सुशासन की पहल, सन्जू अन्दर, पप्पू बाहर...

व्ही.एस.भुल्ले@तीरंदाज/ भैया-भीषण गर्मी के दौरान ये क्या हो रहा है,कर्नाटक में नई सरकार के शपथ ग्रहण से विधायकों का वाकआउट तो संजू बाबा का सरेन्डर के बाद अन्दर तो म्हारे बाहु बली बिहार के पूर्व सांसद पप्पू यादव,माक.पा विधायक अजीत सरकार की हत्या के आरोप से बरी हो बाहर हो आ गया है। वहीं संजू भैया को कसाब सैल में रखने के बावजूद परिवार तक से नहीं मिलने दिया जा रहा है। ये कैसा अन्याय

भैये-न्याय अन्याय की बात तो तू फिलहॉल हमारे माननीयों पर छोड़,दिल्ली में मनमोहन जी की सरकार सोनिया जी संरक्षण में कैसी चल रही है। वहीं 15 जून से 24 घन्टे विधुत प्रवाह पूरे म.प्र. में करने वाले भक्त भाई की जहां जहां अटल 'योति प्रजबलित हो चुकी है। कैसी जल रही है,सुना हैै,कहीं भक्त भाई की 'योति,जल रही है,तो कहीं बुझ रही है। भाई लेागो की दलील है, कि फिलहॉल लाइनो में फाल्ट कम, बारिश पूर्व में मैन्टीनेन्स चल रहा है। अब ऐसे में भीषण गर्मी के दौरान कोई कलफ, तो कोई म'छरों के दुआं धार हमलों के चलते रतजगा कर रहा है। फिलहॉल तो राजा,महाराजा केे पक्ष में कूद पढ़े है। और अदने से विधायक को महाराजा से पंगा लेने के जुर्म में सार्वजनिक रुप से खरी खोटी सुना चुके है।

भैया- मने थारे से म्हारे पप्पू यादव के बाहर आने और सन्जू बाबा के अन्दर जाने सहित कर्नाटक के मंत्री न बन सके विधायकों के वॉक आउट के बारे में पूछा था। न कि म.प्र. के भक्त की अटल 'योति और राजा,महाराजा की जोड़ी के बारे में पूछा था। तू है कि कहीं मन मोहन तो कभी सेानिया जी के सरंक्षण पर बोलता है। आप पार्टी के अरविन्द ने आखिर सिŽबल और वॉडा के बारे मे क्या बोला है और बहिन शीला को  छोड़ अचानक अरविन्द ने सिŽबल के खिलाफ क्यों मोर्चा खोला है। ये तो बता।

भैये-तने तो बावला शै बड़े लेाग, बड़ी बाते सो हर एक आदम कद को कुछ न कुछ मुगालता तो होता ही है। सो चाहे सिŽबल चुप रहे या फिर अरविन्द बोले थारे को क्या?

भैया-मुगालता सुन मने भी म.प्र. के भक्त भाई की अटल 'योति जलाते वक्त की बात याद आयी है। भक्त भाई भी अब भगवानों के बीच यह कहने से नहीं चूक रहा चिन्ता मत करो अपनी ही सरकार आनी है। जो कार्य शेष रह जायेगें उन्हें अगली सरकार में करालेगें। और इस मर्तवा भी सरकार हम ही बना लेगें। बोलो हाँ। तो भाया यह भैया का मुगालता है। या भगवान पर भरोसा ये तो वहीं जाने।

भैये-अरे बावले सपने देखना कोई बुरी बात नहीं, देखोगे नहीं तो सच कैसे होगें। भले ही लेाग सपनों का सौदागर,घोषणा वीर ही भाई को क्यों न कहें। मगर अपनी कहने में संकोज कैसा।

सो भैया चाहे म.प्र. में राजा,महाराजा दहाड़े या फिर भूरिया,रमेश के साथ परिवर्तन यात्रा निकाले मने न लागे कि कोई परिवर्तन होने वाला है। यह सब कुछ मंच से भक्त नहीं नीचे बैठे स्वयं भक्त के भगवान बोल रहे है।

भैया-मैं समझ लिया आखिर मैं कै जानू थारे जैसे चिन्दी पन्ने वालो की गूड़ बाते,अब मुखिया प्रदेश के शिवराज बने या फिर राजा,महाराजा म्हारे को तो सुशासन की धमक से शिवपुरी जिले में पहले ही राउन्ड में फूटी 11 मशकों की चिन्ता सता रही है। जिन्हें जिले के सूवा सदर ने हॉल ही में सुशासन में लापरवाही वर्तने पर संट किया है। और म.प्र. के जिला शिवपुरी के बैराड़ क्षेत्र में एचवाड़ा गांव पहुंच एक गरीब को सुशासन का सुख दिया है। मगर मारे मगज में अभी तक एक बात नहीं उतरी की 6-7 महिने तक उस गरीब को हुक्का भरवाने वाले गिरदावर पटवारी का कुछ नहीं हुआ है।

भैये-तू ठहरा गांव का किसान तू कै जाने प्रायरटी या प्राथमिकता क्या होती है। जैसे दलो को पहली प्राथमिकता सžाा की होती है। वैसे ही शासन को सुशासन की, ऐसे में सूवा सदर की पहल पर उस गरीब का मालिकाना हक रिकार्ड में दर्ज हो गया। तो हर्ज क्या? और काहें की  कार्यवाही गिरदावर पटवारी पर, आखिर कोई तो है जो दीन-हीनों की सुन रहा है।

भैया-जैसे म्हारे मनमोहन,जो सोनिया जी की,जैसे भगवान जो म.प्र. के भक्त शिवराज की और सन्जू,पप्पू यादव की सुन रहे है कर्नाटक में  सिद्धधारमैया तो म.प्र. में राजा, महाराजा कि सुन रहे है। अब ऐसे में संभाग में माननीय खरे और जिले में महोदय जैन साहब दीन-हीनों की सुन रहे तो हर्ज ही क्या। मैं तो वोल्यू भाया इस भीषण गर्मी में सुशासन का डन्डा दीन-हीनों के दुख हरने ऐसे ही चलता रहा तो म्हारे श्रीमानों की तो जान पर बन आयेगी गुडफील में चल रहे,बैचारे अन्डी ब'चों की तो जान ही निकल जायेगी।

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