सुरक्षित राष्ट्र में,असुरक्षित लेाग, शर्म आती है,हमारे शौर्य पर

जिस तरह के घटनाक्रम  विगत वर्षो से देश में घट रहे है,और निर्दोष लेाग बम धमाकों और विस्फोट गोलियों के शिकार हो रहे है। जिसके चलते न तो नेता न ही सुरक्षा बल नहीं नगारिक सुरक्षित है।  चितड़े उड़ते लोगों के शरीर छल्ली होती जिन्दगियां आखिर किससे यह कहें कि क्या कुसूर है।
हमारा जो हमारे जीवन के साथ इस तरह का जल्लाद पूर्ण व्यवहार हमारे अपनो ही द्वारा ही किया जा रहा है। ऐसा ही कुछ जगदलपुर के सुकमा,से लौटते वक्त घाटी पर हुआ। यह हादसा भारतीय इतिहास में कोई पहला नहीं। इससे पूर्व भी इसी देश में 78 जवान एक साथ शहीद हो चुके है। विगत 30 वर्षो से चली आ रही यह कहानियां यू ही सुर्खिया बनती रही है।

मगर वर्तमान में घटे घटनाक्रम पर पक्ष विपक्ष ही नहीं प्रदेश व केन्द्र सरकार के लेागों ने इसे लेाकतंत्र पर हमला करार दिया है। जिसकी समीक्षा जरुरी है। आखिर कई वर्ष बाद नेताओं को लोकतंत्र की याद कैसे आई। जबकि लेाकतंत्र तो 1977 से छलली हो रहा है। 

रुप कई हों सकते है,मगर परिणाम एक चाहे वह काश्मीर,पंजाब का आतंकवाद रहा हो या फिर नकस्लबाद निर्दोशों की जघन्य हत्यायें और नतीजा सुफर फिलहॉल काश्मीर शान्त है। और पंजाब देश की मुख्य धारा में अब ऐसे में ले देकर देश का वह बड़ा भू-भाग है। जहां माओवादियों या नकस्सलियों ने पैर पसार रखे है। घने जंगलों से पटे कई प्रदेशों के नकसलवादियों की तूती,बोलती है। पश्चिम बंागल से लेकर उžार प्रदेश,बिहार,झारखंण्ड, उड़ीसा,महाराष्ट्र,आन्द्रप्रदेश,म.प्र.,छžाीसगढ़ इत्यादि रा'यों के कई जिलों में इनका साम्रा'य पसरा पढ़ा है। बजाए यह साम्रा'य घटने के दिन व दिन बढ़ता ही जा रहा है। 

और हताश सरकारें और शासक खूनी खेल को सरेयाम देख रहे है। नेता तो नकस्लियों के हाथों आज शिकार हुये। देश का आम गरीब तो वर्षो से इनकी क्रूरता के शिकार हो रहे  है। सुरक्षा बल के जवान तो वर्षो से शहीद हो रहे।

मगर लगता नहीं कि इस देश के शासक सžाा को छोड़ इस जघन्य हत्या कांण्ड से कोई सबक लेगें। यह सरकारों और शासकों के स्वार्थ ढुलमुल रवैयों का परिणाम है। जो समस्या यहां तक आन पहुंची कि छžाीसगढ़ के आधे से अधिक कद्दावर नेताओं को घेर कर बड़ी ही बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया गया।

बेहतर होता सरकारें समय रहते ऐसी समस्याओं को गम्भीरता से ले, उनके समाधान में, सžाा का स्वार्थ छोड़, ईमानदारी से जुटती तो इस तरह के दिन देश को न तो तब और न अब देखने पढ़ते।

बात साफ है जो भी बात हो तो टेबिल पर हों या फिर मैदान में गफलत बिल्कुल भी नहीं होना चाहिए। मगर जिस तरह से देश के नेता,राजनैतिक दलों में स्वार्थ और सžाा का नशा सर चढ़कर बोल रहा है। उससे लगता नहीं इतनी जल्द लेागों को मौतों के नंगे नांच और जघन्य कांण्डों से निजात मिलने वाली है। क्योकि इतने बड़े जघन्य हत्या कांण्ड के बाद सरकारों और राजनैतिक दलों के जों सुर है। उन्हें देख नहीं लगता कि वे गम्भीर है आयोग बन गया,जांच शुरु हो चुकी और नकसलबादी अपना काम कर जा चुके है।

अब देखना होगा कि इस गम्भीर समस्या का हल पहले सामने आता है। या फिर उससे पहले कोई जघन्य हत्या कांण्ड फिर से देश के समाने आता है,कहना मुश्किल।

