प्रेस से मुख्यमंत्री का, वाक आउट जारी

शिवपुरी। कई बार शिवपुरी आने का कार्यक्रम बना कैन्सिल कर चुके प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान बमुश्किल 10 रोज पूर्व पिछोर आने के बाद 15 मई को अटल ज्योति की शुरुआत करने। अपने निर्धारित कार्यक्रम से ढाई घन्टे की देरी से शिवपुरी स्थित तात्याटोपे स्टेडियम अटल ज्योति की शुरुआत करने पहुंचे जहां उन्होंने अपने ऊर्जा मंत्री राजेन्द्र शुक्ल ग्वालियर सांसद श्रीमंत यशोधरा राजे सिंधिया चारों विधायक जिला पंचायत अध्यक्ष जितेन्द्र जैन, नगर पालिका अध्यक्ष रिशिका अष्ठाना और मंच भरे भाजपा नेताओं के साथ अटल ज्योति की शुरुआत की और मंच से रटारटाया भाषण पुराने अन्दाज में पढ़ डाला।

मगर मजे की बात यह रही कि जैसे ही अटल ज्योति की शुरुआत हुई। कोर्ट रोड़ बाजार की ज्योति बुझ गयी और बžत्ती गुल हो गयी जो बमुश्किल घन्टे डेढ़ घन्टे बाद चालू हों सकी स्थानीय निवासी सतीश,पंकज गुप्ता, विजय, नरेश, गोपाल इत्यादि यह कहते सुने गये यह कैसी अटल ज्योति है।

बहरहॉल शासकीय मशीनरी के रहमो करम पर जुटी भीड़ को जब मुख्यमंत्री सम्बोधित कर रहे थे। तब पण्डाल में बैठे लेाग उबासी ले हतोत्साहित से दिखाई दिये। इस बीच कई मौके  ऐसे भी आये जब मचासीन नेता तालीया बजाने का इशारा करते रहे। मगर हतोत्साहित जन समूह के बीच से वह तालियों की गडग़ड़ाहट सुनाई नहीं दी जो किसी लेाकप्रिय नेता के भाषणों में सुनाई देती है। आखिर क्या कारण है यह तो स्वयं शिवराज उनके प्रबन्धक और थिंकटेक ही जाने मगर ऐसा पहली मर्तवा देखा गया जो मुख्यमंत्री के होते हुये भी लेाग ,उत्साहित नहीं दिखे हालाकि कि कार्यक्रम मध्य क्षेत्र विधुत वितरण कम्पनी का था। मगर टिकिटर्थी भी भरे मंच पर बड़ी बड़ी मालाओं से मुख्यमंत्री को लादना नहीं भूले।

मगर सबसे बड़ी दुर्गति तो प्रेस की रही जिस तपती धूप मेें, घूसेड़ कर बैठाला गया। अग्रिम पन्ति में सरपंच और अधिकारी कर्मचारी, पिछवाड़े सिकुड़ी छेड़ी में समुंचे पत्रकार मगर जब प्रेस ने कार्यक्रम पश्चात मुख्यमंत्री से पूछा कि मुख्यमंत्री जी प्रेस से बात करेंगे। बे रुके जरुर मगर दूसरे ही छड़ उनका सुरक्षा कारकेट पिछोर की तरह शिवपुरी से भी बगैर प्रेस से बतियायें ले निकला। धकियायें पत्रकार यह कहते देख्ेा गये क्या मुख्यमंत्री प्रेस का वाक आउट कर रहे है। हो सकता है मुख्यमंत्री कोटा नाका की प्रेस कॉन्फे्रन्स आज तक न भुला पाये हों जो वह निरन्तर प्रेस का वाक आउट कर रहे है।


