कॉग्रेस: कैसे मिलेगी सत्ता? लावारिस है बूथ,खाली पढ़े है सेक्टर

व्ही.एस.भुल्ले। भले ही राहुल की नसीहत पर सभी कांग्रेसी छत्रप गत दिनों भोपाल पी.सी. में साथ दिखे हों और सभी को समेट कर्नाटक फॉरमूले की तर्ज पर प्रदेश प्रभारी बी.के हरिप्रसाद निश्चिंत मुद्रा में दिखे हो जिनके समकक्ष सभी नेताओं ने मीडिया के सामने अपनी अपनी बात कहीं जहां केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि यहां जितने भी नेता मौजूद है। उनमें कोई भी मुख्यमंत्री की दौड़ में नहीं।

वहीं कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने चुटकी लेते हुए कहा कि मैं तो पहले ही कहता था कि हम एक थे। एक है,एक ही रहेगें। वहीं कमलनाथ ने कहां कि उन्होंने सबसे ज्यादा राशि प्रदेश को दी है। उन्होंने शासकीय कर्मचारियों और अधिकारियों को भी आगाह किया।

कुल मिलाकर यो कहें कि जिस भी फॉरमूले या फिर राहुल की नसीहत पर नेताओं की मण्डली एक दिखी हों जिसे एक करने पुन:प्रदेश अध्यक्ष द्वारा प्रदेश कमेटी की पूरी जम्बों जैड सूची जारी करना पढ़ी। जिसे देखकर तो यहीं कहां जा सकता है कि कार्यकर्ता हों या न हों कम से कम पद कबाडऩे वालो की तो अच्छी खासी फौज है।

मगर सत्ता की खातिर एक होती कांग्रेस को सबसे बुरी खबर यह है। कि अब न तो कांग्रेस के पास कांग्रेस समर्पित सशक्त संगठन है न हीं कार्यकर्ता, ऐसे में कांग्रेस के पास केवल प्रबन्धकों की फौज भर है जो अपने अपने सी.ईओं. की वफादार है। अब इन्हें नेता कह लों या फिर कार्यकर्ता मगर इनमें न तो वो नेताओं वाली बात है। न ही इन पर एक भी समर्पित कार्यकर्ता यहां यह उल्लेख करना जरुरी है,कि जिस दल से कांग्रेस सžत्ता छीनना चाहती है। वहां समर्पित प्रशिक्षित नेता कार्यकर्ताओं की आज लम्बी चौड़ी फौज है। तो दूसरी ओर विगत 9 वर्ष पुरानी सरकार जो निर्विवाद रुप से लेाकप्रिय हों सत्ता चलाती आ रही है।

अगर यो कहें कि कांग्रेस की बदकिस्मती यह रही कि विगत 20 वर्षो से वह व्यक्तिवादी चापलूस राजनीति का दंश झेलती-झेलती रसातल में जा पहुंची है। तो कोई अतिसंयोक्ति न होगी।  क्योकि स्व. नरसिंह राव के कार्यकाल से शुरु हुई कांग्रेस नेता और कार्यकर्ताओं की निरन्तर उपेक्षा ने आम कांग्रेसी को जड़ तक तोड़कर रख दिया है। खाना बदोस की हालात में वह आज भी घोर उपेक्षा की बीच जिन्दा तो है। मगर उसके शरीर में जान नहीं। जो अब कांग्रेस के लिए संघर्ष कर सके।

ऐसे में इन नेताओं का एका इन कांग्रेसियों की जड़ों में कितनी जान फूंक पायेगा। देखने वाली बता होगी

आम कांग्रेसी जहां का तहां: मठाधीशों के आगे झुका आलाकमान

भोपाल एका को दिखा आलाकमान ने म.प्र. कांग्रेस की सर्जरी स्वीकार कर भाजपा से लडऩे तो तैयार कर लिया मगर वह मूल कांग्रेस में जान नहीं फूक पाया। बात यह नहीं कि कौन सी कांग्रेस किस किस नेतृत्व में कैसे लड़ेगी असल सवाल तो यह होना था कि असल रुप में कांगे्रेस कैसे खड़ी होगी। क्योकि जो लेाग संगठित रुप से विगत 20 वर्षो से कांग्रेस पर काबिज है। या कांग्रेस उन पर काबिज है।

