सामाजिक उत्थान के शिखर पुरुष से लेागों की शिकायत

व्ही.एस.भुल्ले/ इसमें किसी को कोई संदेह नहीं होना चाहिए कि म.प्र. के मुख्यमंत्री सामाजिक उत्थान से जुड़ी योजनाओं के बल बूते सामाजिक उत्थान के शिखर पुरुष बन चुके है। भले ही वह खुद को म.प्र. जनता का भक्त बता चुनावी अभियान में कूंद पड़ें हों,मगर कांग्रेंस को तो उनसे और उनकी सरकार से ढेरों शिकायते है ही वहीं गरीब भी गला फाड़ चिल्लाने में पीछे नहीं कारण साफ है,जो परिणाम शिवराज सरकार को सामजिक क्षेत्र में सेवा और सुविधा के रुप में मिले है।

उतने अपेक्षित परिणाम शिवराज सरकार को आर्थिक विकास और अधोसरंचना निर्माण के क्षेत्र में नहीं मिले। जिसमें दिन दूनी रात चौगनी रफतार से प्रदेश में बड़े भ्रष्टाचार और अलाली में न जाने कितनी जनकल्याणकारी योजनाओं का काचूमर किया है। यह किसी से छिपा नही। अगर यो कहें कि सारी व्यवस्था कायम होने के बावजूद गरीबों के हलक का निवाला आज भी उससे कोसों दूर है,तो कोई अतिसंयोक्ति न होगी।

जहां तक सामाजिक उत्थान के शिखर पुरुष की पहचान बन चुके शिवराज का सवाल है,तो इसमें कोई शक नहीं कि उन्होंने और उनकी सरकार ने महिला सुरक्षा और सशक्तिकरण के क्षेत्र में म.प्र. के अन्दर जो क्रांन्तिकारी फैसले और कार्य हुआ है। वह किसी से छिपा नहीं चाहे वह लाडली लक्ष्मी, जननी सुरक्षा,मुख्यमंत्री कन्यादान,मुख्यमंत्री मजदूर सुरक्षा,स्कूल चले हम,मुख्यमंत्री र्तीर्थ दर्शन,अटल आरोग्य मिशन,अन्त्योदय स्वास्थ मिशन,प्रसूति सहायता आदि आदि योजनाऐं ऐसी रही है। 

जिनका सीधा लाभ आम व्यक्ति को मिला है। यूं तो म.प्र में पहले भी सरकारें रही,जिन्होंने भी सामाजिक क्षेत्र में सेवा और सुविधा मुहैया कराने कई योजनाऐं चलाई मगर जो कामयाबी शिवराज सरकार को मिली ऐसी कामयाबी की हकदार और सरकारे नहीं रही। अब जबकि शिवराज सरकार ने महिलाओं को बराबर का हक सžाा में शिखर पर देने की बात कहीं है। अगर वह कानूनी तौर पर संवैधानिक मजबूरियों के चलते महिलाओं को पचास फीसदी भागी दारी नहीं दिला पाते तो उनको म.प्र. में एक और एतेहासिक मौका इतिहास कायम करने का है। कि वह पार्टी स्तर पर ही पचास फीसदी भागीदारी सुनिश्चित करा ले क्योकि प्रदेश भर में जो चर्चाऐं हैं कि शिवराज के पक्ष में तो लेागो का मत है मगर उन लेागो को कहां ले जाए जो भले ही हार  जाए मगर टिकिट पाने के लिए ऐड़ी चोटी का जोर लगा, अभी भी अधीर है।

रहा सवाल म.प्र. के शिखर पुरुष शिवराज से शिकायत का तो सबसे बड़ी शिकायत तो विपक्षी दल कांग्रेस को है। जो यह कहती नहीं थक रही कि शिव सरकार में माता-बहिनों,ब'ियों की इ'जत सुरक्षित नहीं। भ्रष्टाचार इतना कि जनकल्याणकारी योजनाऐं ही नहीं अधोसरंचना निर्माण भी हाफी भर रहा है। उदाहरण सामने है,लोक आयुक्त एवं आर्थिक अपराध अनवेषण Žयूरो,इनकम टेक्स विभाग के छापों में नौकरशाहों और कर्मचारियों के यहां मिली अकूत सम्पžिा है। रहा सवाल आर्थिक विकास का तो तमाम ग्लोबल मीट और करोड़ों फूकने के बाद भी एक भी उदाहरण ऐसा नहीं कि जिसकी म.प्र. में चर्चा हों। जिस अटल 'योति अभियान को  शिव सरकार का तारंणहार मान जिले-जिले घूम शुरुआत करने में जुटी है। 

कहीं यहीं नैया न डूबो दें जिसकी शुरुआत शुरु हुई अटल 'योति अभियान वाले जिलों से हो चुकी है। चौबीस घन्टे विधुत प्रवाह में बाधा बनते बहाने लेागों के गले नहीं उतरते। जिसमें लेाक सेवा गारंटी ने तो राजस्व,राशन कार्ड,गरीबी रेखा सूची,और श्रामिक कार्ड की सेवा ने लेागों की हवा निकाल रखी है। बैचारे गरीब सौ-दो सौ गंबाने के बावजूद धक्के खाते अपमानित होते घूमते मिल जाऐगें।मगर हर माह हजारों की पगार उड़ाने वाले मरहम लगाने के बजायें उनके जख्म कुरीदते नजर आएंगे। जिन भगवानों की खातिर शिवराज भक्त बन 18-18 घन्टे कड़ी मेहनत में जुटे है,उसी भक्त के राज में भगवानों की ऐसी दुर्गति की शिकायत विपक्ष को छोड़ आम जन मे भी है।

हालाकि स्थिति जो भी हो मगर जो मिशाल शिवराज ने सामाजिक उत्थान के क्षेत्र में स्थापित की है। जहां सरकारी खजाने से धन गरीब के हलक तक सीधा जा रहा  है, ऐसी मिशाल शायद ही समुचे देश मेें नहीं।

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