भाई की आर्शीवाद यात्रा....... तीरंदाज ?

व्ही.एस.भुल्ले/ भैया- जब से म्हारे यात्रा पुरुष आडवाणी जी का रथ क्या रुका देश में विभिन्न यात्राओं की बाढ़ सी आ गयी है। नितीश जी यात्रा, बसुन्धरा जी की यात्रा, अखलेश की यात्रा, रमन सिंह की विकास यात्रा, भाई शिवराज की जन आर्शीवाद यात्रा,श्रीमती सोनिया,राहुल,सिंधिया के रोड और न जाने कितनी यात्राये होना अभी बाकी है।
मने तो वोल्यू भाया इन यात्राओं में ही सत्ता का बैखुण्ड छिपा है। जिसने जो यात्रा निकाली उसने चुनावी फतेंह जरुर प्राप्त की और बैभाव सरकारे कबाड़ी।

पहली मर्तवा जब आडवाणी जी का रथ भारत की सड़को पर क्या दौड़ा भाजपा ने छक्का लगाते हुये केन्द्र में एन.डी.ए. सरकार बनाई सोनिया ने रोड शो क्या किया केेन्द्र में यू.पी.ए. सरकार बना ली। राजस्थान में बसुन्धरा क्या घूमी के उन्होंने भी राजस्थान में भाजपा सरकार बनाई उन्हीं के पद चिन्हों पर चल अखिलेश ने भी उ.प्र. में सायकल क्या घुमाई वे भी उ.प्र. में सžाा हथियाने में सफल रहे।

रथ वालो के सारथी रहे नीतिश क्या जुड़े कि उन्होंने बिहार में दूसरी मर्तवा सरकार बना ली। अब रमण सिंह तो रथ यात्रा पूरी कर नकली लाल किले से यात्रा का मोदी जी से समापन करा चुके है। वहीं भाई शिवराज मय दल बल के जनआर्शीवाद लेने रथ पर सबार उमड़ाती भीड़ के बीच हाथ उठवा आर्शीवाद ले रहे है। और पानी पी पी कर म्हारे डागधर साहब की मन मोहक सरकार को कोश रहे है कि उन्होंने पी.एम.पद की गरिमा गिरा दी।

कै म्हारे भाई की आर्शीवाद यात्रा के समापन को भाजपा के यात्रा पुरुष आडवाणी जी के आर्शीवाद या फिर मोदी जी से ही काम चलायेगी।

भैये- तने क्यों वाबला शैं ये बात तो थारी सो आड़े सच की यात्राओं की महिमा ही निराली है। अब यात्रा वातानुकूलित  राजसी रथ पर हो या फिर पैदल जैसी कि सर्वप्रथम यात्रा म्हारे देश में स्व. पूर्व प्रधानमंत्री चन्द्रशेखर कन्या कुमारी से दिल्ली तक की थी। भैये लेकिन कल ही काडू वोल्यो कि जनता तो जनता है जो भगवान राम की भी नहीं हुई,कै थारे को मालूम कोणी कि 1971 की हीरों रही स्व.इन्दिरा जी,मुरार जी देशाई,स्व.राजीव जी और अटल जी की साइन इण्डिया सरकार को भी म्हारी महान जनता ने एक जटके में  डुबा दिया था। तो थारी बात तो म्हारे मगज से परे है।

भैया- तो क्या छžाीसगढ़ में विकास यात्रा,और म.प्र. की जन आर्शीवाद यात्रा बैकार जायेगी या तीसरी मर्तवा म.प्र. में सिंधिया को रोक भाजपा की तीसरी मर्तवा सरकार आयेगी?

भैये- मैं कै बोल्यू जिस दिन से मने भाई शिवराज  को म.प्र. की बागडोर मिली है, उसी छड़ से भाई आराम से कहां बैठा है। पहले जन शक्ति फिर पक्ष,अब विपक्ष ने भाई को कहां छोड़ा है। रह रह कर कहीं डम्फर तो कहीं माससाहब राजेन्द्र, सूर्यवंशी को लेकर पानी पी.पी. कर कोशा है। छाती  फटे उन मुओं की जिन्होंने भाई की सरकार में म.प्र. को जी भर कर लूटा है। अन्डी ब'चे से मोटाये मुगदरों का आलम ये रहा कि गरीबों का राशन तेल ही नहीं कुपोषितों का निवाला भी इनसे नहीं छूटा है।

