गरीबों के हक पर, हाय-हत्या..........तीरंदाज?

मैं कै बोल्यू भाया इस भारत महान में जब भी हम दीन,हीन,गरीबों के हक की बात आती है। देश की राजनीति में हाय-हत्या मच जाती आखिर क्यों? जब भी देश के 7-8 दल 35-40 देश औद्योगिक घरानों की बात आती है। सदन में टेबिले बज जाती है। जिसमें म्हारे भाग्य विधाताओं की बढ़ती सुख सुविधाओं वेतन भžाों के बढऩे की तो आवाज ही हम दीन हीनो के कानों तक नहीं पहुंच पाती है। सदन की कैन्टीनों में ब्रेक फास्ट से लेकर लन्च तक कि दरे वी.पी.एल. तो छोड़ों अन्तोदय श्रेणी से भी नीचे चली जाती है।

भैया- जनतंत्र में राजा जनता है या फिर देश के 7-8 राजनैतिक दल 35-40 औद्योगिक घराने और हमारे जनप्रतिनिधि है, आखिर सच क्या है?

भैये-सवाल तो थारा महान लेाकतंत्र में सौ आने सच, मगर सही गलत की व्याख्या कौन करे? जब कभी कोई व्याख्या होती भी है। तो उसे अक्षरश: माने कौन? अब इससे बढ़ा उदाहरण हमारे लेाकतंत्र में क्या हों सकता है। कि हॉल ही में म्हारे सुप्रीम कोर्ट ने व्यवस्था दी है। कि सजायाफता लेाग चुनाव नहीं लड़ सकते। पूर्व सेना अध्यक्ष के साथ जनतंत्र यात्रा के माध्ययम से देश वासियों से को जगाने ने निकले अन्ना यह कहते नहीं थकते कि भारतीय संविधान में दलीय आधार पर जनप्रतिनिधि चुनने का कोई प्रावधान नहीं। मगर भाई लेाग है कि विगत 50 वर्षो से संविधान की आत्मा को छल्ली कर उसकी भावना का फलूदा बना अपनी किस्मत चमका देश चला रहे है।

भैया-तो क्या हम गरीबों को  लोच वाले आटे के लिये गेंहू भी नहीं मिल पायेगा। क्योकि बगैर लोच वाले आटे को गूथते गूथते हाथ छिल गये बिना लेाच वाले आटे की रोटी चबाते चबाते जबड़े हिल गये। सुना है अब फूड सिक्यूरिटी बिल लेकर गरीबों के साथ हाथ वाले फिलहॉल पिछले दरवाजे से वोटों की जुगत भिड़ाने में जुटे है। मगर म्हारे शिवराज के म.प्र. में तो 1 रुपये किलो गेंहू 2 रुपये किलो चावल के साथ 1 किलो नमक की थैली 1 रुपये में बट रही है। मगर कै करु थारी भावी है जो शिकायत पर शिकायत जड़ रही है। कि आटा कितना भी गूथों लोच नहीं आता रोटी की हालात ऐसी कि गले में नहीं उतर पाती फिर भैये क्या करु कहते है क्या कभी दान की बछियाँ के भी दांत देखे जाते है। ऐसे में कौन समझाये म्हारी भाग्यवान को?

भैये-कैरोसिन से लेकर अनाज चावल ही नहीं अब तो नमक भी 1 रुपये किलो में मिल रहा है। ब"ाों को पोषण आहार,मध्यान किताब,कॉपी,शिक्षा, सायकल,ड्रेस रोजगार शिक्षा,लॉन, किसान, क्रेडिट, कुटीर, पेन्शन, विवाह, जन्म मृत्यु , की व्यवस्था के साथ तीर्थदर्शन भी फ्री फोकट में चल रहा है। मैं तो बौलयू म्हारे म.प्र. मे तो वाक्य में ही राम रा'य चल रहा है। रहा सवाल रसद चोर,गरीबों के हक चोर और लूटपाट में जुटे कुछ डकैतों का तो भैया उनकी भी व्यवस्था भी की जायेगी। सुनते है गर तीसरी मर्तवा सरकार बनी तो थोक बन्द तरीके से चोर डकैतों की भी खबर ली जायेगी। वैसे भी फिलहॉल सरकार की नजर भले ही चोरों पर न हो मगर डकैतों की आओं भगत तो की ही जा रही है। डकैतों के घरों से लाख दो लख नहीं करोड़ों की नगदी और सम्पžिा निकाली जा रही है।

भैया-मगर म्हारे कंाग्रेसी यह कहते नहीं थकते कि सžाा का पका आम है, जो हमारे ही मुंह में गिरेगा वो कैसे?

