हड़ताल आशा कार्यकर्ता, सविंदा कर्मियों का लोकतांत्रिक अधिकार: प्रवीरकृष्ण

वीरेन्द्र शर्मा। शिवपुरी। ममता अभियान की समीक्षा करने शिवपुरी आए लोक स्वास्थ  एवं परिवार कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव प्रवीरकृष्ण ने टूरिस्ट विलेज होटल पर आयोजित पत्रकार वार्ता में कहा कि हड़ताल करना उनका लेाकतांत्रिक अधिकार है।

और मैं कहना चाहुगा कि मेहनत के बाद मैंने केन्द्र सरकार से 30 प्रतिशत वेतन बढ़बाया है मेरा उन आशा कार्यकर्ताओं और सविंदा कर्मियों से स्पष्ट संदेश है, कि वह ममता अभियान में मन लगाकर कार्य करें। नीति गत निर्णय लेना सरकार का काम है,हमारा काम सरकार के आदेशों का पालन करना है। उन्होंने कहा कि मैं शिवपुरी जिला चिकित्सालय एवं शिवपुरी के परीक्षा उपस्वास्थ केन्द्र की व्यवस्थाओं से संन्तुष्ट हूं।

हमारा प्रयास होगा कि शिवपुरी के चिकित्सालय जैसे आदर्श चिकित्सालय सारे म.प्र में बनेंऔर प्रदेश भर के कर्मी शिवपुरी आकर स्वास्थ सेवाओं का प्रशिक्षण लें। उन्होने कहा कि स्टाफ से जूझते चिकित्सालयों में जल्द ही 2 हजार चिकित्सक और 4 हजार नर्सो की तैनाती की जा जायेगी। मातृ मृत्यु रोकने गम्भीरता से प्रयास हों ऐसी हमारी कोशिस होगी अभी वर्तमान में प्रदेश भर में 70 हजार स्वास्थ कार्यकर्žाा एन.ए.एम. तैनात है। जबकि समुचे प्रदेश में 23 हजार गांवों है। 

उन्होंने भ्रष्टाचार पर शासन की मंशा स्पष्ट करते हुए कहा कि अभी हाल ही मैं कुछ माह पूर्व संचालक स्तर के 3 अधिकारियों को वर्खास्त किया गया है। भ्रष्टाचार के मामले में नीति स्पष्ट है जो भी इसमें दोशी पाया जायेगा उसे वख्शा नहीं जायेंगा। पत्रकारों के अव्यवस्था और असंवैदनशीलता के सवालों पर वह अपने महकमे के पक्ष में खड़े नजर आये तथा कहते रहे अगर ऐसे कोई मामले है,तो सम्बधित जिला स्वास्थ्य समिति में शिकायत कर सकते है। हमारा उद़देश्य ममता अभियान के तहत मातृ मृत्यु दर कम करना है। जिसके लिए हमें गम्भीर प्रयास करना चाहिए। मुझे उम्मीद है,कि मुझे निराश नहीं होना पड़ेगा।

प्रमुख सचिव ने ली स्वास्थ्य अधिकारियों की बैठक

 मध्यप्रदेश शासन के लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव श्री प्रवीरकृष्ण ने कहा कि प्रदेश में लागू ममता अभियान प्रदेश में मातृ मृत्युदर और शिशु मृत्यु दर को ना केवल राष्ट्रीय मातृ और शिशु मृत्युदर के बराबर लाने का अभियान है। बल्कि हमारा प्रयास है कि इस अभियान के माध्यम से हम प्रदेश की मातृ मृत्यु दर ३१० से घटाकर २०० या १७५ तक कर दें।

टूरिस्ट बिलेज के सभाकक्ष में आयोजित स्वास्थ्य अधिकारियों की बैठक में संचालक लोक स्वास्थ्य विभाग डॉ.पी.एन.एस.चौहान, कलेक्टर श्री आर.के.जैन, संयुक्त संचालक स्वास्थ्य डॉ.निधि व्यास, यूनिसेफ प्रतिनिधि डॉ.गगन गुप्ता, विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रतिनिधि डॉ.ए.के.गुरा, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.एल.एस.उचारिया, सिविल सर्जन डॉ.गोविन्द्र सिंह, जिला मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.संजय ऋषिश्वर, जिला कार्यक्रम प्रबंधक डॉ.अल्का त्रिवेदी, वीएमओ पोहरी श्री चंद्रशेखर गुप्ता, यूनिसेफ कॉडिनेटर श्री ज्ञानेन्द्र दुबे के आलावा, अनेक शासकीय चिकित्सक उपस्थित थे।

