कुछ तो शर्म करों: दिल्ली सम्हलती नहीं,देश क्या सम्हालोगे

व्ही.एस.भुल्ले/ ये देश है,वीर जवानों का अल्वेलों का मस्तानों का गाना सुन कभी खून खोल भु'ााये दुश्मनों के खिलाफ भड़क जाती थी। मगर...

व्ही.एस.भुल्ले/ ये देश है,वीर जवानों का अल्वेलों का मस्तानों का गाना सुन कभी खून खोल भु'ााये दुश्मनों के खिलाफ भड़क जाती थी। मगर अब तो इस गाने के अर्थ ही बदले दिखाई देते है। ये अलग बात है। कि देश की युवा पीढ़ी का तो खून खोल रहा है। मगर दिल्ली में केन्द्र सरकार का खून खौलने तैयार नहीं अगर केन्द्र में बैठी सरकार का कहीं खून खोल रहा है।

तो निहत्थे देश के ब'चे ब"िायों पर जिन पर न्याय की मांग करने पर इंण्डिया गेट पर हमारे दिल्ली के जवान दुश्मनों की तरह लाठियां बरसाते रहे। वही हमारे भारत महान के ग्रह रा'य मंत्री,पुलिस,इलेक्ट्रॉनिक मीडिया प्रर्दशन कारियों की न्याय के लिए की जा रही क्रान्ति को कुचलने में असफल हो अपील करते है। कि प्रदर्शन में कुछ उपद्रवी तत्व घुस आये है। लेाग आन्दोलन प्रदर्शन छोड़ घर को लेाट जाये। अजीब है हमारी दिल्ली की जांबाज पुलिस जो कभी मेट्रो स्टेशन बन्द कराती है। तो कभी स्वयं और केन्द्र सरकार अपील करती है।

नहीं सुना तो सुन लेा नहीं देखा तो अखबारों को पढ़ लो जो मांग देश की युवा तरुड़ाई पुलिस के गैस गोले लठ्ठ खा कर इंण्डिया गेट या दिल्ली में विगत 4 दिनों से कर रही है। उस मांग पर कुछ तो करने का निर्देश सलाह मशविरे के बाद देश के कुछ प्रान्तों के मुख्यमंत्री कर चुके है।

जिसमें सबसे सार्थक फैसले म.प्र. और पंजाब के मुख्यमंत्री ने लिए है।  जब रा'य फैसल ले सकते है। तो केन्द्र सरकार में ऐसा कौन है। जो देश के युवाओं को भड़का देश में अराजकता फैलाना चाहता है। शर्म है। देश के ग्रह मंत्री लम्बी चौड़ी बैठक के बाद मीडिया के सामने कहते कि हम सख्त से सख्त कानून बनाने की कोशिश कर रहे वहीं यू.पी.ए. अध्यक्ष कांग्रेस महासचिव विपक्ष के नेता वख्त मांगते है देश से की कानून बनाने कुछ वख्त दे। आन्दोलन में शामिल लेागों पर  दंगा भड़काने की कार्यवाही के ऐलान, आखिर क्या संदेश देना चाहते है। देश वासियों को, जो सांसद एक दिन में टेबिल थपथपा अपने अनाप सनाप वेतन भžो बढ़ा लेते हो उन्हेें एक लाइन का कानून बनाने वख्त चाहिए। बड़े ही शर्म की बात है। वक्त मांगने वाले नहीं जानते तो सुन ले इस संचार क्रान्ति के दौर में हर देशवासी वाकिफ है। कि देश में क्या हो रहा है,या चल रहा है।

गैंग रैप जैसी सेक्स के लिए सामूहिक हिंसक घटना न तो हैवान,पशु पक्षी,जीव जन्तु,जानवर जैसे समाज में है। नहीं विक्षिप्तों के बीच, अगर इन्सानों मानव जाति के बीच है तो यह बहुत ही खतरनाक है। अक्ष्म्य है। जब हमारे देश में आदमखोर पागल जीव जन्तुओं को तत्काल मारने का कानून है।

