विधानसभा की आहट से कई समाज सजग दलों को करना पड़ सकता है, आक्रोश का सामना

शिवपुरी। आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर जिस तख से कई समाज सजग होकर सक्रिय लगता है। दोनों ही राष्ट्रीय राजनैतिक दलो को इस मर्तवा आक्रोश का सामना करना पड़ सकता है।

चुनावी रायसुमारी के बीच कई समाज के लेागों का कहना है कि वोट किसी के और विधायक बने कोई। कम से कम इस मर्तवा तो ऐसा नहीें होने देंगे। लोगो का कहना है कि हमें विगत 65 वर्षो से छला जा रहा है। कभी किसी व्यक्ति को समाज का ठेकेदार समझ टिकट थमा दिया तो कभी विकास का हवाला दिया गया। मगर हम लेाग आज भी वहीं के वहीं खड़े है। मगर अधिकांश लेागों में चर्चा है कि इस मर्तवा जो भी प्रत्याशी हों एक तो वह बिल्कुल नया हो दूसरा उसमें लेागों की निस्वार्थ भाव से सेवा करने का मादा हो। न कि वह अहंकारी और मतलवी हों क्योकि हर चुनावों में हम भोले भाले मतदाताओं को छले जाने की परम्परा 65 वर्षो से रही है। मगर इस मर्तवा ऐसा नहीं होगा।


जहां तक पिछोर विधानसभा क्षेत्र का सवाल है तो कोई कितना ही जतन कांग्रेस का टिकिट हासिल करने कर ले मगर इस क्षेत्र में विगत 15 वर्षो में स्थति ऐसी बनी है। कि कोई नया नेता उभर ही नहीं पाया न ही भाजपा का कोई नेता टिक पाया हालाकि यह क्षेत्र,लेाधी,आदिवासी,यादव,ब्राहम्ण बहुल्य है।

रहा सवाल कोलारस का तो यहां विगत 10 वर्षो से भाजपा का दब दवा है। और कांग्रेस दव दवे के लिए संघर्षशील है, मगर यहां कांग्रेस के लिये बड़ी ही विकट स्थति है। क्योकि इस विधानसभा क्षेत्र में ब.स.पा. का बड़ी संख्या में फिक्स वोट बैंक है। जो किसी भी कीमत पर कुछ जाति विशेष को वोट करने के पक्ष में नहीं रहता। और इस मर्तवा इस विधानसभा क्षेत्र से ब.स.पा. का शसक्त उम्मीदवार है। जहां कांग्रेस से यादव समाज से दो तो पिछड़ा वर्ग से। एक प्रत्याशी प्रवल दावेदार है। जो फिलहॉल विगत 10 वर्षो से कोलारस नगर पंचायत चला रहे है। रहा सवाल भाजपा का सो बड़े कम अन्तर से विगत विधानसभा जीतने वाले जैन बन्धु है। वहीं पिछली बार टिकिट हासिल न करे पाने वाले बिन्दल और रिझारी है। वैसे यहां से पहले विधायक रह चुके राष्ट्रीय जी भी प्रत्याशी हो सकते है मगर देखा जाये तो अनु जाति,आदिवासी,यादव,धाकड़,रघुवंशी,वैश्य,ब्राहम्ण बाहुल्य विधानसभा अपने अपने समीकरण है लोग चाहते है। इस चुनाव में दोनों ही दल सामाजिक परिस्थितियों के मद्देनजर टिकट वितरण करें।

पोहरी विधान सभा में भी इस मर्तवा उठा पटक कुछ कम नहीं क्योकि यह विधानसभा क्षेत्र भी धाकड़,आदिवासी,ब्राहम्ण,यादव,रावत बाहुल्य है। और दोनों दल कांग्रेस भाजपा से दावेदारों की फेरिस्त भी लम्बी हालाकि फिलहॉल यहां से विधायक भाजपा से है और विगत दस वर्षो से कांग्रेस विधायिकी से बाहर है। ऐसे में भाजपा के ऑपन और क्लॉज दावेदारों की संख्या भले ही कम हो मगर कांग्रेस की फेरिस्त कुछ लम्बी है। जिसमें धाकड़ समाज से एक पूर्व विधायक है तो ब्राहम्ण समाज से एक पूर्व संरपच  जो महा विद्यालय अध्यक्ष भी रह चुके वहीं मण्डी की अध्यक्षी कर चुके पूर्व कांग्रेस Žलॉक अध्यक्ष भी ताल ठोकने में जुटे है।

आरक्षित सीट करैरा में मामला कुछ सीमित है जहां वर्तमान विधायक की ढोंलती नैया को देख कईयों के मुंह में लड्डू फूट रहे है। हालाकि वर्तमान विधायक भाजपा से और राष्ट्रीय जी और जनपद जी की दावेदारी प्रवल, रहा सवाल कांग्रेस  का तो पेाहरी वाली चौधरी साहब और करारे जी के बीच फिलहॉल रस्सा कसी चल रही है। पूर्व में विधायकी का मजा ले चुकी ब.स.पा. भी इस मर्तवा मैदान नहीं छोड़ेगी।