मैं तो बोल्यू भैये सबसे बड़ा विनाश का पहाड़ तो म्हारे सिंधिया जी की शिवपुरी पर टूटा है। सुनते है आती सिंन्ध धारा को षंडय़ंत्र कारियों ने शिवपुरी से पहले ही रोका है। सीवेज,सड़क,नया अस्पताल, तो दूर की कोणी अगले कुछ वर्षो तक वर्षाती गन्दे नाले के पेयजल की व्यवस्था का ही ओपशन छोड़ा है। गाज गिरे उन पार्क पर्यावरण वालो पर जिन्होंने म्हारी शिवपुरी की ऐसी दुर्गति की है। कि अब तो शुद्ध पेयजल के आभाव में काग राज भी कनागते आते देख भाग रहे है। वहीं टु़कड़ो को तरसते कुžो भी खीर नहीं खा रहे है।

भैया- तो कै म्हारे भाई का आश्वासन भी बैकार जायेगा जिसमें कि पर्यावरण स्वीकृति, जमीन, पैसा देने की बात कहीं है। फिर थारे सिंधिया की शिवपुरी ही क्या सारे प्रदेश की जनता की 9 वर्षो तक निरन्तर ईमानदारी से चोखी सेवा जो की है। क्या लड़के लड़की,छात्र,छात्राये,बुजुर्ग,गरीब,बेरोजगार, भाईयो सहित मजदूर रैड़ी ठेली वाले सभी को तो भाई ने सौगाते दी है। रही बात वेतन भžाो की तो माई बापों की तो भाई के राज में खूब उचट कर लगी है। मैं तो बोल्यू भाया विगत सात वर्षो में म.प्र. के अन्दर जमकर चांदी कटी है।

भैये- तड़े छोड़ तू ये जली कटी बाते तू तो मने सिर्फ इतड़ा बता जितना भाई ने प्रदेश के हर वर्ग के लिये किया उतने पर तो भाई की सरकार बन जायेगी। जिस तरह भाई को आर्शीवाद देने भीड़ रात 12 बजे तक जमी रही खुद या ढोकर लायी गई क्या वोटो में तŽदील हो पायेगी? म.प्र. के राजनैतिक हल्कों में, एक उड़ती खबर ये भी है कि सरकार बनाने समुचा मैच न सही,स्पॉट तो फिक्स हो चुका इसलिये भाई भी निर्भीक अन्दाज में फतेह हासिल करने लग्झरी रथ में सबार हो आर्शीवाद लेता सुबह 9 बजे से यात्रा शुरु कर रात 2 बजे तक सो रहा है।

भैया- मैं समझ लिया मुश्किल से येन मौके पर बनी कांग्रेस की विभिन्न समितियों के सहारे सिंधिया की चमक म.प्र. में लगता है बहुत कुछ नहीं कर पायेगी। हो चुकी स्पॉट फिक्सिंग में विजम श्री तो भाई के ही हाथ आयेगी। मगर मने न लागे भाई का जोखिम कम हुआ है अगर टीम में समय रहते तŽदीली कर कुछ खिलाडिय़ों को टीम से बाहर का रास्ता नहीं दिखिया तो फिक्सिंग और पूरे 9 साल की नेट प्रक्टिस भी भाई की काम नहीं आयेगी। क्योकि सामने वाली टीम का खिलाड़ी फिलहॉल तो फुल फोर्म है। सिंधिया और  नाथ की ओपनिंग जोड़ी अगर पिच पर जम गयी तो नाथ सिंधिया की जोड़ी म.प्र. में क्या गुल खिलायेगी। मने तो कलेजा मुंह को आवे, यह सुड़ सुड़ कर की मैच में आखिरी गेंद तक भी हार-जीत का जोखिम होता है। सो मैं तो वोल्यू भाया जरा सम्हल कर खेल। गर पढ़ गयी चोखी गेंद सिंधिया जैसे हिटर के हाथों तो स्पॉट फिक्सिंग भी काम नहीं आयेगी और बगैर प्रक्टिस के भरे खिलाडिय़ों की भाई की टीम खड़ी कि खड़ी रह जायेगी। क्योकि भाई लेागों को तो मेहनत के बजाये, ताली ठेाकने की आदत है। मातहत जो भी कहें, हमें तो सžाा में बने रहने जो की आदत है।


प्रत्याशी को देना होगा एक-एक पैसे का हिसाब

शिवपुरी, 11 सितम्बर 2013/ विधानसभा चुनाव के प्रत्याशियों को चुनाव पर व्यय किए गए एक एक पैसे का हिसाब निर्वाचन आयोग को देना होगा, प्रत्याशी चुनाव से संबंधित सभी व्यय बैंक खाते के माध्यम से ही कर सकेगा। यह बात आज कलेक्टर श्री आर.के.जैन ने राजनैतिक दलों के पदाधिकारियों को चुनाव लेखा व्यय के संबंध में आयोजित बैठक में कही। बैठक में एडीएम श्री दिनैश जैन, उप जिला निर्वाचन अधिकारी श्री पी.के.श्रीवास्तव, निर्वाचन व्यय लेखा परीक्षक श्री पेंकरा, राजनैतिक दल कांग्रेस, बीएसपी, सपा तथा भारतीय कम्यूनिष्ट पार्टी के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

