सिद्धपीठ माँ पीताम्बरा पर बहती है शक्ति, भक्ति की अविरल धारा

रामजीशरण राय/ दतिया। देश के प्रसिद्ध तांत्रिक साधना स्थलों में जाना जाने वाला माँ पीताम्बरा का दरबार पर सतत प्रवाहित होती है शक्ति और भक्ति की अविरल धारा। बताया जाता है कि माँ के दरबार में साधना करने से मनोवाँछित फल की प्राप्ति होती है।

लीला पुरूषोत्तम भगवान श्री कृष्ण के भाई दंत्तवक्र के नाम से विख्यात दतिया अनेक ऐतिहासिक व धार्मिक धरोहरों को अपने संजोये हुए है। जिनमें प्रमुख रूप से माँ पीताम्बरा का मंदिर, सूर्य मंदिर उनाव बालाजी, सनकुआँ सेंवढ़ा, पंचम कपि की टोरिया, उड़नू की टौरिया, भारत में चुनिंदा प्रसिद्ध शक्तिपीठों, सिद्ध जैन क्षेत्र सोनागिर, वीरसिंह महल, दतिया किला, पुराना राजगढ़ एवं गुजर्रा अशोक शिलालेख आदि में सुमार है।

इस प्रसिद्ध शक्तिपीठ पर प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में भक्तों का दर्शनार्थ एवं मनोवाँछित फल प्राप्ति हेतु तांता लगा रहता है। माँ बगलामुखी के दरबार में नवरात्री के पावन पर्व के अवसर पर साधकों एवं दर्शनार्थियों की संख्या हजारों में तब्दील हो जाती है। साधना से शक्ति और भक्ति की प्राप्ति होती है ऐसा वर्णित है।

इस अवसर पर माँ के दरबार की मनोहारी छटा का अद्भुत रहती है जो कि अवर्णनीय है। मंदिर प्रांगण विशाल है किन्तु दर्शनाथियों की संख्या के कारण प्रशासन को भी बड़े इन्तजाम करने पड़ते है। मंदिर के सामने से गुजरने वाले प्रमुख मार्ग पर गुजरना भी दूभर हो जाता है। शनिवार के दिन यह संख्या और बढ़ जाती है जिससे प्रशासन को मंदिर से १ से २ किमी देरी पर ही चार पहिया वाहनों को रोककर व्यवस्था के प्रयास किया जाते हैं। सुरक्षा का उचित प्रबंध नवदुर्गा महोत्सव के अवसर प्रशासन द्वारा किया गया है। सुरक्षा के मद्देनजर पीठ परिसर में सी.सी.टी.व्ही. कैमरा जगह जगह लगाये गये हैं। महोत्सव के अंतिम दिन नवमी को  विशाल हवन एवं भण्डारा आयोजन होता है।

पूज्यपाद स्वामी जी आगमन 1929 में
पूज्यपाद स्वामी जी आगमन ब्रह्मलीन दतिया नगरी में सन् १९२९ में हुआ था बताया जाता है कि तब इस प्रंगण में घनघोर जंगल हुआ करता था। पू. स्वामी जी ने राष्ट्रीय राजमार्ग-७४ ग्वालियर-झाँसी पर स्थित पंचम कपि की टोरिया पर विश्राम किया एवं उसके सामने दूसरी ओर भैरवनाथ को विराजित देखा और उन्होंने वहाँ रूककर मंत्रोच्चारण विधि के साथ माता तारा देवी की स्थापना कराई।

महाभारत कालीन वनखण्डेश्वर महादेव
पू. स्वामी जी महाराज विचरण करते हुए महाभारत कालीन वनखण्डेश्वर महादेव की वीरान पड़ी स्थली पर आये। इस स्थान पर मान्यता है कि आज भी यहाँ अश्वथामा जप करते हैं। कालांतर में अनेकों सिद्ध साधकों को उनके दर्शन हुए हैं।

माई की स्थापना 1935 में
सिद्धपीठ परिसर में पू. स्वामी जी महाराज को शक्ति स्वरूपा माँ पीताम्बरा ने साक्षत्कार के दौरान आदेशित किया कि इस परिसर में शक्तिपीठ की स्थापना कराई जावे। माँ की आज्ञा के परिपालन में महाराज जी अपना आश्रम बनाकर तपस्या में लीन हो गये। साधना काल के दौरान वर्ष १९३५ में माँ बगलामुखी की वैदिक रीति अनुसार स्थापना सम्पन्न कराई गई।

