जोश जमीन पर नहीं दिखा तो, होश फाकता होते देर न होगी

व्ही.एस.भुल्ले। भोपाल। जो जोश राहुल ने अपने 3 दिवसीय प्रवास के दौरान म.प्र. में गुटों मे बट मृत पढ़ी कांग्रेस में सिधिया के बाद फूकने का...

व्ही.एस.भुल्ले। भोपाल। जो जोश राहुल ने अपने 3 दिवसीय प्रवास के दौरान म.प्र. में गुटों मे बट मृत पढ़ी कांग्रेस में सिधिया के बाद फूकने का प्रयास किया है। उसमें वह कुछ हद तक सफल भी रहे। मगर कार्यकर्ताओं के बीच जागे जोश को जमीन तक नहीं लाया गया तो होश फाकता होते देर न होगी और यह तभी सम्भव है जब राहुल स्वयं म.प्र. कांग्रेस की कमान सम्हाले या फिर म.प्र. पर नजदीकी से नजर रखे।

कारण साफ है जो गुटबाजी दो-दो पीढिय़ों से म.प्र. कांग्रेस में पैर पसार कांग्रेेस की लुटिया डुबाने में जुटी है। दो-चार घन्टे,मिन्टो या फिर सार्वजनिक भवकियों से मिटने वाली नहीं। गुटबाजी का बहाव इतना चल निकला है कि कितना भी जोड़ों अभियान चलाये जुडऩे वाला नहीं। कांग्रेस हल्को से उड़ती खबरों पर यथा संज्ञान ले तो ले देकर एक ही गुट है। जिसे डिवाइड एण्ड रुल का खासा ज्ञान है। शेष जो गुट प्रचारित है वे तो इनके सžाा में बने रहने का सामान है और यह स्वाभाविक भी है। 

जो लेाग 10 वर्ष तक एक जुट रह कांग्रेस की कमजोरी का लाभ उठा खुद को मजबूत करते रहे और साम,नाम,दण्ड,भेद की नीति अपना अन्य नेताओं को हाशिये पर डालते रहे। खुद मजबूत और कांगे्रेस कमजेार फॉरमूले पर चल कांगे्रेस को रसातल में पहुंचाने वाले नई रणनीति के साथ कांग्रेस के सामने है। कई धुर कांग्रेसी आज भी यह कहने से नहीं चूकते कि जब यह गुट सžाा में था तब इस गुट ने चुन-चुन कर असली कांग्रेसियों को घर बैठने पर मजबूर और अपने पट्टो को म.प्र. ही नहीं दिल्ली तक में मजबूत बनाया। आज वहीं पट्टे अलग-अलग गुटों का नेतृत्व कर रहे है। कई जनाधार वाले नेताओं की छोटी-छोटी बाते अपने राजनैतिक लाभ के लिये 10 जनपथ पहुंचने वालो का गुप्त कारंवा इतना लम्बा है कि राहुल गिनते गिनते थक जायेंगे। आर्थिक,राजनैतिक रुप से सम्पन्न इस गुट का कारवां इनकी जन्मपत्रियाँ खगाली जाये तो सžाा पक्ष के कई धाकड़ नेताओं मंत्रियों के साथ इनके राजनैतिक व्यापारिक सम्बन्ध अघोषित तौर पर दिख जायेगें। जिनकी चर्चा भी जब तब प्रदेश में अखबारों की सुर्खियां बनती रही है।

रहा सवाल अन्य प्रचारित गुटों का तो छिन्दवाड़ा वाले केवल छिन्दवाड़ा की उगंलियोंं पर गिने जाने वाली सीटों तक सिमटे है। वहीं खरगौन वाले कभी खरगौन से नहीं निकल सके भले ही वह प्रदेश अध्यक्ष रहे हो। रहा सवाल ग्वालियर वालो का सो कई वर्षो तक प्रदेश की खाक छानने के बाद छोड़ ग्वालियर-चम्बल,मालवा जो उनके प्रभाव क्षेत्र का रहा एक भी क्षत्रप को लाख जतन के बाद कभी एक मंच पर नहीं ला पाये।

अब अगर कांगे्रेसी सूत्रों की ही माने तो जिन तीन-चार अन्य गुटों की कहानी राहुल को मीडिया या कार्यकर्žााओं द्वारा सुनाई और दिखाई गई है। हो सकता है यह भी उनकी रणनीति का हिस्सा हों। क्योकि कौन नहीं जानता झाबुआ वाले अध्यक्ष जी और चुरहट वाले विपक्ष जी को रहा सवाल भोपाल वाले पण्डित जी का सो उन्हें वैसे भी दिल्ली से फुरसत कहा?