प्रमुख सचिव स्वास्थ्य ने कहा कि मातृ मृत्यु दर को राष्ट्रीय मानको से भी कम लाने के लिए प्रदेश ने जो रणनीति बनाई है। उसे ममता अभियान का नाम दिया गया है। मातृ मृत्यु दर के प्रमुख कारण है, समय पूर्व समुचित जांच का अभाव, रक्त की कमी और रक्तचाप के बारे में पूरी जांच ना होना असुरक्षित गर्भपात, संक्रमण, अवरूद्ध प्रसव के अलावा समय पर आवागमन के संसाधन उपलब्ध ना हो पाना होते है। विभाग इन सभी कठिनाईयों को दूर करने का प्रयास कर रहा है। इस वित्तीय वर्ष में इस अभियान के लिए ६२ करोड़ से अधिक राशि का वंटन रखा गया है और वेतन भत्ते इत्यादि के लिए ६० करोड़ रूपयें का वंटन रखा है। डॉक्टरों की कमी को शीघ्र अतिशीघ्र दूर करने के लिए प्रदेश में २ हजार से अधिक डॉक्टरों की भर्ती की जा रही है एवं ४ हजार से अधिक नर्सो की भर्ती की जा रही है। इस तरह मध्यप्रदेश के सभी ५० जिलों में डॉक्टर तथा नर्सों की कमी को पूरा करने का प्रयास किया जावेगा।

प्रमुख सचिव ने जिला चिकित्सालय शिवपुरी को एक आदर्श और श्रेष्ठ चिकित्सालय के रूप में स्थापित करने के लिए बल देते हुए कहा कि शिवपुरी जिला चिकित्सालय में प्रतिदिन लगभग २ हजार मरीजों का उपचार किया जाता है। यहां १४७ दवाओं की तुलना में लगभग २०० दवाऐं उपलब्ध है। जो जरूरतमंद मरीजों को बांटी जा रही है व ४८ प्रकार की जांचे की जा रही है। उन्होंने कहा कि शिवपुरी जिला चिकित्सालय प्रशिक्षण हेतु विकसित किया जावेगा।

प्रमुख सचिव स्वास्थ्य ने छर्च तथा झिरी के उपस्वास्थ्य केन्द्रों में स्थापित प्रसव केन्द्रों की भी प्रशंसा की और वहां की एएनएम सुश्री नाजिया बानों, श्रीमती मिश्रा को ५-५ हजार रूपयें का पुरस्कार यूनिसेफ से दिलाये जाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि परिवार कल्याण कार्यक्रम को भी माता के स्वास्थ्य से जोड़कर देखा जाना चाहिए और हमें स्वास्थ्य योजनाओं को ग्रामोन्मुखी बनाना है। प्रदेश में ११२० डिलेवरी पोइंट है। जिन्हें छर्च व झिरी ग्राम की तरह आदर्श बनाना है। आशा कार्यकर्ताओं के २३ कार्य है। पूरे राष्ट्र में उन्हें मानदेय के आधार पर नियुक्त किया जाता है। म.प्र. में भी वे मानदेय के आधार पर काम कर रही है। अस्थाई व दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों के वेतन में २८ प्रतिशत की बढ़ोत्तरी की गई है। उन्होंने अस्पतालों में व्यवस्था सुधार के साथ ही साथ व्यवहार में भी सुधार लाने पर बल दिया। कमियों का मुल्यांकन कर उन्हें दूर किया जा रहा है। प्रमुख सचिव ने टी.वी. के मरीजों के लिए कहा कि वे अपनी बीमारी को छुपाऐं नहीं डॉट पद्धति से टी.वी. का इलाज संभव है तथा ६ माह में यह बीमारी पूरी तरह ठीक हो जाती है।

