भले का मुंह काला,जादुई धंनाडुयों का बोल बाला.....?

व्ही.एस.भुल्ले@तीरंदाज/ भैया-मैं तो वोल्यू सभ्यता तेा सभ्याता अब तो संस्कारों के जनाजों की बारी है,क्योकि कोई बताये तो हमारे वाड्रा साहब...

व्ही.एस.भुल्ले@तीरंदाज/ भैया-मैं तो वोल्यू सभ्यता तेा सभ्याता अब तो संस्कारों के जनाजों की बारी है,क्योकि कोई बताये तो हमारे वाड्रा साहब ने करोड़ों की भूमि कोणियों के भाव कहा कबाड़ी है। जो कैडर वाले हमारे सर्वोच्च सदन में हायतौबा मचायें हुये है क्या इनकों इतना ही नहीं पता कि वे बच्चों है और दामाद भी मगर जब देखों तब उन्हें कोई न कोई जमीन विवाद में खीच लाता है।

सजायाफता बैचारे चौटालाओं को अब छोड़ दे जो कभी टी.वी. की स्क्रीनों पर रजिष्ट्रियां दिखाते थे और हमारे वाड्रा साहब पर उंगलियां उठाते थे। रहा सवाल विघन सन्तोषी हमारे केजरी बाल साहब तो वे भी हाथ पैर मारने के बाद अब शान्त पड़े है ऐसे में इन केडर वालों को क्या हुआ है। जो सदन की कार्यवाहीं में बैचारे वाड्रा साहब की मिलकीयत को लेकर अड़े है और उनके विकास के रास्ते का रोड़ा बने।

वैसे ही तो हरियाणा और डी.एल.एफ. मामला भारी था,क्या वाक्य मेें ही दामाद साहब ने अपने रसूख के चलने राजस्थान में कोई जमीन कबाड़ी है।

भैये-न जाने क्यों थारे को दूसरों के मामले में टांग अड़ाने की बीमारी है। भाजपा संासदों के अनुसार वीकानेर हो या जैसलमेर की 311 एकड़ जमीन हो या बीघाओं मेंअब कोई सदन रोके या हल्ला बोले तेरे को क्या लेना देना? क्या तेरे को पता नहीं कि हर वर्ष की भांति म.प्र.के मुख्यमंत्री शिवराज ने तो अपनी आय-व्यय सम्पžिा का पिटारा खोला है मगर अधिकांश मंत्रियों  ने अभी तक अपना मुंंह नहीं खोला है जिसमें हमारे विदिशा वाले मंत्री जी अर्थात पंडित जी तो मुंह में ऐसे मिश्री दावे बैठेे है कि जब से वह मंत्री बने है। तब से आज तक उन्होंने सम्पžिा के नाम अपना मुंह ही नहीं खोला।

भैया-थारे से जो मैं पूछू सीधा सीधा उसी के बारे में बता,मुझे नये-नये जुमले मत सुना बैसे भी भारतीय प्रेस परिषद थारे जैसे चित्रकार पत्रकार की जन्मकुन्डली बना नये कानून की पहल करने वाली है। सुना है,भा.प्र.प. के अध्यक्ष जास्टिस मर्कडेय काटजू जी ने पत्रकारिता की न्यूनतम योग्यता तय करने एक समितिका गठन किया है। जिसमें नई दुनिया के प्रधान संपादक पी.सी.आई. सदस्य श्रवण गर्ग,राजीव सवाडे और पुणे विश्व विद्यालय के संचार पत्रिकारिता विभाग में एसोसियेट प्रोफेसर,डॉ उ"ावला वर्वे को रखा है जिनकी रिर्पोट के आधार पर कानून बनेगा।

भैया- तो क्या तूभी म्हारे को नौकरशाह,सरकारों,नेता,पूंजीपžिायों,मैजिक कैपटिलिस्टों की तरह धमक रहा है। या फिर लोकतंत्र का सार सुना रहा है।