तो फिर गिरफतारी के बाद ये 6 जिन्दा दरिन्दे आदमखोर उस पीडि़त लड़की की सरेयाम दिल्ली की सड़कों पर बस दौड़ाते इ"ात लूटने के बाद मौत के मुहाने तक पहुंचा जिन्दा क्यों है।

देश असम गोहाटी की सड़क पर भी सामूहिक ङ्क्षहसा एक लड़की के साथ करने वाले दरिन्दों को अभी भी नहीं भूला है। मगर दिल्ली की घटना ने तो हमें शर्मसार कर दिया है। हमें वीर जवान,बुजुर्गेा युवाओं को मुंह दिखाने लायक नहीं छोड़ा। माता बहिनों बेटियों की इ"ात बचाने जान देने या लेने वाले देश में क्या हो रहा है। उस पर सरकार सžाासीनों कि हास्यपद दलीले ही देश में आक्रोश का कारण है। हमें नहीं भूलना चाहिए कि इस तरह की घटना किसी भी समाज या राष्ट्र की किसी भी सžाा को निस्तनाबूत करने कॉफी है। इतिहास गवाह है। हमारे धर्म ग्रन्थ पवित्र रामायण,गीता में भरा पढ़ा है।

आज दिल्ली नहीं सम्हल रही कल सारा देश प्रदर्शन की राह पर चल निकला खासकर युवा वर्ग तो पूरा 121 करोड़ का देश कैसे सम्हलेगा। सžाा में बैठे लेागों को सौचना चाहिए।

जिस तरह से म.प्र.,पंजाब,छžाीसगढ़,महाराष्ट्र,हरियाणा,राजस्थान,झारखंड,दिल्ली के मुख्यमंत्रियों ने घोषणा की उनमें सबसे अधिक परिणाम उन्मुख घोषणा म.प्र. के मुख्यमंत्री व पंजाब के मुख्यमंत्री ने की है। जिन्होंने बलात्कार जैसे मामलों में जबाबदेही निर्धारित कर जल्द सजा दिलाने तक की समय सीमा तय की है। पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश बादल ने 24 घन्टे में दु़ष्कर्म  या महिला से जुड़े मामले आरोपी को हर हॉल में पकडऩे की बात कहीं है। नहीं तो पुलिस अधिकारी सस्पेन्ड।

वहीं म.प्र.के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि आरोपी  के विरुद्ध तत्काल कार्यवाही करने तक सीमित रहना ठीक नहीं,पुलिस अधिकारी को पुलिस अधीक्षक की देख रेख में जांच कर 15 दिन के अन्दर अदालत में चालान पेश करना होगा,ऐसे कैसेा में चिकित्सक को भी 24 घन्टे में जांच रिर्पोट देनी होगी। मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिये है। कि अगर लापरवाही बरती गई तो सीधे पुलिस कप्तान की जबावदेही होगा। हर जिले में फास्टट्रेक कोर्ट,महिला स्पेशल टास्क फोर्स,महिलाओं की रक्षा करने वालो को नगद 1 लाख 50 हजार रुपये का ईनाम,मार्शल प्रशिक्षण इत्यादि इत्यादि।

जब प्रदेशों की सरकारे इतना कुछ कर चुकी ऐसे में केन्द्र सरकार का अडिय़ल रुख कहीें से भी शोभा नहीं देता। जिस तेजी से देश के लेागों की सोच बढ़ रही है।

कम से कम देश उतनी तीव्रता से तो सोचे। नहीं तो ये प्रदर्शन तो केन्द्र सरकार,पुलिस या संवैधानिक संस्थाओं के लिए टेलर मात्र है। ऐसा ही रहा तो वो दिन दूर नहीें जब इस पवित्र पावन धरती पर हो सकता है। एक बार फिर से रामायण,गीता की कहानियाँ दौहराई जाये।

