारनामों के अंतर्गत मार्च 2013 तक प्रदेश में 110 उद्योग में उत्पादन शुरू हो गया है। इन उद्योगों में 84 हजार 711 करोड़ का निवेश हुआ है। इन उद्योगों में लगभग डेढ़ लाख लोगों को रोजगार मिला है। प्रदेश में वर्तमान में 74 हजार 614 करोड़ रुपये निवेश की 175 परियोजना में निर्माण कार्य जारी है। साथ ही 3 लाख 86 हजार 337 करोड़ के निवेश वाली 272 परियोजना क्रियान्वयन अधीन हैं।

वर्ष 2003 से 2013 के बीच जीएसडीपी पर प्रदेश का कम्पाउण्डेट एनुअल ग्रोथ रेट (सी.ए.जी.आर.) 15.34 प्रतिशत रहा। इस दौरान प्रदेश का औद्योगिक सी.ए.जी.आर. शानदार 16.54 प्रतिशत रहा।

निवेश प्रस्तावों को जमीन पर लाने के लिये रा'य सरकार की कोशिशों के चलते मध्यप्रदेश 55 प्रतिशत क्रियान्वयन के साथ 16 बड़े रा'यों में पाँचवें स्थान पर है। कर्नाटक, महाराष्ट्र, उड़ीसा, आंध्रप्रदेश और तमिलनाडु जैसे रा'यों से मध्यप्रदेश इस मामले में काफी आगे है।

उल्लेखनीय है कि वर्तमान रा'य सरकार ने औद्योगिक विकास को अपनी सर्वो'च प्राथमिकताओं में रखा है। प्रदेश में पूँजी निवेश बढ़ाने के लिये मध्यप्रदेश इन्वेस्टमेंट फेसिलिटेशन एक्ट 2008 लागू किया गया है। एक्ट में निवेशकों की सुविधा तथा निवेश प्रस्तावों के अनुमोदन के लिये त्रि-स्तरीय साधिकार समितियाँ गठित की गई हैं। निवेशकों को कस्टमाइ'ड पैकेज स्वीकृत करने के लिये केबिनेट कमेटी का गठन किया गया है।

प्रदेश में 7675 हेक्टेयर में 27 नये औद्योगिक क्षेत्र स्थापित किये जा रहे हैं। इस कार्य पर 3022 करोड़ रुपये खर्च होंगे। वर्ष 2012 से 2015 तक 13 औद्योगिक क्षेत्र में 7701 हेक्टेयर पर 481 करोड़ रुपये खर्च कर औद्योगिक अधोसंरचना का विकास किया जा रहा है। वर्ष 2004-05 से 2012-13 तक अधोसंरचना विकास पर लगभग 494 करोड़ रुपये खर्च किये गये हैं।

विद्युत मेगा लोक अदालत में 1052 प्रकरणों का निराकरण - 1 करोड़ 2 लाख की राशि प्राप्त

दतिया दिनंाक 21 सितम्बर 2013 मध्यप्रदेश रा'य विधिक सेवा जबलपुर के निर्देशानुसार दतिया जिले में जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री राजीव शर्मा के मार्ग दर्शन में विशेष विद्युत मेगा लोक अदालत का आयोजन किया गया। जिसमें 1052 प्रकरणों का निराकरण हुआ और 1 करोड़ 2 लाख रूपये की राशि हितग्राहियों द्वारा जमा कराई गई।

विद्युत मेगा लोक अदालत में दतिया में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश जितेन्द्र शर्मा तथा सेवढ़ा में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री ए.के. छापरिया द्वारा विद्युत प्रकरणों का निराकरण किया। डी.ई. एम.पी.व्ही. श्री महेन्द्र कुमार कौशिक ने बताया कि विद्युत मेगा लोक अदालत में सेवढ़ा के 169 प्रकरण निराकृत हुये जिनमें 19.11 लाख रूपये की राशि जमा हुई दतिया ग्रामीण में 214 प्रकरणों में 18.10 लाख की राशि, भाण्ड़ेर में 233 प्रकरणों का निराकरण हुआ जिमसें   20.50 लाख की राशि जमा हुई। इसी प्रकार दतिया शहर के 436 प्रकरण निराकृत हुये जिनमें 44.50 लाख रूपये जमा हुये। विद्युत प्रकरणों के निराकरण में मेगा लोक अदालत के दौरान 50 प्रतिशत की छूट दी गई जिसमें समस्त घरेलू, कृषि, ग्रामीण क्षेत्र के 5 किलोवाट तक के गैर घरेलू व 10 हार्स पावर तक के औद्यौगिक उपभोक्ताओं के सम्पूर्ण राशि एक मुश्त जमा कराने पर 50 प्रतिशत की छूट दी गई। लोक अदालत में विद्युत विभाग के डी.ई. श्री महेन्द्र कौशिक के अलावा सर्वश्री नूतन श्रीवास्तव, गोपेश उपाध्याय, पूनम बघेल, सत्यम सिंह, बृजेन्द्र समाधिया, एम.आर. शर्मा आदि सहित विद्युत विभाग के अन्य अधिकारियों, कर्मचारियों का विशेष योगदान रहा।

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