शिवराज के थिंकटेक,न ले डूबे सरकार: कुछ नहीं मिला शिवपुरी को

ग्वालियर। यूं तो अटल 'योति की शुुरुआत समुचे म.प्र. के सभी जिलों में होनी है सम्भवत शिवपुरी जिला 19 वां है। जहां अटल 'योति की शुुरुआत हुयी। मगर जिस ढंग से कार्यक्रमों का आयोजन और व्यवस्थायें पुन: शिवराज को तीसरी बार मुख्यमंत्री के रुप में की जा रही है। कहीं वह तीसरी बार म.प्र. में शिवराज सरकार के सपने के न ले डूबे। ये अलग बात है कि प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह भले ही अपने को सपनों का स'चा सौदागर कहते मंच न थकते हो।

अगर ऐसा ही सब कुछ रहा तो सपनों को काफुर होते देर न होगी क्योकि कर्नाटक के परिणाम सामने है। जहां भाजपा सरकार के भ्रष्टाचार ने भाजपा की लुटिया ही डुबों दी।

देखा जाये तो म.प्र. की भाजपा सरकार पर भी भ्रष्टाचार के आरोप कम नही। छापों में शासकीय अधिकारी,कर्मचारियों के यहां करोड़ों,अरबों रुपये की सम्पžिा की बरामदगी साबित करती है। कि सरकार डुबाने इतना कुछ कम नहीं। मगर कांग्रेस के अघोषित वाक ऑव्हर से तो फिलहॉल यहीं लगता है कि कांग्रेस भ्रष्टाचार के मुद्दे को म.प्र. में भुना नहीं पा रही।

जबकि प्रदेश के मुख्यमंत्री केन्द्र की यू.पी.ए. सरकार पर कोई भी मौका हमला करने से नई चूकते रहा सवाल चाहे वह बिजली की बात हों या फिर खाद के बढ़े दाम का और अनाज के खरीदी मूल्य का उन्होंने विगत दिनों कहा कि हम तो म.प्र. को 24 घन्टे बिजली देने की शुरुआत कर चुके मगर यू.पी.ए. सरकार की नांक के नीचे दिल्ली,राजस्थान,यू.पी.ए. पश्चिम बंगाल,या अन्य रा'यों में बिजली क्यो नहीं। लेाग कहते बिजली पर हमने इतना खर्च किया जबकि सच यह है कि म.प्र. सरकार ने प्रदेश को 24 घन्टे बिजली देने 25000 करोड़ में से 22000 हजार करोड़ रुपये दिया। कांग्रेस के समय में प्रदेश का बिजली उत्पादन लगभग 3000 मैगावाट था। उसको हमने 10,400 मैगावाट कर दिया व अगले वर्ष तक म.प्र. में विधुत उत्पादन 14000 मैगावाट होगा। जो सिंचाई का रकवा 7 लाख हेक्टेयर था उसे बढ़ाकर हमने 24 लाख हेक्टेयर कर दिया। बेरोजगारों को रिण गारन्टी,प्रशिक्षण,ब'चों को 1 से 12 तक निशुल्क शिक्षा, निशुल्क दवा इत्यादि इत्यादि।

मुख्यमंत्री शिवपुरी हों आये। अगर अटल 'योति को छोड़ दे। तो शिवपुरी को कुछ हासिल नहीं हो सका। बहरहॉल जो भी हो चुनावी वर्ष है। तो सभायें शासकीय जलसे तो होंगे ही। मगर जिस तरह के उवाऊ भाषण और ,रटी रटाई किताब की तरह चाक चौबन्द व्यवस्था  के साथ जनता के बीच मुख्यमंत्री जा रहे है। वहीं पत्रकार जगत की उपेक्षा कर अखबार मालिकों की दम पर सारी व्यवस्था झौंक विकास के ग्रन्थ सुनायें जा रहे है। उससे नहीं लगता सरकार का कुछ भला होने वाला है। क्योकि जनता सब जानती कि प्रदेश में बिजली,पानी,सड़क की क्या स्थति है। और भय, भ्रष्टाचार मुक्त शासन देने वाले मुख्यमंत्री की सरकार भ्रष्टाचार और लेागों में भय की क्या स्थति है बेहतर हों मुख्यमंत्री के थिंकटेक जमीन पर आये वरना साइन इण्डिया की हवा निकले कोई 'यादा वर्ष नहीं हुये है।


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