सिंधिया के संघर्ष को अंजाम तक पहुंचाने, सामने आये बड़े बड़े छत्रप

वीरेन्द्र शर्मा/ राहुल की सीख को प्रदेश भर में सर अन्जाम तक पहुंचाने निकले सिंधिया युवाओं के जोश को एक एक सूत्र में पिरोते हुये। बुन्देल खण्ड और बघेल खण्ड में भाजपा पर जमकर बरसे। उन्होंने स्पष्ट किया कि सत्ता शौर्य और पैसा पाने का नहीं,सेवा का जरिया होना चाहिए।

राजीव गांधी विधुतीकरण येाजना के सहारे भूमि पूजन,लेाकर्पण,तथा सरपंचों सम्मेलनों में छतरपुर के विजावर,टीकमगढ़,सतना,के मेहर में भाजपा को आड़े हाथों लेते कहा कि प्रदेश की भाजपा सरकार केन्द्र सरकार के पैसे का दुरपयोग कर रही,भ्रष्टाचार कानून व्यवस्था कुपोषण की स्थति ठीक नहीं हत्या बलात्कार चरम पर है।

उन्होंने कहा कि हम प्रदेश में राजीव गांधी ग्रामीण और शहरी विधुतीकरण योजनाओं के माध्ययम से नई विधुत लाइने नये ट्रान्स फारमर लगवा रहे है। जिससे सभी को सुगमता से बिजली उपलŽध हो सके मगर प्रदेश की भाजपा सरकार है जो प्रदेश के लेागों को भारी भरकम बिलों का करन्ट लगा रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा के नेता पहले पतले होते थे। लेकिन मैं बचन देता हुं,मैं पतला था पतला हूं। और भविष्य में भी पतला रहूंगा। उन्होंने साफ किया कि वह भगवान के अलावा दो भगवानों को भी मानते है। एक अन्नदाता दूसरे मतदाता।

बहरहॉल बुन्देल खण्ड में जहां सत्यव्रत चतुर्वेदी ने भले ही भावुक  हो स्पष्ट किया कि जनता सिंधिया को मुख्यमंत्री के रुप में देखना चाहती वे यहीं नहीं रुके उन्होंने अपनी भविष्य की राजनीति को साफ करते हुये कहा कि वे चाहते है कि बुन्देलखण्ड की बागडोर किसी मजबूत हाथों में देंकर जाये। और वह मजबूत हाथ 'योतिरादित्य  सिंधिया के ही है।

इसी तरह वघेल खण्ड के मुहाने मैहर में रीवा के बूढ़े शेर के नाम से राजनैतिक गलियारों में चर्चित पूर्व विधान सभा अध्यक्ष श्री निवास तिवारी ने भी कहा कि उन्होंने भी 'योतिरादित्य सिंधिया के बारे में आलाकमान को अवगत कराया था। मगर हमारे मुंह सिले है

फिलहॉल जो भी हो जिस तरह का जोश खरोस ग्वालियर चम्बल से लेकर समुचे मालवा पूर्वी,पश्चिमी निमाण,भोपाल,बुन्देल खण्ड,वघेल खण्ड, में आम कांग्रेसी कार्यकर्žाा,युवा,बुजुर्ग नेताओं में देखा जा रहा है। उससे आम जन के बीच भी यह संदेश स्पष्ट होने लगा है। कि भाजपा की राह इतनी आसान नहीं जैसा कि वह मान कर चल रही है। 

अगर प्रदेश के छत्रप कांग्रेस नेंताओं और युवा टीम का जोश देख आलाकमान ने कहीं सिंधिया को म.प्र. की कमान सौंप दी तो निश्चित ही मुकाबला बराबर का होगा और वाकऑव्हर जैसी स्थति नहीं रहेगी जैसी कि आज है मगर जिस तरह की एक जुटता नेता कार्यकर्ताओं पहली मर्तवा बुन्देल,बघेलखण्ड में दिखी है। कांग्रेस के लिए म.प्र. में शुभ संकेत हो सकती है।

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