बैठक के पूर्व प्रमुख सचिव श्री प्रवीरकृष्ण ने जिला चिकित्सालय शिवपुरी के साथ ही साथ जिले के अन्य ग्रामीण उपस्वास्थ्य केन्द्रों का निरीक्षण किया और अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे भी समय-समय पर भ्रमण करके उपस्वास्थ्य केन्द्रों के द्वारा ग्रामीणों को दी जा रही स्वास्थ्य सेवाओं का परीक्षण करें।

आरोपियों द्वारा दुष्कर्म पीड़िता व परिजनों को जान से मारने की धमकीः

रामजीराय शरण/दतिया। एक ओर जहाँ कानून बनाने और उनमें संशोधन कर प्रभावी बनाने के प्रयास जोरों पर हैं वहीं क्रियान्वयन करने वालों की मनमर्जी से नहीं मिल रहा पीड़ितों को न्याय और न ही मिल पा रही है आरेपियों को सजा। ऐसा ही मामला पुलिस थाना पण्डोखर अन्तर्गत ग्राम बड़ैरा सोपान में हुए दुष्कर्म के आरोपियों मोनू व रोशन पुलिस की मिली भगत से खुलेआम घूम रहे हैं। इतना ही नहीं उक्त आरोपियों द्वारा दुष्कर्म पीड़िता एवं उसके परिजनों को मोबाइल व अन्य प्रकार से जान से मारने की धमकी देकर राजीनामा करने का दबाब बना रहे हैं। राजीनामा न करने की दशा में आरोपी पीड़िता व परिजनों को जान से मारने के लिए प्रयासरत हैं।

उक्त जानकारी पीड़िता के पिता कमलेश राजपूत ने पुलिस महानिरीक्षक ग्वालियर एवं पुलिस अघीक्षक को आवेदन प्रदान कर कही। प्रदत्त आवेदन में आवेदक ने आरोपियों की गिरफतारी करने एवं पूरे परिवार को सुरक्षा प्रदान करने माँग की है। गौरतलब है कि प्रार्थी द्वारा आरोपियों को ३० अप्रेल को घटना दिनांक को कटटे सहित पुलिस के हबाले किया था। बाबजूद इसके पुलिस ने मोनू को छोड़ दिया जो कि क्षेत्र में आतंक मचाये हुए है और पण्डोखर पुलिस हाथ पै हाथ धरे बैठी किसी गंभीर हादसे के इंतजार में बैठी है। आखिर कब तक नहीं मिलेगा हमारे समाज में पीड़ितों को न्याय और दोषियों को सजा और कब तक चलेगी मनमानी।

पशु चारे का जिले की सीमा से बाहर निर्यात एवं परिवहन ३१ जुलाई तक प्रतिबंधित

दतिया। मध्यप्रदेश चारा निर्यात नियंत्रण आदेश २००० में निहित प्रावधानों के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए प्रभारी कलेक्टर सुरेश कुमार शर्मा द्वारा पशुओं के आहार के रूप में उपयोग आने वाले समस्त प्रकार के पशु चारे घास, भूसा, कड़वी, ज्वार के डन्टल, पैरा धान के डन्टल तथा पशुओं द्वारा खाये जाने वाले अन्य समस्त किस्म के चारे पर दतिया जिले की सीमा से बाहर निर्यात को मध्यप्रदेश चारा निर्यात नियंत्रण आदेश २००० में निहित प्रावधानों के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए तत्काल प्रभाव से जिले की सीमा से बाहर निर्यात एवं परिवहन पर ३१ जुलाई २०१३ तक प्रतिबंधित किया जाता हैं।
कोई भी कृषक, व्यापारी या व्यक्ति किसी भी प्रकार के पशु चारे का किसी भी प्रकार के वाहन नाव, मोटर, रेल, किसी भी यान अथवा पैदल जिले की सीमा से बाहर बिना कलेक्टर के अनुज्ञा पत्र के निर्यात एवं परिवहन नहीं करेगा। सरकारी खाते पर अथवा सेना के साखपत्रों के अधीन और उनकेे अनुसार किये जा रहे निर्यात अथवा परिवहन पर यह आदेश लागू नहीं होगा।
यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होगा तथा ३१ जुलाई २०१३ तक प्रभावित रहेगा। संबंधित इस आदेश का कड़ाई से पालन करना सुनिश्चित करें। पालन न करने पर अधिनियम के अन्तर्गत कार्यवाही की जावेगी।
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