मगर सबसे विकट मामला शिवपुरी विधानसभा का है जहां ब्राहम्ण,वैश्य,लोधी,राठौर,गुर्जर,आदिवासियों  अनुजाति की खांसी संख्या है। जहां भाजपा कांग्रेस में दावेदारों की संख्या भी लम्बी है। हालाकि वर्तमान में यहां से भाजपा विधायक है। और विगत उपचुनाव को छोड़ दे तो 15-20 वर्षो से इस सीट पर भाजपा काबिज है। मगर अन्य विधान सभा क्षेत्रों से यह विधान सभा क्षेत्र दावदेारी में इस मर्तवा इसलिये अलग है कि यहां दावेदारी समाज विशेष पर आधारित है न कि व्यक्ति विशेष पर जहां ब्राहम्ण समाज से स्त्री,पुरुष दोनो तरफ से दावेदारी है। वहीं वैश्य समाज में फिलहॉल कोई दावेदार नहीं। मगर सबसे अलग गुर्जर और अल्पसंख्यक समाज में जबरदस्त आक्रोश है। जिन्हें किसी भी दल ने नेतृत्व का आज तक कोई मौका नहीं दिया। इन समाज से जुड़े लेाागें में चर्चा है इस चुनाव में भी हमारे समाज को किसी भी दल ने दर किनार करने का प्रयास किया तो परिणाम ही कुछ और होगें। वहीं ब्राहम्ण समाज से जुड़े लोगों का कहना है। कि इस मर्तवा किसी भी स्थति में आमांत्रित और अंहकारी प्रत्याशी स्वीकार नहीं होगा। बहरहॉल फिलहॉल तो उम्मीद ही की जा सकती है क्योकि चुनाव अभी दूर है।

लोकायुक्त ने रंगे हाथों फाँसा पटवारी लोकायुक्त की कार्यवाही घूंस को घूंसा


दतिया। सुशासन के इस दौर में जब सुशासन अभियान शासन द्वारा पूरे प्रदेश में संचालित है और दतिया की बात करें तो नवागत कलेक्टर एवं आयुक्त की नाकारा कर्मचारियों एवं अधिकारियों को नकैल कसने की कार्यपद्धति के दौर में लोकायुक्त टीम ने दतिया हल्का नं. ५५ पर पदस्थ पटवारी अशोक मिश्रा को रिश्वत लेते रंगे हाथों उसके निवास पर उस समय धर दबोचा जब वह बलवीर यादव पुत्र रज्जन यादव राजगढ़ चौराहा निवासी से  उनाव रोड से पुस्तैनी जमींन के बटवारे का अमल कराने के एवज में माँगी गई रिश्वत की पूर्ती कर रहा था।

आम जनता से काम कराने के नाम पर जमींन सहित खसरा खतौनी आदि के नाम पर लगातार मोटी रकम रिश्वत के तौर पर ऐंठने वाले पटवारी को आज सबक मिल ही गया जब वह एक आवेदक से ५ हजार रूपये माँग के सौदे को २५०० रूपये में तय करके उक्त राशि को बसूल रहा था तभी पूर्व सुनियोजित घँूस को घँूसा उस वक्त लगा जब लोकायुक्त की टीम द्वारा उसे रंगे हाथों २५०० रूपये की रिश्वत लेते पकड़ा गया। टीम का नेतृत्व राजेश शर्मा डीएसपी लोकायुक्त ग्वालियर ने किया। लोकायुक्त दल की तीन घंटे तक चली कार्यवाही में अहम् दस्तावेज भी हाथ लगे हैं जिनके आधार पर आगे की कार्यवाही होगी।

४ अप्रेल को बलवीर यादव ने आवेदन के जरिये लोकायुक्त को किया था ग्वालियर पहँुचकर शिकायत की थी। उक्त शिकायत के निदान हेतु १५ सदस्यीय दल ने कार्यवाही को अंजाम दिया।

सुशासन के इस दौर में जब सुशासन अभियान पूरे प्रदेश में संचालित है और दतिया की बात करें तो नवागत कलेक्टर एवं आयुक्त की कार्यपद्धति के दौर में पटवारी द्वारा आवेदक के पहँुचने पर बेधड़क कहता है कि कहता पैसेंजर से चलोगे या शताब्दी से यानि अपना कार्य घीमी गति से कराना है अथवा तीव्र गति से। कैसे मानलें कि सुशासन है प्रदेश में जबकि छोटे छोटे काम कराने के लिए भी देने पड़ रहे हैं हजारों में रिश्वत के तौर पर।


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