करो या मरो की मुद्रा में पुलिस

शिवपुरी। गत दिनों पुलिस की सर्जरी कर अवकाश पर गये शिवपुरी पुलिस कप्तान महेन्द्र सिंह के जाते ही अपराधियों ने सर उठाना शुरु कर दिया था इतना ही सतनबाड़ा ग्राम पर दुर्घटना में एक वृद्ध की मृत्यु पर ग्रामीण ने खूब उपद्रव गांठा इस उपद्रव में आक्रोशित ग्रामीणों ने थानेदार सहित हेडकान्शटेबल, आरक्षक को भी बेहरमी से पीटा।

पुलिस कप्तान ने लौटते वक्त ही अधीनस्तो को ताकीत की पुलिस का हर हमलावर गिरफतार हो होना चाहिए साथ ही शहर में चोरियों को अजंाम देने वालों की धरपकड़ तेज होना चाहिए।

पुलिस कप्तान मेहन्द्र सिंह सिकवार की कार्यप्रणाली से वाफिक पुलिस अमले ने आनन फानन में कार्यवाही करते हुये। सतनबाड़ा के पुलिस हमला बरो को गिरफतार किया गया। वहीं शिवपुरी शहर की पॉश कॉलोनी कृष्ण पुरम में हुई। डकैती के आरोपियों को भी धर दबोचा।

कृष्ण पुरम डकैमी में कोतवाली पुलिस ने जहां पवन सेन,रिंकू उर्व रिकोली ,कोली कल्लू उर्फ योगेश खटीक,रमेश चिराड़ लक्ष्मी वाई चिराड़ व अमृत लाल राठौर को गिरफतार किया है। वहीं दतिया निवासी सददाम हुसैन,भोला पण्डित फिलहॉल फरार है।

जिले में अटल नही हुई अटल ज्योति

श्योपुर । प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह चौहान प्रत्येक जिले में २४ घंटे बिजली के लिए अटल ज्योति अभियान का शुभारंभ कर है लेकिन यह योजना महज दिखावा साबित हो रही है। जब से श्योपुर जिले में अटल ज्योति अभियान का शुभारंभ हुआ है तब से यहां बिजली कब आ जाए कब चली जाए कोई पता नही है। और विभागीय अधिकारी काम चल रहा है कहकर पल्ला जाड लेते है।  


उल्लेखनीय है कि जिले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बीते २१ अप्रैल को अटल ज्योति अभियान का उद्घाटना ेिकया था इसेक बाद जिला मुख्यालय पर बिजली की आपूर्त्ति के जो हाल हैं वो खुद इस बात को साबित करने में सक्षम हैं कि जिले के शेष चारों तहसील मुख्यालयों सहित कस्बाई और ग्रामीण इलाकों में क्या हो रहा होगा? इन दिनों शहर में बदतर हुई बिजली की आपूर्त्ति ने जहां प्रदेश सरकार के मुख्यमंत्री और ऊर्जा मंत्री केदावों की हवा निकालने का काम किया है वहीं आम जनता के हितों के साथ खिलवाड की आदी हो चुकी मध्यप्रदेश मध्यक्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के उन आला अफसरों और मातहतों की धींगामस्ती को भी उजागर करके रख दिया है जो तमाम सारे नियम-कायदों के नाम पर भद्र उपभोक्ताओं की कमर भारी-भरकम देयकों और अधिभारों की मार से तोडते आ रहे हैं तथा सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना का संचालन भी ठीक तरह से कर पाने में नाकाम साबित हो रहे हैं। पिछले तीन दिनों से लगातार बाधित हो रही विद्युत आपूर्त्ति ने जहां सरकारी दावों और वादों के प्रति आम जनमानस के अविश्वास को बढाने का काम किया है वहीं विपक्ष में बैठी कांगेक्स के जनप्रतिनिधियों द्वारा लगाए जा रहे उन आरोपों को भी पुष्ट बनाने का कारनामा जाने-अंजाने अंजाम दे दिया है जो इस अभियान के क्रियान्वयन और कामयाबी पर सवालिया निशान लगाते आ रहे हैं तथा साफ शब्दों में कह चुके हैं कि यह योजना भी चुनावी साल के शगूफे से ज्यादा कुछ नहीं है। कंपनी के अधिकारियों से प्रदेश सरकार और ऊर्जा मंत्रालय किस तरह से निपटता है?




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