भैये-मैं ठहरा ठेट गंवार मैं क्या जानू सार और भार म्हारे को तो म्हारे जादुई धनाड्डयों की चिन्ता सता रही वहीं बार बार यहीं पन्तियां याद आ रही है भले का मुंह काला और जादुई धनाड्डयों का बोल वाला के थारे को मालूम नहीं कि अब 2-5 लाख कीमत वाली लग्झरी कारे और 25-30 हजार की मोटर सायकिले बनाने वाली कम्पनियां 6 से लेकर 15 लाख तक की लग्झरी कारे और 50 हजार से लेकर ढेड़ लाख तक की मोटर साइकिले बना रही है। शहरों की सड़कों पर गिजाईयों के झुन्ड की तरह दौड़ते वाहन बनाते है कि जादुई धनाड्डयों की संख्या किस कदर देश में बढ़ी है। और बढ़ती मंहगाई से हम गरीब की लंगोटी कैसे छिनी है। ये तो ऊपर वाला ही जाने फिलहॉल तो सदियों से स्थापित सिद्धान्तों संस्कारों में भारी उथल पुथल मची है। आखिर किसकों म्हारें महान संस्कारों की पढ़ी है।

भैया-संस्कार तो म्हारे भी जिन्दा है, मगर हम संस्कार वालो की किसे चिन्ता है। संस्कारों की चिंता पर फिकते फूलो से आखिर कौन अछूता है और किस संस्कार विहींन सूरवीर पर कब पहाड़ टूटा है। क्या तू भूल गया म्हारी वह किवंदती जो कहावतों के बीच है जो शरीर में जान पड़ते ही जन्म के वक्त दो बाते दोनो कानों में फूंक दी जाती है। पहली कि है मानव तुझसे सुन्दर इस प्रथ्वी पर दूसरा कोई सुन्दर नही। दूसरी बात कि तुझसे बड़ा कोई ज्ञानी नही। इन्हीं दो जुमलों के बीच जिन्दगीें जीवन भर झूलती है। अगर जिसने भी ध्यान लगा लिया तो उससे संस्कार और सभ्यता छूटती नहीं है। सो भाया मने तो ध्यान में हूं ब्रम्ह ज्ञानियों और ब्रम्हान्ड सुन्दरों के बीच फिर छोड़ भी भैया इस आध्यात्म को तू तो सिर्फ इतना बता क्या म्हारे प्रदेश में मची सरफुटुवल के बीच हाथ वालों का गरीबों का साथ मिल पायेगा। या सारा कुछ रस्से के खेल की तरह ढेर हो जायेगा।

भैये- क्या बतांऊ जिस तरह से सपाट पिच पर बोंलिग चल रही है,उससे केडर वालो की टीम में दहशत तो दूर हाथ वालो की गेंदे जबरदस्त कुट रही है। अब ऐसे में मुझे नही लगता कि प्रबन्धों की रणनीति सही चल रही है फिक्स मैच की तरह फिकती गेंदो से तो यहीं अन्देशा है। कुछ दिन और कुटी तो समझों तीसरा होने वाला मिशन 2013 भी गरीब के साथ, हाथ वालो ने जान बूझ कर छोड़ा है।

भैया- मने समझ लिया थारा इसारा मगर क्या करुं रैरे कर म्हारे को म्हारे हाथ वालो की चिन्ता सता रही मगर जादुई धनाड्डयों की भीड़ अब तो शहर छोड़ गांवों में भी धन खूब लुटा रही है। भले ही फसल हो न हो, लाला की पूरी लिस्ट समर्थन मूल्य से इतर कोणियों की जमीन करोड़ों में खरीद वा रही, इसे कहते है। आर्थिक विकास,भले ही पीढ़ी दर पीढ़ी हमारे पूर्वजों की काठी खेतों मे रगड़ रगड़ कर घिसी हो मगर अब तो एन्डीवर ही नहीं बाड़े फॉरचियूनर खड़ी है।



मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना दिनांक 1 अप्रैल 2013 से आरंभ होगी


दतिया दिनांक 13 मार्च 2013

मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना के क्रियान्वयन हेतु वाणि'य, उद्योग और रोजगार विभाग नोडल विभाग होंगे। योजना का क्रियान्वयन ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग तथा शहरी क्षेत्रों में वाणि'य, उद्योग और रोजगार विभाग नोडल जिला व्यापार एवं उद्योग केन्द्र के माध्यम से किया जावेगा।

