सिन्ध के नाम सांप सूंघा, बड़े बड़े मठाधीसों कोए जंगल में जंगल राज

व्ही.एस.भुल्ले/शिवपुरी। किसको नहीं पता शिवपुरी की जनता विगत वर्षो से बरसाती गन्दे नाले का पानी पी पी कर जान लेवा बीमारियों से ग्रसित हो तिल-तिल मर रही है जिसमें विगत 20 वर्षो से तो बर्षाती नाले के गन्दे पानी के लिये ही संघर्ष कर इधर उधर पेयजल के लिये भटक रही शहर वासियों को शुद्ध पेयजल को लेकर लगभग 4 लोक सभा,विधानसभा चुनाव हारे जीते जा चुके केन्द्र से 82 करोड़ से अधिक स्वीकृति व 35 करोड़ से अधिक रुपया खर्चने के बावजूद आज दिनांक तक शहर वासियों को एक बूंद तक सिन्ध की नसीब नहीं हुई है।


जैसे तैसे वन पर्यावरण की स्वीकृति पश्चात और मुख्यमंत्री के स्वयं के इस आश्वासन के बाद की वह स्वयं शिवपुरी सिन्ध का पानी मुहैया कराने आयेगें। इतना ही नहीं केन्द्रीय ऊर्जा मंत्री भी कह गये कि वह अगस्त में शहर वासियों को सिन्ध का पानी देने केन्द्रीय मंत्री कमल नाथ को लायेगें मगर इस बीच माधव नेशनल पार्क के आला अधिकारियों की शान में न जाने क्या गुस्ताखी हुई कि उन्होंने स्वीकृति की शर्तो की शान में गुस्ताखी मान आनन फानन में सिन्ध परियोजना पर ताला जड़ दिया।

मीडिया में हो हल्ला देख पालिका अध्यक्ष और उनके पति अवश्य छणिक आये मुख्यमंत्री को पार्क वालो की गुस्तागी से अवगत कराने पहुंचे मगर मुख्यमंत्री भी मामला दिखवाने की कहकर पलड़ा छाड़ते दिखे सुना है पार्क वालो की गुस्तागाी पर वन मंत्री ने अवश्य संज्ञान लिया है। मगर स्थाई कोई आश्वासन आज तक नहीं दिया है। जब 800-900 फिट तक जल स्तर नीचे जा चुका है। और शहर का बर्षाती नाला,गटर,गंदे नाले में तŽदील हो चुका है। ऐसे में अन्दाजा लगाया जा सकता है। कि शिवपुरी शहर की ढाई लाख के करीब जा पहुंची आबादी का क्या होगा। अन्दाजा लगाया जा सकता है ।

बहरहॉल जहां तक शिवपुरी वासियों को सिन्ध के शुद्ध पेयजल मुहैया कराने का सबाल है तो इसकी शुरुआत 1986 में पूर्व म.प्र. सरकार के मंत्री स्व.दाऊ हनुमंत सिंह ने पूर्व मुख्यमंत्री स्व.अर्जुन सिंह के शिवपुरी आगमन पर शिवपुरी को सिन्ध का पानी मिले मुख्यमंत्री से घोषणा  कराई थी। जिसकी स्वीकृति गोराटीला पर स्टॉप डेम बना 18 कि.मी. लम्बी लाइन डाल पेयजल मुहैया कराने की दी गई। जिसकी लागत तब लगभग साढ़े बाइस करोड़ थी।

मगर यह योजना पूरी होती इससे पहले धक्के खाती पेयजल योजना पर वर्तमान ग्वालियर सांसद श्रीमंत यसोधरा राजे ने संज्ञान लिया। इस बीच यसोधरा राजे सिंधिया ने तत्कालिक पेयजल संकट समाधान हेतु शहर में चार सम्पबैल बनवाये और दौड़ भाग कर मड़ीखेड़ा  से सिन्ध का पेयजल मुहैया कराने 62 करोड़ की स्वीकृति दिलाई।

मगर समय के साथ योजना की कीमत बढ़ी और यह येाजना 82 करोड़ के आसपास जा पहुंची जब एक मर्तवा सम्बन्धित मंत्री जयन्त मलैया आये तो उन्होंने टूरिष्ट विलेज पर पत्रकारों से साफ कहा था। कि हम शिवपुरी वासियों को इतना मंहगा पानी नहीं पिला सकते मगर यसोधरा राजे ने हिम्मत नहीं हारी और प्रायवेट पार्टनर शिप के तहत इसे मंजूरी भी मिली और चुनाव के दौरान म.प्र. के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने कुछ राशि भी दी। मगर अधिकांश केन्द्र का पैसा दिलाने में ऊर्जा मंत्री की भी भागीदारी रही। मगर आज सभी के प्रयास जंगल वालो के जंगल राज के आगे अधूरे है।

मगर आम वुद्धिजीवी या शहर वासियों को यह समझ से परे है। कि माधव नेशनल पार्क की ऐसी कौन सी शर्तो का अल्लंघन हुआ। जो माहती पेयजल योजना को रोकना पढ़ा बैसे भी मोटे तौर पर समझा जाये तो पार्क के जानवरों की रक्षा और पार्क में मौजूद जानवरों की जान को खतरा या खलल न हों यह तो पार्क अमले की डियूटी हो सकती है। घने जंगल न कटे यह जबावदेही भी हो सकती है। मगर ऐसा कुछ तो हुआ नहीं फिर कौन सी शर्त सबा करोड़ जमा कराने के बाद उलझ गयी।

फिलहॉल तो मामला साफ है नादिरशाही सल्तनत में जो हो जाये सो कम मगर धन्य है शिवपुरी शहर की जनता जिसने उफ तक नहीं की। न ही बड़े बड़े घोषणा वीरों ने इतने अहम मसले पर अभी तक जुवान खोली। देखना होगा आखिर क्या चुनाव पूर्व शिवपुरी वासियों को सिन्ध का पानी मिल पाता है। या फिर एक और विधानसभा चुनाव सिन्ध के सहारे हारा या जीता जाता है।
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