सेना तुझे सलाम: स्वार्थ: मत लो इन्तहा, देश के स्वाभिमान का

जिस तरह की आपदायें हमारा देश और देश वासी झेल रहे, अगर यह क्रम यू ही जारी रहा तो वो दिन दूर नहीं जब स्वाभिमान के इन्तहा के  चलते स्वार्थ और स्वार्थियों को देश में सर छिपाने जगह नहीं मिलेगी। चाहें वह लेाकतंत्र में मौजूद साम्रा'यवादी ताकते हो या फिर कुबेर पति सभी को वर्तमान भूत,भविष्य का जबाव देना होगा।

देश की पवित्र देव भूमि पर विगत दिनों आये नरसंहारक जलजले की तबाही पर जिसके जो भी प्रयास पीडि़तो की मदद के लिये रहे हो। मगर जिस तरह का व्यवहार सžाासीन राजनैतिक दलो और देश के कुबेर पतियों का रहा, वह काबिले गौर है। पूरे एक सप्ताह पश्चात सžाा को स्वार्थो की खातिर अंगीकार करने वालो के, न ही कुबेर पžिायों के कैम्प से ऐसी कोई खबर नहीं आयी कि, वह देश और देश वासियों के साथ इस दुख की घड़ी में बराबर के भागीदार है। छोड़ सहारा समूह को।

ये अलग बात है कि पीडि़तों की मदद के लिये अकेला सहारा समूह और मीडिया जगत स्वाभिमान की खातिर सामने आया, इस बीच कुछ रा'य सरकारों का भी नीतिगत फैसला सामने आया इतना ही नहीं केन्द्र सरकार के मुखिया और यू.पी.ए. प्रमुख के हवाई दौरे पश्चात उžाराखण्ड सरकार को 1000 करोड़ रुपया भी मिला।

मगर युवा नेताओं का चेहरा देश वासियों को इस महा विपदा की घड़ी में साथ नहीं दिख पाया। जो देश को नई दिशा देने का दम भरते नहीं थकते।

अब यहां यक्ष प्रश्र यह है आखिर कौन है जो इस महान लेाकतंत्र को व्यक्तिगत स्वार्थो से इतर बचा सके। क्या भारत के इस महान लेाकतंत्र का महान मतदाता सिर्फ और सिर्फ वोट डालने भर की मशीन बन कर रह गया है। जिसे वोट डालने अपने अपने स्वार्थो की खातिर लेाकतंत्र के चारो स्तम्भ चुनाव के हर 5 वर्ष बाद उकसाते रहते है।

भारत का इतिहास गवाह है। कि भारत वासियो ने कुछ भी किया हो मगर कभी स्वाभिमान से समझौता नहीं किया।परिणाम की विपदा की घड़ी में हमारी महान स्वाभिमानी अुनशासित सेना और उसके जवान ही, अपने देश वासियो के साथ उžाराखण्ड में मैात के मुहाने पर भीषण त्रासदी के वख्त साथ खड़े है, या फिर देश के वो लेाग जिन्होंने हेसियत न होने के बावजूद भी सहायता के लिए सामने आये जो जिन्दा रहने जैसे तैसे दो जून की रेाटी कमा देश व देश वासियों की मदद के लिये तत्पर  दिखे जबकि होना तो यह चाहिए था। कि उžाराखण्ड की त्रासदी के लिये 8 दिन तो बहुत होते है। 24 घन्टे में देश वासियों को राहत और सुरक्षा पहुंचाना चाहिए थी। जिससे देश का विपदा में फसा आम नागरिक अपने आपको सुरक्षित,और संक्षम महसूस कर पाता। मगर उžाराखण्ड की देव भूमि पर आये भीषण जलजले के पश्चात देश वासी ऐसा महसूस नहीं कर सके। कारण साफ है अपने अपने स्वार्थेा में उलझे हमारी संस्थाओं के पास पूर्व सोच ही नहीं, अगर इन्हीं स्वार्थियों की तरह देश के  आम मजदूर, किसान,सैनिक ने भी कहीं स्वयं के स्वार्थो को सुरिक्षत कर जीवन यापन करने पर गर उतर आया तो क्या तस्वीर होगी,हमारे देश की, इसका अन्दाजा लगाया जा सकता है बेहतर हो अभी भी वक्त है हम अपने अपने स्वार्थ छोड़ देश और देश वासियों की सेवा में जुटे।

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