इस योजना का लाभ लेने के लिए मध्यप्रदेश का मूल निवासी हो, दसवीं कक्षा उत्र्तीण, आवेदन दिनांक को आयु 18 से 35 वर्ष के मध्य हो, अनुसूचित जाति, जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, महिला, नि:शक्तजन उद्यमी हेतु अधिकतम आयु सीमा में 5 वर्ष की छूट रहेगी। ऋण गांरटी निधि योजना सी.जी.टी. एम.एस.सी. अंतर्गत् गारंटी शुल्क प्रतिपूर्ति की सुविधा केवल उद्योग एसवं सेवा क्षेत्र के लिए देय होगी, व्यवसाय क्षेत्र के लिए नहीं, आवेदक किसी भी राष्ट्रीयकृत बैंक, वित्तीय संस्था, सहकारी बैंक का चूककर्ता, अशोधी नहीं होना चाहिए, यदि कोई व्यक्ति ऐसी किसी अन्य सरकारी योजना के अंतर्गत पूर्व से सहायता प्राप्त कर रहा हैं तो इस योजना के अंतर्ग पात्र नहीं होगा।

रूपये 50 हजार तक की परियोजना लागत की स्थिति में परियोजना लागत पर मार्जिन मनी सहायता सिर्फ एक बार देय 20 प्रतिशत अधिकत रूप्ये 10 हजार, परियोजना लागत पर ब्याज अनुदान 20 प्रति. की दर से 5 वर्ष तक अधिकतम रूपये 2 हजार प्रतिवर्ष, गारंटी शुल्क 1 प्रतिशत की दर से एक बार देय अधिकतम 500 रूपये, गारंटी सेवा शुल्क 0.5 प्रतिशत की दर से 4 वर्ष हेतु अधिकतम 1000 रूपये।

रूपये 50 हजार रूपये से 25 लाख तक की स्थिति में परियोजना लागत तथा कार्यशील पूॅजी पर ब्याज अनुदान 5 प्रति. की दर से 5 वर्ष तक पॅूजीगत लागत पर 50 हजार रूपये अधिकतम प्रतिवर्ष तथा कार्यशील पॅूजी पर 25 हजार रूपये अधिकतम प्रतिवर्ष, अधिकतम कुल रूपये 75 हजार प्रतिवर्ष। गारंटी शुल्क एक बार देय 1 से 1.5 प्रतिशत अधिकतम 37500 रूपये। गारंटी सेवा शुल्क 4 वर्ष हेतु 0.5 से 0.75 प्रतिशत की दर से अधिकतम 75000 रूपये।

आवेदन की प्रक्रिया की तहत् आवेदक द्वारा निर्धारित प्रपत्र पर आवेदन जिला व्यापार एवं उद्योग केन्द्र, जनपद पंचायत में आवश्यक सहपत्रों सहित प्रस्तुत किया जावेगा, आवेदन पत्र नि:शुल्क रहेगा। आवेदक द्वारा आवेदन के साथ प्रस्तावित गतिविधि  की प्रोजेक्ट रिपोर्ट परियोजना प्रतिवेदन संलग्न की जावेगी।

वर्ष 2013-14 हेतु दतिया जिले का 50 हजार रूपये तक की परियोजना हेतु लक्ष्य 380 तथा रूपये 50 हजार रूपये से 25 लाख तक की परियोजना हेतु 160 का लक्ष्य निर्धारित हैं।



माफिया चीर रहे हैं धरती का सीना: बौनी साबित हो रही है खनिज विभाग की कायर्वाही


श्योपुर। प्रदेश के सरहदी जिले श्योपुर में खनन माफिया द्वारा किए जाने वाले उत्खनन जिला प्रशासन तथा खनिज विभाग के लिए बडी चुनौती बने हुए हैं। हालांकि खनिज विभाग ने विगत कुछ समय में अवैध खनन व परिवहन के मामलों में सिलसिलेवार कायर्वाहियां करते हुए अपने वजूद में होने का आभास जरूर कराया है लेकिन जितने बडे पैमाने पर खनन माफिया ने अपने पैर पसार रखे हैं उनकी तुलना में विभागीय व प्रशासनिक कायर्वाहियां ऊंट के मुंह में जीरा ही साबित हो पा रही हैं। आलम यह है कि खनिज माफियाओं द्वारा धरती का सीना चीरते हुए लाखों के वारे-न्यारे हर दिन किए जा रहे हैं तथा माफियाओं के मददगार व अनुगामी लठैतों व दबंगों की भी पौ-बारह बनी हुई है। अवैध उत्खनन की आंधी में जहां शासन के नियमों और माननीय न्यायालयों द्वारा समय समय पर जारी आदेशों की धज्जियां उड रही है, वहीं सरकारी राजकोष को लाखों रूपए के राजस्व की हानि हो रही है। गौरतलब है कि जिले में अवैध उत्खननकर्त्ताओं तथा उनके सहयोगियों द्वारा प्रशासनिक अधिकारियों-कर्मचारियों पर हमले के मामले विगत कुछ महीनों के दौरान सामने आ चुके हैं वहीं ग्राम सांकुडली में अवैध रेत उत्खनन के दौरान तीन मजदूरों की अकाल मौत भी हालातों की गंभीरता का बयान कर चुकी है। ऐसे में शासन-प्रशासन और विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की उदासीनता तमाम तरह के सवालों को जनमानस में खुद-बखुद उत्पन्न करने का ही काम कर रही है।