यह अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया मगर आलाकमान को भी यह सोचना होगा खासकर राहुल को आखिर कौन लेाग है दिल्ली और भोपाल में जो पूरे के पूरे कांग्रेस जैसे वृहत संगठन को चट कर गये। और आज कांग्रेस आलाकमान को म.प्र. में सžत्ता के लिए संघर्ष हेतु एक मंच पर बैठालना पढ़ रहा है। वो भी पूरी नजाकत के साथ, हो सकता है,आलाकमान की सहीं सोच हो मगर लगता नहीं संगठनात्मक,सकारात्मक रुप से शसक्त भाजपा इतनी आसानी से सžत्ता छोडऩे वाली है।

क्योकि जिस तरह से बूथ स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक भाजपा की सजावट है। उस स्थति में कांग्रेस के पास वूथ तो दूर की कोणी वार्ड पंचायत स्तर भी कोई समर्पित नेता रहा हो इन 20 वर्षो में, कहना मुश्किल। कारण साफ है व्यक्ति सेवा और टिकिट की आशा जो आज तक जीतते रहे उनका अपनी ही ताकत का जमुड़ा है। वाकी तो सब घास कूड़ा है। ऐसे में नहीं लगता यहां कर्नाटक या कोई भी फॉरमूला काम कर पायेगा। यहां यक्ष प्रश्र यह है कि 20 वर्ष के बाद ये बताने कौन जायेगा कि कांग्रेस क्या है राहुल कौन?

मजबूत लोकतंत्र सबकी भागीदारी: मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी


दतिया। मजबूत लोकतंत्र सबकी भागीदारी को साकार करने हेतु मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के निर्देशानुसार जिले की सेवढा, भाण्डेर, दतिया विधानसभा क्षेत्रों में मतदाता सहायता केन्द्र स्थापित किये गये है। जिनमें मतदाताओं को विभिन्न प्रकार की सुविधाऐं दी जा रही है। विधानसभा क्षेत्र सेवढा का मतदाताा सहायता केन्द्र तहसील कार्यालय सेवढा में संपर्क नम्बर ८१०९९८३४८०, भाण्डेर विधानसभा क्षेत्र का मतदाता सहायता केन्द्र तहसील कार्यालय परिसर में है संपर्क नम्बर ९९२६२३५३३३ है। दतिया विधान सभा क्षेत्र के लिए मतदाता सहायता केन्द्र कलेक्ट्रेट कार्यालय दतिया मे ंसंचालित है जिसका संपर्क नम्बर ८४३५४६२२०७ है।

प्रभारी कलेक्टर श्री सुरेश शर्मा द्वारा जिले के मतदाताओं से अपील की है कि वह मतदाता सहायता केन्द्रों में पहुचकर आवश्यक सुविधाऐं प्राप्त करें। मतदाता सहायता केन्द्रों में विधान सभा क्षेत्र का कोई भी मतदाता निम्न सुविधायें प्राप्त कर सकते है। डुप्लीकेट मतदाता कार्ड तत्काल बनवाये। मतदाता सूची में नाम जोडने व नवीन कार्ड हेतु फार्म ६ जमा करावें, १५ दिवस के अंदर कार्ड प्राप्त करें। पुराने कार्ड की त्रुटियों में सुधार हेतु फार्म नम्बर ६ भरकर प्रस्तुत कर, १५ दिवस के अंदर कार्ड प्राप्त करेें। फार्म ७,८, ८क जमा करें। नाम जोडने हेतु फार्म नम्बर ६, नाम डिलीट हेतु फार्म नम्बर ७, संशोधन हेतु फार्म नम्बर ८, विधानसभा में एक स्थान से दूसरे स्थान पर नाम स्थानांतरित हेतु फार्म नंबर ८क भरें।


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