सत्ता से सख्त सवाल,और भूल सुधार का वक्त, आजादी के 65 वर्ष बाद, सवाल जायज

व्ही.एस.भुल्ले। माननीय उच्चतम न्यायालय के ऐसे वक्त आये निर्णय पर राजनैतिक दलों के विस्लेशक व्याख्या कर जो भी अर्थ निकाले। मगर माननीय सुप्र...

व्ही.एस.भुल्ले। माननीय उच्चतम न्यायालय के ऐसे वक्त आये निर्णय पर राजनैतिक दलों के विस्लेशक व्याख्या कर जो भी अर्थ निकाले। मगर माननीय सुप्रीम कोर्ट का निर्णय बिल्कुल न्यायोचित और राष्ट्रहित में है।

इस निर्णय ने जहां समुचे राष्ट्र लोकतंत्र और लोकतांत्रिक संस्थाओं सहित देश की साथ ही जनता को सम्हालने का मौका भी दिया है वहीं पीडि़त लोगों के लिये सžत्ता से सख्त से सख्त सवाल और संस्थाओं में सुधार का मार्ग प्रस्त भी किया है। देश को आजाद हुये 65 वर्ष हों देश की तीन पीढि़ सफर कर प्रकृति प्रदžत्त सुविधाओं सहित मूल्य सिद्धान्त संस्कारों के लिये संघर्ष रत है। ऐसे में देश के सत्तासीनों से कुछ तो सवाल बनते है।

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी का भी कहना था कि जनता के अधिकार व कर्तव्य है कि न्योचित आशंका वाले हरेक मामले में वह लोकसेवको से सख्ती से हिसाब मांगे उन्हें वर्खास्त कर दिया जाये, अदालत में उन पर मुकदमा चलाया जाये।

मगर वर्तमान लोकतंत्र में शायद ही कोई गरीब सख्ती से कुछ पूछ सके। अदालतो में सžत्तासीन अपराधियों ताकतवरों के खिलाफ मुकदमे ला सके या कोई चला क्योकि भारतीय लोकतंत्र में ऐसे लोगों की फेरिस्त लम्बी है।

मगर सुप्रीम कोर्ट के राजनीतिक सुधार को लेकर दो बड़े ऐतिहासिक फैसलो ने भारतीय लोकतंत्र में लोंगों के हाथ ब्रहम्हाशास्त्र जो थमा दिया है। उन राजनेताओं माफियाओं अपराधियों के खिलाफ जो देश और देश की इज्जत को लूट लोकतंत्र में काकस बना कोहराम मचाये हुये है।

जिस देश में 641 सांसदो विधायकों के खिलाफ गम्भीर किस्म के अपराधिक मामले दर्ज हो। 311 सांसद विधायकों ने हलकनामे में आपराधिक मामलो की घोषणा की। (नेशनल इलेक्शन वाँच) आये दिन चर्चाओं में आते घपले घोटाले सरेयाम हत्या बलात्कार ये हमारे लोकतंत्र की वो नजीरे है। जो हमें हमारे अधिकार कर्तव्यों का वोध कराने कॉफी है जो राजनैतिक दल और लोकतांत्रिक संस्थायें आज चुनाव सुधारों को लेकर हैरान परेशान है।

जिन्हें हर एक गम्भीर घटनाक्रम पर दोषी ठहराया जाता है। जिन लोगों के गठबन्धन से स्वयं जनता परेशान है। जिन कुकर्मो से लोकतंत्र तार-तार है। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का समर्थन कर हम चुनावी सुधारों को अपना अपने पाप ही नहीं धो सकते बल्कि जिसकेे लिये हम समय पर कुसूरबार ठहराये जाते समय देश और अपनी आने वालो पीढ़ी के सामने अपना सर भी गर्व से ऊंचा रख सकते है। क्योकि आजादी के बाद जो सवाल सžत्तासीन या अन्य राजनैतिक दलो सहित जनता के सामने है। वह बड़े ही भया भय और खतरनाक है।

अगर कुछ सवालो का हम संज्ञान ले तो सबसे प्रमुख सवाल यह है। कि क्या कारण है जो देश विस्फोट की तरह बढ़ती आबादी पर कन्ट्रोल नहीं रख  सका? जो सारी समस्याओं की जड़ है। उžधर वोट बैंक की राजनीति और सत्ता में बने रहने का स्वार्थ।

क्या कारण है जो 49 रुपये का डॉलर 61 रुपये के पार है?
क्या कारण है जो प्रकृति प्रदžत्त शुद्ध पेयजल और स्वच्छ आंवो हवा के बीच सर पर लोग छत के लिये मोहताज है।

क्यों आज तक सभी को सहज सस्ती सुगम शिक्षा,स्वास्थ सुविधाये,सड़के नहीं मिल सकी?