ना ग्राम्यांचल सुरक्षित ना वनांचल महफूज....

जिले में अवैध उत्खनन की समस्या की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जिला मुख्यालय की नगरीय सीमा वाले क्षेत्र अवैध खनन के गढ बने हुए हैं। बात यदि पूरे जिले के संदर्भ में की जाए तो आसानी के साथ कहा जा सकता है कि जिले का वनांचल और ग्राम्यांचल भी माफिया की पकड में आया हुआ है जिनमें कराहल और विजयपुर के जंगल अग्रणी बने हुए हैं। जानकार सूत्रों की मानें तो उक्त दोनों क्षेत्रों में अवैध उत्खनन जबर्दस्त तरीके से जारी बना हुआ है। आरोप तो यह भी लग रहे हैं कि विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की मिलीभगत के बिना इस कारोबार का इस हद तक जमकर फलना-फूलना संभव ही नहीं है। बहरहाल, दावे किए जा रहे हैं कि जिले में मुरम, बोल्डर, पत्थर और रेत सहित तरह-तरह के खनिज पदार्थो का अवैध उत्खनन धडल्ले से हो रहा है, जिनमें संलगन् लोगों को प्रशासनिक और विभागीय समर्थन के साथ-साथ राजनैतिक संरक्षण भी प्राप्त हो रहा है। जानकारों का तो यह भी कहना है कि जिले के अधिकारी नगरीय सीमा क्षेत्र में दिखावे के लिए कायर्वाही करते हुए अवैध खनन के गढ बन चुके क्षेत्रों की ओर से मुंह मोड रहे हैं तथा कोई जोखिम लेना नहीं चाहते।

आपका कहना है...
अवैध उत्खनन को रोकना खनिज विभाग की जिम्मेदारी है जिसके अधिकारियों को इस तरह के प्रयासों की रोकथाम व कायर्वाही के लिए सक्रिय रहना चाहिए। बावजूद इसके लापरवाही या उदासीनता बरती जा रही है तो यह गंभीर बात है। इस मामले में जानकारी ली जाएगी तथा अवैध उत्खननकर्त्ताओं के खिलाफ कायर्वाही के लिए विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया जाएगा।

शिवानंद दुबे
आयुक्त, चम्बल संभाग

उपनगर ग्वालियर के विकास मसौदे पर तेजी से अमल शुरू

ग्वालियर 13 मार्च 2013/ उपनगर ग्वालियर की रंगीनियत और रौनक फिर से लौटेगी। यहाँ के सुनियोजित विकास और सौंदर्यीकरण के मसौदे पर तेजी से अमल शुरू हो गया है। कलेक्टर श्री पी नरहरि ने बुधवार को नगर निगम आयुक्त श्री वेदप्रकाश, अपर कलेक्टर डॉ. सतेन्द्र सिंह एवं तकनीकी अधिकारियों के साथ उपनगर ग्वालियर में चल रहे विकास कार्यों का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री अधोसंरचना विकास योजना की सड़कों सहित शहर में चल रहे अन्य विकास कार्य भी देखे।

विदित हो रा'य सरकार के दिशा निर्देशों के तहत उपनगर ग्वालियर के अंतर्गत हजीरा चौराहे का विस्तार, चार शहर का नाका-मलगढ़ा मार्ग, हजीरा-किला रोड़, सेवानगर रोड़, कोटेश्वर रोड़, चार शहर का नाका-सागर ताल रोड़ और सागरताल से जमाहर सड़क (गोले का मंदिर-मुरैना रोड़) आदि सड़कें बनाई जा रही हैं। साथ ही सिविल हॉस्पिटल ग्वालियर का भी कायाकल्प हो रहा है।