अब कांग्रेस का दुर्भाग्य यह है कि जो गुट 10 वर्ष तक कांग्रेस शासन में सžाा की मलाई काटता रहा और अपनी समन्वय कारी नीति के चलते विपक्ष की सरकार के रहते स्वयं को बचा अपना अस्तिव बनाये रखा उस गुट के नेताओं को जनता फूटी आंख नहीं देखना चाहती। और जिस नेता को जनता चाहती है भाजपा के विकल्प के रुप में, उसे शेष गुट फूटी आंखों नहीें देखना चाहते इसलिये म.प्र. में 6-7 गुटों की बात मीडिया में दौहराई जा रही है। अगर ऐसे में आलाकमान आम कार्यकर्žााओं और आम मतदाता की आवाज पर शेष गुटों को दर किनार कर एक प्रचारित गुट को कमान सौंप भी दे तो शेष 6 गुट जिनके पास अपने अपने क्षेत्र में बताने को कुछ नहीं सिवाय अघोषित मुखिया के तो कोई अतिसंयोक्ति न होगी।  जिसे जनता किसी भी कीमत पर स्वीकारना नहीं चाहती, जो वक्त पडऩें पर पासे उल्टे देख सभी गुट मिल खुद ही कांग्रेस की लुटिया डुबाने से पीछे नहींं हटेंगे।

बेहतर हो वर्तामन हालातों के मद्देनजर राहुल म.प्र. कांगे्रेस की कमान स्वयं ही सम्हाले तो गुटबाजी भी कन्ट्रौल होगी और कांगे्रस सžाा में भी लौट सकती है। अगर राहुल विधानसभा की कीमत पर लेाकसभा में अधिक से अधिक कामयावी के पूर्व फॉरमूले पर चले तो विधानसभा तो हाथ से जायेगी ही लेाकसभा में भी कांग्रेस की पूरी तरह भद्ध पिट जायेगी।

फिलहॉल जरुरी है राहुल जागे म.प्र. के कार्यकर्žााओं के जोश को किसी के भी माध्ययम से जमीन तक पहुंचाये। साथ ही गहरी नजर लगा यह भी देखते जाये कि कौन कौन कांग्रेस के लिये जी जान से जुटा है। तब तो 3 दिवसीय दौरे की हकीकत, म.प्र. में हमराज बन जायेगी अगर इस मर्तवा भी कांग्रेस म.प्र. में सžाा में, नहीं लौटी तो, म.प्र. में कांग्रेस एक इतिहास बनकर रह जायेगी।

सुशासन,मेहसूस कराने,जुटेंगे मातहत, कमिश्रर ने दी मातहतों को बैठक में टिप्स

शिवपुरी। गत दिनों कलेक्ट्रेट सभागार में शासकीय सेवाओं और सुविधाओं को मूलहितग्राही तक पहुंचाने ईको फ्रेन्डली स्टाइल में अपने मातहतों की बैठक ली। जिसमें शासकीय विभागों के आला अफसरों के अलावा पहली मर्तवा पत्रकारों को भी शामिल किया गया। खचाखच भरे सभागार में आयुक्त खरे ने ग्राम पंचायत स्तरीय सुशासन शिविरों की उपयोगिता और शिविरों के प्रबन्धन के बारे में विस्तार से बताया।

उन्होंने सेवाओं,सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं का ग्राम पंचायत स्तर पर ही ईको फ्रेन्डली सिस्टम से लेागों को मौके पर ही राहत देने की ताकीत की। साथ ही तरीके भी सुझाये। सकारात्मक मानसिकता के साथ कार्य करने वालो को समझाईस देते हुये उन्होंने मातहतों से यहां तक कहा कि आदमी नियम कानून के लिये नहीं बना बल्कि नियम कानून आदमी के लिये बनाये गये है। इसलिये हमें कार्य करते वक्त यह ध्यान रखना होगा कि हम लेागों को सेवा ओर सुविधा उपलŽध कराते वक्त सेवा सुविधा पहुंचाने के रास्ते टूड़े न टालने के।

उन्होंने विश्तृत मूल्याकंन सतत,निगरानी,त्वरित निदान इस प्रक्रिया से कैसे होगा यह भी बताया साथ ही उन्होंने कार्य में कोताही,गलत जानकारी पर क्या-क्या सख्त कार्यवाही हो सकती यह भी मातहतों को ईको फ्रेन्डली तरीके से बताया।

कुल मिलाकर भले ही आयुक्त महोदय ने प्रेस से बैठक में कहा हो कि वह अपनी सुविधा और आमजन,गरीब की सेवा हेतु इस सिस्टम पर विगत सात वर्षेा से काम कर रहे है।

मगर आयुक्त महोदय की मंशा बैठक में साफ दिखी कि गांवों में अन्तिम से अन्तिम छोर पर बैठे हर गरीब निशहाय व्यक्ति को शासन का सुशासन दिखना ही नहीं महसूस भी होना चाहिए। यहीं हमारा अन्तिम लक्ष्य होना चाहिए। इस बीच आयुक्त ने पत्रकारों द्वारा उठाई गयी संकाओं पर भी सकारात्मक रुख की बात कहीं।

जब विलेज टाईम्स द्वारा आयुक्त महोदय से पूछा गया कि स्वमेव जयते की दौड़ मे जुटे लेागो के बीच जमीर क्या जागेगा? क्या यह विपक्ष के साथ अन्याय नहीं, ठहाको के बीच आयुक्त महोदय ने इतना ही कहा कि हम चाहते है लेागों को स्थानीय स्तर गांवों में ही लेागो की समस्याओं का निराकरण सेवा सुविधा हर बन्चित व्यक्तियों को मिले क्योकि इससे पूर्व भी अन्य जिलों में भी अधिक से अधिक सेवा सुविधा मुहैया करा समय पर शासकीय सेवा,सुविधाओं का लाभ पहुंचा चुके है।


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तीरंदाज,328,व्ही.एस.भुल्ले,523,
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Village Times: जोश जमीन पर नहीं दिखा तो, होश फाकता होते देर न होगी
जोश जमीन पर नहीं दिखा तो, होश फाकता होते देर न होगी
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