 माँ धूमावती की स्थपना 1978 में
इस सिद्धपीठ माँ पीताम्बरा मंदिर परिसर में माँ धूमावती की विधिवत् स्थापना सन् 1978 सम्पन्न हुई। ऐसी मान्यता है कि माँ धूमावती का यह रौद्र रूप भगवान शिव को निगलने के प्श्चात का है।

प्रभारी मंत्री ने नये उघमियों  के साथ साझा किये अनुभव

शिवपुरी। मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना का शुआरम्भ करने कै.माधवराव सिंधिया शा.स्नातकेžार महा विद्यालय पहुंचे प्रभारी मंत्री ने नये उद्यमियों को 50-50 हजार रुपये के चैक भेट करने के पश्चात अपने अनुभवों को शेयर करते हुये कहा कि एक अ'छे व्यवसायी उधमी मे तीन चार खूबियों का होना जरुरी है।

पहला उसे वह व्यवसाय करना चाहिए जिसमें उसे रुचि हो दूसरा उसे धैर्य शील,विश्वसनीय और अपने कार्य के प्रति ईमानदार होना चाहिए अगर ये सारी बाते किसी उद्यमी है तो कोई कारण नहीं जो सफलता हाथ न लगे।

सरकार लेागों को  सुविधा और साधन मुहैया करा सकती है। उद्योग-व्यापार नहीं चलवा सकती उसके लिये ईमानदार कोशिस आप ही को करनी है जहां तक नौकरियों का सवाल है। तो यह प्रतिभा को सीमित हीं नहीं करती बल्कि व्यक्ति के जीवन को भी सीमित कर देती है।

मगर उद्योग व्यवसाय में व्यक्ति के विकास की अपार सम्भावनाये है आपको याद होगा कि धीरु भाई अम्बानी एक क्लर्क थे। मगर जब वह व्यवसाय के क्षेत्र में आये तो उन्होंने धैर्य रख कड़ी मेहनत की अपने व्यवसाय के प्रति विश्वसनीयता और ईमानदारी के साथ जो परिणाम सामने है। मुकेश अम्बानी आज देश के सबसे बड़े उद्योग पति है। देश ही नहीें विश्व के अमीरों की लिस्ट में भी उनका नाम है।

उन्होनें अपने जीवन के संस्मरण को सुनाते हुये कहा कि उन्होनें 1973 में जबलपुर से मैकनीकल ईन्जीनियरिंग में शिक्षा हासिल की मगर मैंने व्यवसाय सिव्हिल इन्जीनियरिंग में शुरु  किया। ये सच है कि कुछ समय के लिये परेशानी आती है। अगर हम धैर्य न खोये तो सफलता हमारे साथ होती है। मैंने भी धैर्य रखा और परिणाम सामने है मैं अपने व्यवसाय से सन्तुष्ट हूं।

उन्होंने कहा कि मैं यहां एक बात और स्पष्ट करना चाहता हूं। हमारे मुख्यमंत्री जी युवा हाथों को रोजगार मुहैया कराने कॉफी चिन्तित रहते थे। म.प्र. के हर युवा को रोजगार मिले म.प्र. समृद्ध खुशहाल बने इसके लिये मुख्यमंत्री जी ने प्रदेश भर के युवाओं को साथ भोपाल में बैठक की और सलाह मशविरा पश्चात इस योजना को लागू किया जिसमें सबसिटी ही नहीं हमारी सरकार ने रिण गारन्टी की भी जबावेदही स्वीकार की।

अब जरुरत है आपकी मेहनत लगन की जिससे प्रदेश भर में उद्योगों कर जाल फैल जाये और हर हाथ को रोजगार और प्रदेश में समृद्धि आये इस मौके पर प्रभारी मंत्री के अलावा शिवपुरी विधायक माखनलाल राठौर,जिला पंचायत अध्यक्ष जितेन्द्र जैन गोटू भाजपा महामंत्री वरिष्ठ भाजपा नेता अनुराग अष्ठाना,भरत अग्रवाल कलेक्टर आर.के.जैन, विलेज टाइम्स के संपादक वीरेन्द्र शर्मा सामाजिक  न्याय व उद्योग के अधिकारी कर्मचारी सहित नव उद्यमी व्यवसायी पत्रकार आदि कार्यक्रम में  उपस्थित थे।


SHARE
    Your Comment

0 comments:

Post a Comment