केन्द्रीय मंत्री सिंधिया की पहल पर होगा पर्यटन क्षेत्रों का विकास- तिवारी

दतिया २९ मई। दतिया जिले के पर्यटक उद्योग के रूप में विकसित कराने एवं पर्यटक सर्किट बनाये जाने के लिये केन्द्रीय ऊर्जा राज्य मंत्री श्रीमंत ज्योतिरादित्य सिंधिया द्वारा भारत सरकार के पर्यटन मंत्री क्रमशः श्रीमती अम्बिका सोनी, कुं. शैलजा सिंह एवं सुबोधकांत सहाय को पृथक-पृथक पत्रों के माध्यम से दतिया जिले को पूर्व मेें ४.७५ करोड़ एवं पुनः ५ करोड़ की स्वीकृति दिलाये जाने पर कांग्रेस के पदाधिकारियों ने हर्ष व्यक्त करते हुए श्री सिंधिया सहित पूर्व केद्रीय पर्यटन मंत्रियों का आभार ज्ञापित किया है।

जिला कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष सुनील तिवारी के आग्रह पर केन्द्रीय मंत्री श्रीमंत ज्योतिरादित्य सिंधिया द्वारा अपने पत्र क्रमांक २९६९ दिनांक व जुलाई २००८ के द्वारा तत्कालीन पर्यटन मंत्री श्रीमती अम्बिका सोनी एवं अपने पत्र क्रमांक ६६६३ दिनांक ३१ जुलाई २००९ के द्वारा कु. शैलजा सिंह एवं पुनः अपने पत्र क्रमांक १२६३ १० जनवरी २०११ के द्वारा दतिया जिले के ऐतिहासिक स्थल रतनगढ़ माता मंदिर पर विशेष पैकेज के अंतर्गत विकास सुनिश्चित कराने एवं दतिया जिले के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं भौगोलिक महत्व को रेखांकित करते हुए दतिया जिले को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा सकता है। इसलिए दतिया में विश्व प्रसिद्ध मॉं पीताम्बरा, शक्ति पीठ, जैन धर्म का प्रसिद्ध तीर्थ स्थल सोनागिर नारद मुनि एवं सनक सनंदन सनातन एवं सतकुमार तपस्थली सेंवढ़ा सनकुआं धाम एवं दतिया जिले के दरयावपुर में अविभाजित भारत का केन्द्र बिन्दु है तथा गुजर्रा में सम्राट अशोक का शिलालेख के अलावा उनाव में पुरातन सूर्य मंदिर है, जो दतिया जिले को पर्यटक स्थल के रूप में विकसित किये जाने का पर्याप्त अवसर है। इस ओर सिंधिया का जिला कांग्रेस के उपाध्यक्ष सुनील तिवारी ने ध्यान आकर्षित कराया था, श्री तिवारी के आग्रह पर सिंधिया ने बार-बार भारत सरकार के पर्यटन मंत्री को दतिया के पर्यटन क्षेत्र विकास हेतु राशि उपलब्ध कराने के अनुरोध पर पूर्व में सीतासागर सहित अन्य तालाबों के सौंदर्यीकरण के लिये ४.७५ करोड़ तथा पुनः रतनगढ़ माता मंदिर एवं उनाव सूर्य मंदिर सहित सनकुआं क्षेत्र विकास के लिये ५ करोड़ की राशि स्वीकृत कराई गई है।

सिंधिया द्वारा जिले के विकास के लिये कराई गई स्वीकृत राशि के लिये जिला कांग्रेस के उपाध्यक्ष सुनील तिवारी, अजमेर सिंह गुर्जर, हरवेन्द्र यादव, देव सिंह परिहार, अर्जुन सिंह परिहार, सरनाम सिंह राजपूत, हरिओम त्रिपाठी, अन्नू पठान, गिन्नी राजा, महामंत्री श्रीलाल कुशवाह, परशुराम पटेल, अशोक दांगी, नारायण प्रजापति, बल्ली सेन, अरूण शर्मा, प्रहलाद अग्रवाल, मुकेश शर्मा, छोटे महते, संजीव जाटव, धर्मेन्द्र जाटव, प्रद्युम्न पाराशर, नरेन्द्र गुर्जर, आशीष तिवारी, विष्णु गुर्जर, हवीव खान, कुंवरराज गुर्जर, स्वामी शरण कुशवाह, पुष्पेन्द्र यादव, मानवेन्द्र सिंह तोमर, रमाकांत चौधरी, रामकुमार चौधरी, रिंकू शर्मा, राजू लठैत, कोक सिंह मयंक, डा. आशाराम धाकड़, सुल्तान खान सहित अनेक ईंकाजनों ने श्रीमंत सिंधिया के एवं तत्कालीन पर्यटन मंत्री के प्रति पर्यटन मंत्रालय भारत सरकार द्वारा राशि स्वीकृत कराने पर आभार ज्ञापित किया है।

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