क्यों लोगों 21 वी सदी में भी बिजली के लिये मोहताज वो कौन से कारण मौजूद रहे जिनके चलते देश आतंकवाद नकस्लवाद जैसी गम्भीर समस्याओं से निजात नहीं पा सका?

क्यों देश की राजधानी या महानगरों की सड़के ही नहीं गांव देहातो में माता बहिनो,बच्चियों की इज्जत बड़े ही लोमहर्षक तरीको से सरेयाम रौध दी जाती है?

क्यों देश के लिये स्वयं सर कटा गर्व महसूस करने वाली नस्ल चन्द सिक्को की खातिर अपने जमीर स्वाभिमान को तार-तार करने पर उतारु हों जाती है?

जो देश कभी हरित क्रान्ति ला, जय जवान, जय किसान, का नारा लगाते नहीं थकता था। उसकी नस्ल गांव देहातो में ही कुपोषित से नहीं शहरों मेंभी सोमालिया से बुरी स्थिति में दम तोड़ती  है।

क्या कारण है कि जघन्य या गम्भीर अपराधों के आरोपी संसद विधानसभा में बैठ लोकतंत्र ही नहीं संवैधानिक संस्थाओं को जीभ चिढ़ाते है? आज देश के सामने ये, वो यक्ष प्रश्न है जो किसी भी इन्सान के जमीर को जगाने कॉफी है ये अलग बात है कि हमारे लोकतंत्र में जो गन्दगी पैर जमाये बैठी है और सžत्ता के स्वार्थियों से गलबहियां किय लोकतंत्र को अपनी रखेल समझती है, लगता है अब उसके टूटने का वक्त आ गया है। निश्चित ही कुछ समय भले ही लग जाये। मगर ऐसा अब बहुत दिनों तक चलने वाला नहीं, यही अन्तिम सत्य है।

पुलिस अधिकारी आम जनता में व्यवहारिकता अपनाकर पुलिस की छवि सुधारें: गृहमंत्री
दतिया। मध्यप्रदेश शासन के गृहमंत्री उमाशंकर गुप्ता द्वारा दतिया प्रवास के दौरान  पुलिस कन्ट्रोल रूम में पुलिस अधिकारियों की बैठक ली। बैठक में गृहमंत्री ने कहा कि आम जनता में अपनी छवि सुधारें थाने पर आने वाले पीडितों की एफआईआर काटे और कोशिश करें कि न्याय की आस में आने वाली लोगों को न्याय जरूर मिले।

प्रदेश के गृहमंत्री उमाशंकर गुप्ता ने कंट्रोल रूम में बैठक लेते हुए पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिये। इस अवसर पर आईजी चंबलएस.एम. अफजल, डीआईजी डी.के. आर्य, कलेक्टर संकेत भोंडवे, पुलिस अधीक्षक चंद्रशेखर सोलंकी, एसडीएम दतिया कमलेश भागर्व, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक जे.एस. भदौरिया, एसडीओपी दतियाएम.एल. ढोड़ी, एसडीओपी भाण्डेरएन.एस रावत, एसडीओपी सेवढा बी.एन. बासवे सहित अन्य थाना प्रभारी व अधिकारी मौजूद रहे।

गृहमंत्री द्वारा पुलिस अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि किसी भी नेता के दवाब में न आते हुए निष्पक्ष रूप से कार्यवाही करें और आम जनता में अपनी छवि बनायें। इसके लिए प्रबुद्व थाने में बुलाकर उनसे क्षेत्र की समस्याओं के संबध में चर्चा करें और उनकी राय लें। बैठक करीब एक घंटे तक चली।

इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक चंद्रशेखर सोलंकी ने गृहमंत्री को कानून व्यवस्था और क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति की जानकारी देते हुए विधानसभा चुनाव निर्विघ्र संपन्न कराने के लिए पुलिस बल व संसाधनों की कमी से अवगत कराया। इस पर गृहमंत्री श्री गुप्ता ने संसाधनों व पुलिस बल उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया।

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Village Times: सत्ता से सख्त सवाल,और भूल सुधार का वक्त, आजादी के 65 वर्ष बाद, सवाल जायज
सत्ता से सख्त सवाल,और भूल सुधार का वक्त, आजादी के 65 वर्ष बाद, सवाल जायज
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http://www.villagetimes.co.in/2013/07/65.html
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