भैये-मुगालता तो होता ही ऐसा है और यह हकीकत भी है कि बहार आने पर समयानुसार आम पकता भी है। 5-10 साल में सरकारों से भी जनता बेरुखी रखने लगती है। मगर कहते है,खाली, मुगालता पालने वालो की तजबीज ठीक न हों तो पके आमों की लहलाती फसल भी सूख जाती है या फिर आधी वारिस में बर्बाद हों जाती है। सो म.प्र. में भी कांग्रेस की हालात भी कुछ ऐसी ही है।

भैया-मने समझ लिया थारा इसारा मगर कै करु उन मूड़धन्यों का जो सीधे खाते में सबसिटी और सिक्यूरिटी लाने में जुटे है। भाया हम तो पहले ही कैरोसिन गेंहू को सीधे बाजार में बैच सबसिटी नगद उठा रहे है। इतना ही नहीं भाई लेाग राशन कार्ड ही नहीं रोजगार गारन्टी कार्डो पर भी बगैर किसी झंझट के नगद रिण का लाभ उठा रहे है,और मुफलिसी में ही सही अपना घर तो चला रहे है, बोल भैया कैसी रही कोई शक म्हारे मगज पर।

सिंध नदी के सेवढ़ा एवं रतनगढ़ पुल वाहन निकलना प्रतिबंधित

दतिया। संेवढ़ा एस.डी.एम. डा. आर.सी. मिश्रा द्वारा जानकारी देते हुए बताया गया कि सेवढ़ा में सिंध नदी का जल स्तर पुल से १० फिट नीचे होने के कारण पुल से भारी वाहनों का आवागमन भिण्ड़, मौ, ग्वालियर दोनो तरफ से बंद कर दिया गया हैं। पुल पर दोनो तरफ बेरीकेट लगाकर होमगार्ड के पांच-पंाच जवान तैनात किये गये है एवं एस.डी.एम द्वारा लोगो से अपील की गई हैं कि वह पुल एवं नदी के पास न जाये।

वहीं  रतनगढ़ माता मंदिर मार्ग पर स्थित पुल पर दोनों तरफ से वाहनों का निकलना प्रतिबंधित कर दिया गया हैं। उक्त निर्णय सिंध नदी में बढ़े हुए जल स्तर को देखते हुए लिया गया हैं।

रतनगढ़ माता मंदिर बसई घाट सिंध नदी पर बाढ़ से निपटने के लिए होमगार्ड बचाव दल की मौकड्रिल सम्पन्न

दतिया। सिंध नदी में मढ़ीखेडा डैम से ८५००० क्यूसिंक पानी छोडा गया जिसके कारण सिंध नदी में अचानक बाढ़ आ गई अस्तु बाढ़ बचाव कार्य देखने हेतु कलेक्टर श्री संकेत भोंडवे के कुशल निर्देशानुसार रतनगढ़ माता मंदिर बसई घाट सिंध नदी पर होमगार्ड बचाव दल की मौकड्रिल में डिस्ट्रिक कमाण्टेड के.के. नारौलिया के नेतृत्व में बचाव दल में सीताराम कीर प्लाटून कमाण्डर, डिस्ट्रिक कमाण्टेड के.के. नारौलिया, प्लाटून कमाण्डर सीताराम कीर, हवलदार वाहन चालक रमेश कुमार यादव, आरमोरर राकेश कुमार, लाशकर प्रताप सिंह अधिकारी, कर्मचारी एवं सौलह होमगार्ड सैनिक पी.सी.व्ही. ८७ रामस्वरूप, हवलदार १३८  मंगलदास, हवलदार १३५ वलदेव प्रसाद सैनिक ३०  बिहारी, सैनिक १२७  कालीचरण, नायक ५१  दीवान सिंह, नायक १२२ आशाराम, लान्स नायक १४२ महाराज सिंह, सैनिक ४२  कैलाश कुशवाह, सैनिक ३६  मोहन वाथम, सैनिक २३२ देवसिंह, सैनिक २४१ रामदास, सैनिक ५० रामशरण, सैनिक १५३ अमर सिंह, सैथ्नक ४६ रामजीलाल ़द्वारा सिंध नदी पर मौकड्रिल का अभ्यास किया गया। 

जिसे देखकर सुदूर अंचल से आये नागरिक एवं समस्त जिला अधिकारियों द्वारा उक्त प्रदर्शन को देखकर दंग रहे गये जिसमें बहते हुए तीन सैनिकों को बचाया गया एवं होमगार्ड बचाव दल के कार्यकर्ताओं की भूरि-भूरि प्रशंसा की गई। कलेक्टर द्वारा बाढ बचाव दल की परेशानियां सुनी व उनके आवास, प्रकाश की समुचित व्यवस्था करने हेतु एस.डी.एम. सेवढ़ा को मौके पर ही निर्देशित किया गया तथा तैराक दल हेतु निर्धारित यूनिफार्म एवं अन्य उपकरण तुरंत प्रदाय हेतु भी निर्देश दिये गये तथा कहा गया कि वाढ़ आने पर तत्काल बाढ़ बचाव कार्य प्रारंभ करें व आम जनता के जान-माल की सुरक्षा करें यदि आपको इस कार्य में कोई परेशानी या उपकरणों की आवश्यकता हो तो बतायें शीघ्र ही मोटर वोट क्रय कर बचाव दल को दी जावेगी जिससे बचाव कार्य से आसानी होगी एवं निर्देश दिये गये कि प्रत्येक माह बचाव दल इस प्रकार का अभ्यास अद्धयतन जारी रखें ताकि आवश्यकता पढ़ने पर बाढ़ से उत्पन्न विपदा से निपटा जा सके।


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