कलेक्टर श्री नरहरि ने बुधवार को हजीरा चौराहा, चार शहर का नाका व सिविल हॉस्पिटल सहित इस क्षेत्र में चल रहे अन्य विकास कार्यों का जायजा लिया। उन्होंने निर्माणाधीन सिविल हॉस्पिटल की धीमी प्रगति पर नाराजगी व्यक्त की और काम में तेजी लाने के निर्देश दिये। श्री नरहरि ने हजीरा चौराहे के विस्तार व सौंदर्यीकरण तथा चार शहर का नाका से मलगढ़ा (ट्रिपल आईटीएम तिराहे तक) सड़क निर्माण कार्य में तेजी लाने पर भी विशेष जोर दिया।

भ्रमण के दौरान नगर निगम के अधीक्षण यंत्री श्री चतुर्वेदी एवं कार्यपालन यंत्री लोक निर्माण श्री ए आर सिंह व श्री ओमहरि शर्मा सहित शहर विकास से जुड़े अन्य अधिकारी कलेक्टर के साथ थे।

नगर निगम व पीडब्ल्यूडी मिलकर बनायेंगे चार शहर का नाका-मलगढ़ा सड़क

लगभग 1200 मीटर लम्बी चार शहर का नाका-मलगढ़ा रोड़ के प्रारंभिक 400 मीटर हिस्से का निर्माण पीडब्ल्यूडी डिवीजन नं.-2 द्वारा किया जाएगा। इस हिस्से में जल भराव की समस्या को ध्यान में रखकर यहाँ की सड़क सीमेन्ट कंक्रीटयुक्त बनाई जायेगी। सड़क फोरलेन होगी, जिसकी चौड़ाई दोनों ओर के तीन-तीन फीट के फुटपाथों सहित कुल 20 मीटर होगी। इस सड़क के शेष 800 मीटर भाग का निर्माण इसी चौड़ाई में नगर निगम द्वारा किया जाएगा। इस हिस्से की सड़क डामरयुक्त होगी।

रेसकोर्स रोड़ को दो माह में करें फोरलेन

रेसकोर्स रोड़ के निरीक्षण के दौरान कलेक्टर श्री पी नरहरि ने इस सड़क को फोरलेन में तब्दील करने का काम दो माह में पूर्ण करने के दिए निर्देश कार्य ऐजेन्सी को दिए। उन्होंने जनभागीदारी योजना से मंजूर हुईं गुढ़ीगुढ़ा नाका-शिवपुरी लिंक रोड़ सड़क का जायजा भी लिया। लोक निर्माण संभाग क्रं.-2 के कार्यपालन यंत्री श्री ओमहरि शर्मा ने जानकारी दी कि इस सड़क सहित इसी योजना से मंजूर हुई चंद्रबदनी नाका से नैनागिरी रोड़ का काम भी जल्द शुरू हो जाएगा। भ्रमण के दौरान कलेक्टर ने गोले का मंदिर चौराहा, कम्पू क्षेत्र सहित अन्य बाजारों का जायजा भी लिया।

विकास कार्यों में आई तेजी

शहर के विकास कार्यों को गति देने के लिये कलेक्टर श्री पी नरहरि द्वारा पिछले चार हफ्तों से शहर विकास से जुड़े अधिकारियों के साथ हर बुधवार को शहर भ्रमण किया जा रहा है। इसके काफी सकारात्मक परिणाम आए हैं। मसलन हजीरा चौराहे का विस्तार, आकाशवाणी तिराहे से सुरूचि होटल सड़क, चार शहर का नाका-जमाहर रोड़, माधौगंज से स्काउट कार्यालय के बगल से जीवाजी चौक सड़क सहित अन्य विकास कार्यों में उल्लेखनीय तेजी आई है।


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तीरंदाज,328,व्ही.एस.भुल्ले,523,
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Village Times: भले का मुंह काला,जादुई धंनाडुयों का बोल बाला.....?
भले का मुंह काला,जादुई धंनाडुयों का बोल बाला.....?
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