कलेक्टर श्री जैन ने कहा कि भारत निर्वाचन आयोग निर्वाचन व्यय को नियंत्रित करने के लिए संवेदनशील है। इसके लिए आयोग द्वारा कड़े निर्देश जारी किए गए है। जिनका पालन किया जाना सभी प्रत्याशियों को अनिर्वाय होगा। उन्होंने कहा कि भारत निर्वाचन आयोग द्वारा विधानसभा निर्वाचन हेतु 16 लाख रूपयें की व्यय सीमा निर्धारित की गई है। जिसके अंतर्गत प्रत्याशी द्वारा भरी जाने वाली नामांकन फीस से लेकर चुनाव प्रचार हेतु उपयोग किए जाने वाले टेंट, माईक, बैनर, पोस्टर, वाहन, विज्ञापन आदि पर व्यय को सम्मिलित किया जावेगा। उन्होंने बताया कि निर्वाचन प्रक्रिया में भाग लेने वाले प्रत्येक उम्मीदवार को नामांकन पत्र दाखिल करने से एक दिन पूर्व किसी भी बैंक में अपने नाम से एक खाता खोलना होगा तथा निर्वाचन के दौरान होना वाला सभी व्यय उसी खाते के माध्यम से किया जाना सुनिश्चित किया जावेगा। 

प्रत्याशी को नामांकन पत्र दाखिल करते समय उस खाते का संपूर्ण विवरण नामांकन पत्र के साथ प्रस्तुत करना होगा। प्रत्येक प्रत्याशी को प्रत्येक तीन दिन में हुए व्यय का लेखा-जोखा निर्वाचन व्यय परीक्षण दल के समक्ष प्रस्तुत करना होगा। प्रत्याशी को एक व्यय अभिकर्ता नियुक्त करने की अनुमति आयोग द्वारा प्रदान की जावेगी। प्रत्याशी द्वारा प्रस्तुत व्यय लेखे को आम जनता को जानकारी देने के उद्देश्य से ऑनलाईन भी प्रदर्शित किया जावेगा। इसके अतिरिक्त कोई भी व्यक्ति एक रूपयें प्रति पृष्ठ प्रत्याशी के व्यय की नकल प्राप्त कर सकेगा। उन्होंने बताया कि निर्वाचन प्रक्रिया समाप्त होने के 30 दिवस के अंदर प्रत्याशी को संपूर्ण लेखा व्यय प्रस्तुत करना होगा।

एक दर्जन एडीईओ को चार-चार वेतन वृद्धि रोकने के नोटिस

ग्वालियर 11 सितम्बर 2013/ जिले की विभिन्न जनपद पंचायतों में पदस्थ एक दर्जन सहायक विकास विस्तार अधिकारियों (एडीईओ) को चार-चार वेतन वृद्धि रोकने के लिये कारण बताओ नोटिस दिए गए हैं। मुख्यमंत्री अंत्योदय आवास, इन्दिरा आवास एवं होम स्टेट आवासों के दायित्व निर्वहन में उदासीनता बरतने पर जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्रीमती सूफिया फारूकी ने यह नोटिस जारी किए हैं।

जिला पंचायत के परियोजना अधिकारी डॉ. विजय दुबे ने बताया कि जनपद पंचायत मुरार में पदस्थ सहायक विकास विस्तार अधिकारी श्री राकेश कुमार गौड़, श्री जे पी जैतवार व श्री राजेन्द्र बांदिल को कारण बताओ नोटिस दिए गए हैं। इसी प्रकार जनपद पंचायत घाटीगाँव (बरई) में पदस्थ श्री नरेश कुशवाह, श्री उमेश मिश्रा व श्री विनोद पथरोलिया, जनपद पंचायत डबरा के सहायक विकास विस्तार अधिकारी श्री नवल शिवहरे, श्री पीएस तोमर व श्री निषिध चतुर्वेदी और जनपद पंचायत भितरवार में पदस्थ सहयक विकास विस्तार अधिकारी श्री लालाराम वर्मा, श्री महेश दुबे व श्री के एस राजपूत को वेतन वृद्धि रोकने के नोटिस दिए गए हैं।

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