याचकों की मुद्रा में शासक

व्ही.एस.भुल्ले/ भले ही देश जैसे भी चले, मगर आपदा आते ही हमारे देश के शासक याचक की मुद्रा में आ जाते है और कोड़ी कोडी के लिए हाथ फैलाये खड़े नजर आते है। आखिर क्यों? यह प्रश्न हर समझदार आम भारत वासियों के जहन में गूंजता रहता है। मगर जबाव आज भी अनुत्तरित है।

कारण साफ है सब कुछ स्वार्थो की भेट चढ़ शासको का स्वाभिमान नंगा खड़ा है। देखा जाये तो लोकतंत्र में जनता शासक, और विभिन्न संस्थायें सेवक के रुप में होती है। मगर वर्तमान लोकतंत्र में कुछ संस्थायें शासक और जनता याचक की मुद्रा में खड़ी दिखाई देती है।

अगर प्राकृतिक या नेसर्गिक आपदाओं पर नोटिस ले तो संस्थायें भी लोकतांत्रिक व्यवस्था के सिरमोर होने के बावजूद याचक की मुद्रा में नजर आती है। चाहे भारत की केन्द्र सरकार हो या फिर राज्य सरकारें सभी जनता के आगे याचक कि मुद्रा में नजर आती है। आपदा प्रबन्धन एवं राहत कोश के खाते खुल जाते है। जो कारोड़ों अरबों दान कर सकते है,वह देश की भोली भाली जनता से चन्दा उगाते है। और लम्बा चौड़ा फोटो छपवा सबसे बड़े सहायक नजर आते है।  आखिर क्यों? क्यों अक्षम है हमारी संवैधानिक संस्थायें जिन्हें जन्म से लेकर मौत तक का अधिकार जनता ने संवैधानिक शपथ के रुप में सौंप रखा है।

क्यों मजबूर है देश के धनाडय, कुबेर पति जिन्हें देश वासियों ने मालामाल कर रखा है। मामला साफ है,स्वार्थ और सिर्फ स्वार्थ जिसमें सभी डूब जिन्दगी के हिलोरे ले रहे है। मगर इतनी बड़ी त्रासदी के बावजूद आज भी  सोचने तैयार नहीं। खुले शŽदों में कहें तो लेाकतंत्र में शासक जनता और व्यवस्थापक के रुप में मौजूद सरकारे है।

और राजनैतिक दलो के रुप में साम्रा'यवाद के दलाल,और मीडिया के रुप मे भाड़ों ने लेाकतंत्र की आत्मा को हताहत कर रखा है।

वरना क्या बात है,जो एक शसक्त राष्ट्र के हजारों बैगुनाह नागरिक इतनी बड़ी त्रासदी के शिकार होते। जिस पर किसी प्रदेश के मुख्यमंत्री को कहना पड़ता कि मरने वालो का आकड़ा कभी सही सामने नहीं आ पायेगा? जबकि हजारों देश वसियों की जिन्दा कब्र आज यह सवाल करते नहीं थकती होंगी कि आखिर क्या कुसूर था हम निर्देशों का।

बहरहॉल जो भी हों जिस तरह से भारत के महान लोकतंत्र से सामाजिक ,धार्मिक,आर्थिक क्षेत्रों से विगत वर्षो में बैरुखी हुई है स्वार्थो की खातिर जिसका  वीभत्स चेहरा समुचे देश के सामने है।

अगर आने वाले समय में ऐसा ही चलता रहा तो वो दिन दूर नहीं जब लेागों की आस्था भी बगैर किसी सरमौर की होगी। जिसका चेहरा भी बड़ा ही भयानक होगा।

कुख्यात दस्यु बालकदास हुआ 32 हजारी

दतिया। उ.प्र. तथा म.प्र की पुलिस का सिर दर्द बना कुख्यात दस्यु बालकदास पुत्र हरदयाल ढीमर उम्र 42 साल निवासी जाखेली थाना दबोह जिला भिण्ड पर 5 हजार रूपये का ईनाम घोषित किया हैं। जारी आदेश के अनुसार अपराधी को बंदी बनवाने या सही सूचना देने पर 5 हजार रूपये की राशि से पुरस्कृत किया जायेगा। बालकदास पर थाना दुरसडा, पण्डोखर, लांच, गिजौरा, डबरा, दबोह, आलमपुर में विभिन्न धाराओं के तहत् 18 अपराध पंजीबद्ध हैं। पुलिस अधीक्षक कार्यालय द्वारा प्राप्त जानकारी के अनुसार बालकदास पर ग्वालियर रेंज डी.आईजी. द्वारा 10 हजार, पुलिस अधीक्षक भिण्ड़ द्वारा 5 हजार, झांसी जिले से 12 हजार और दतिया जिले से 5 हजार रूपये की ईनाम को सम्मिलि कर कुल 32 हजार रूपये की ईनाम राशि घोषित की गई है।

सुशासन शिविर में 5 अधिकारी एवं कर्मचारियों के विरूद्ध कार्रवाई

म.प्र. शिवपुरी खनियाधाना  सुशासन शिविरों की कड़ी में कलेक्टर श्री आर.के.जैन ने आज खनियांधाना विकासखण्ड के ग्रामीण क्षेत्रों का भ्रमण किया तथा शासन की योजनाओं के क्रियान्वयन में लापरवाही बरतने वाले ५ अधिकारी एवं कर्मचारियों के विरूद्ध कार्यवाही करने के निर्देश दिए है तथा नामांतरण व विधवा पेंशन के प्रकरणों का मौके पर ही निराकरण कराया गया। कलेक्टर श्री जैन ने कहा कि शासकीय मशीनरी का दायित्व है कि शासन की जनहितकारी योजनाओं एवं कार्यक्रमों का लाभ प्रत्येक जरूरतमंद को उपलब्ध करावेे। उन्होंने कहा कि एसडीएम व जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सहित सभी जिला अधिकारियों को ग्रामीण क्षेत्रों का नियमित भ्रमण करना चाहिए तथा ग्राम की चौपाल पर बैठकर ग्रामीणों से उनकी समस्याओं के विषय में चर्चा करनी चाहिए। इसी उद्देश्य से संभागायुक्त के मार्गदर्शन में जिले में सुशासन शिविरों का आयोजन किया जा रहा है।
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