जिन्दगी के बीच, मौत की दस्तक, सर्वोपरि स्वार्थ बन सकते है, सर्वनाश की जड़

व्ही.एस.भुल्ले/  किसी भी त्रासदी के लिए सरकार पर दोष मडऩा स्वभाविक है क्योकि संवैधानिक तौर पर जन्म लेने से लेकर मरने तक की सारी व्यवस्था सरकार के जिम्मे है। जिसके प्रमाण हमारे सम्माननीय संविधान की प्रस्ताव में स्पष्ट उल्लेखित है।
उसके बावजूद भी लेाग प्राकृतिक आपदा या फिर मानवीय स्वार्थ के शिकार हों काल के गाल में समा रहे है, तो इसके लिये जिम्मेदार निहित स्वार्थ ही है जो आज हमारे उन्नत समाज में सर्वोपरि है। अगर ये सच है, तो हम को इस तरह कि त्रासदियों के लिए तैयार रहना चाहिए। न कि विलाप कर व्यवस्था पर गुस्सा फोडऩा फिलहॉल तो देश के सामने उतराखण्ड में हुई भीषण प्राकृतिक आपदा का रौद रुप मौजूद है, मगर मानवीय आपदा के जो रुप भविष्य में हमारे सामने आने वाले है। वह बड़े ही भीभत्स और भयानक होंगे। क्योकि आज भी हम पूर्व व्यवस्था बनाने के बजाये मातम मनाने के आदि हो चुके है। चाहे वह नरसंहार हो या फिर ऐसी प्राकृतिक आपदाये जो उžाराखण्ड में आयी हुई है। ऐसी आपदाओं से हम आज तक सबक नहीं ले सके।

1947 के बटवारे से लेकर इमरजेन्सी,1984 के दंगे अयोध्या काण्ड गोधरा,गुजरात,मुम्बई के बम धमाके सहित आंतकी हमला नक्सली  हमला जम्मू काश्मीर का आतंकवाद, रेल सड़क, हवाई दुर्घटनाये हुई हों। यूं तो न जाने कितनी बार हमने त्रासदियों को झेला है। मगर आज तक हमने कुछ भी सबक नहीं लिया और न ही कुछ  किया। परिणाम आज भी  वहीं ढांक के चार पात। सवाल साफ है। कि आज भी हम अपने अपने स्वार्थो के लिए ऐसी घटनाओं को झेलने के लिए आदि हों चुके है।

बड़ी ही शर्म आती है जब देश में संवैधानिक पदो पर देश वासियों की सेवा के लिए बैठे लेाग व्यवस्था से करोड़ों की पगार पाने वाले काबिल लोग एक गरीब के जीने के लिए प्रतिदिन का हिसाब 32 रुपये प्रतिदिन बताते है। कोई भी आपदा आने पर देश वासियों के सामनेे हाथ फैलाते है विश्व की गिनी चुनी महाशक्तियों में शामिल देश के कर्žाा धर्žाा अपनी मजबूरी गिनाते है। सवा अरब का नेतृत्व करने वाले जब जरा जरा सी त्रासदियों पर मजबूर नजर आते है। तो शर्म आती है कारण साफ है विगत दो दशकों से राजनैतिक दलो और सžाा सीनो के सर पर सžाा का ऐसा नशा चढ़ा जो कोई भी सžाा नहीं छोडऩा चाहता। जो एक बार सžाासीन क्या हुआ पीढ़ी दर पीढ़ी देश की वेवस जनता की सेवा कम शासन करना चाहता है। ऐसे में ऐसे लेागों का पहला और अन्तिम लक्ष्य सिर्फ सžाा में बने रह,अपनी पीढ़ी दर पीढ़ी सžाा का रास्ता बनाये रखना है। अब इस लक्ष्य को हासिल करने चाहे देश तबाह हो या फिर देश वासी बर्बाद, उन्हें सिर्फ और सिर्फ सžाा बनी रहे इस दिशा में कार्य करना है।

अगर ऐसा नहीं होता तो देश में विगत दो दशको से कभी धर्म तो कभी जाति आतंकबाद,नक्सलबाद के नाम खुलेयाम खून की होली और रेल एक्सीडेन्ट रोड़ एक्सीडेन्ट सहित तास के पžाो की तरह ढहती ईमारते और उžाराखण्ड में हुई देव भूमि की त्रासदी का मुंह देश वासियों को नहीं देखना पड़ता।

आखिर क्या कमी है हमारे देश और देश वासियों में न तो तन की कमी है न ही मन और न ही धन की, फिर भी हर त्रासदी पर हम असहाय और वेवस नजर आते है।

कुछ दिन पूर्व उžाराखण्ड की देव भूमि पर आये जल जले के साथ सैलाब में गयी हजारों तीर्थ यात्रियों की वेवस जाने और मौतो की कहानी भी ढक जायेगी।

मगर क्या हमारे लेाकतंत्र को चलाने वाले राजनैतिक दलो और नेताओं को कभी ये बात समझ आयेगी कि दगा किसी का सगा नहीं होता और प्राकृतिक आपदाये पहचान कर नहीं आती आज हमारी बारी है। तो कल उनकी भी बारी हो सकती।

क्योकि लेाकतंत्र के नाम जो साम्रा'यवाद का खतरनाक खेल देश में चल रहा है। वह बड़ा ही खतरनाक है, भले ही वह वैचारिक, पारिवारिक या फिर आर्थिक साम्रा'यबाद  हों बेहतर हो हम समय रहते सुधर जाये। वरना प्रकृति ने सुधार शुरु किया तो काफी वीभत्स और दर्दनाक होगा।

विद्युत विभाग की लापरवाही से हो रहे निरंतर हादस

दतिया। मध्यप्रदेश मध्यक्षेत्र विद्युत वितरण कम्पनी लिमिटेड की लापरवाही और अनदेखी से जिले में लगातार हो रहे हादसे का शिकार गोराघाट पुलिस क्षेत्रांर्गत उपराँय निवासी श्रीमती बलकुँअर पत्नि  छोटेलाल कुशवाह अपनी भेंस व उसके बछड़े को चरा रही थी तभी ११ केवी की हाईटेंशन लाइन के नीचे लटक रहे तारों से बछ़ड़े को करंट लगा और घटना स्थल पर मौत हो गई। श्रीमती बलकुँअर अपनी भेंस को करंट लगने से बचाने गई तो उसे भी जोरदार झटका लगा और वह बच गई। उक्त नीचे तारों की सूचना ग्रामीणों द्वारा विभाग को पूर्व में दी गई किन्तु विभाग द्वारा कोई कार्यवाही न हीं की गई।

जिले में लगातार हो रहे हैं गंभीर हादसे कुछ दिनों पूर्व ही मार्च में ग्राम नन्दपुर में करन कुशवाह पुत्र अमरजू की नीचे तारों के कारण मौत हो गई थी। इसी क्रम में गत माह में सीतापुर में शिवकमार राय लाइनमेंन काम करते करंट का शिकार हुआ था जो गंभीर रूप से घयल हुआ था। दिनांक २० जून को ही दतिया सीतासागर के पास लाइनमेंन काम करते समय खंभे से गिरा और मौत हो थी। फिर भी कुभकरणीय निद्रा में विभाग लीन है और जिले में रोज हो रहे हैं हादसे।
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