शहर के मुख्य मार्गों से बलात्कार की घटना के विरोध में निकाली रैली



दतिया। दिल्ली में हुऐ मासूम लड़की के साथ हुुए निंदनीय कृत्य के विरोध में जागो हिन्द युवा संगठन एवं स्वदेश ग्रामात्थान समिति दतिया के संयुक्त तत्वावधान में रैली एवं सभा के रूप में विरोध प्रदर्शन किया जिसमें करीव दो सैकडा से अधिक युवा सम्मिलित हुए। रैली राजघाट तिराहा से शुरू होकर राजगढ चौराहा मार्ग तिगैलिया टाउनहाल, किलाचौक, दारूगर की पुलिया शहर के मुख्य मार्गों से होते हुऐ गहोई वाटिका के सामने वाल्मीक मंदिर पर सभा के रूप में समाप्त हुई। सभा में उपस्थित युवाओं द्वारा ५ सूत्रीय ज्ञापन पर हस्ताक्षर कर शासन को सौंपने का प्रतिनिघि मण्डल द्वारा निर्णय लिया गया। रैली में सम्मिलित युवाओं ने बलात्कार के आरोपियों को फंासी देने की मांग के और महिला सशक्तिकरण के नारे लगाऐ। इस प्रकार की घटना जिले में घटित न हांे इस पर भी स्थानीय प्रशासन से चर्चा कर उचित कार्यवाही हेतु प्रयास करने के लिए सहमति बनीं। उक्त रैली का नेतृत्व युवा जिलाध्यक्ष दिनकर यादव एवं रामजीशरण राय ने संयुक्त रूप से किया।

रैली में अमरीश, पवन, रज्जन, शैलेन्द्र, नरेन्द्र कुशवाह, मुरली, मदन, महेन्द्र, दिवाकर, विशाल, नीरज, अमर, सुरेन्द्र, सागर, गौरव, रामजीशरण राय, अशोक शाक्य, भैरव दाँगी, अजय दाँगी, रामकुमार दुवे, जीतेन्द्र मिश्रा, वीरसिंह यादव, अंकुश दाँगी, आयुष राय, अभय दांगी, अरूण, पंकज, अंकित, शंशाक, पीयूष राय, मनीष, गोविन्द, संतोष, कमलेश, कैलाश, अनिरूद्ध, शामिल रहे।

इस घटना के विरोध में रैली एवं ज्ञापन सौंपने के आयोजन की जानकारी संगठन ने प्रशासन को एक दिन पूर्व ही दे दी थी। किंतु असंवेदनशील प्रशासन का कोई भी अधिकारी निर्धारित स्थल पर ज्ञापन लेने नहीं पहँुचे और प्रतिनिधि मण्डल  कलेक्ट्रेट में पहँुचा तो वहाँ भी ज्ञापन लेने के लिऐ कोई प्रशासनिक अधिकारी मौजूद नहीं थे। इस प्रकार का प्रशासन का व्यवहार निंदनीय है।

श्योपुर की सभा में जमकर गरजे सामाजिक कार्यकर्ता



श्योपुर। जो लोग आज के माहौल में अपनी मांओं-बहिनों, बीवियों और बेटियों की आबरू को सुरक्षित समझ रहे हैं उन्हें चकल्लस और तफरीह से फुर्सत नहीं है लेकिन जो वक्त की नजाकत को भांपते हुए सब कुछ दिल और दिमाग से महसूस कर रहे हैं उनके लिए अब उठ खड़े होने और हुंकार भरने का समय आ गया है। जरूरत इस बात की है कि मौजूदा दौर की विषम परिस्थितियों को मौन साधकर देखने के बजाय मुखर होकर विरोध दर्ज कराया जाए ताकि हठधर्मिता पर आमादा व्यवस्थाऐं और दमन पर उतारू तंत्र जनभावनाओं की ताकत को समझ पाए। बहुचर्चित दिल्ली घटनाक्रम के परिप्रेक्ष्य में जनचेतना और गैरत को ललकारने वाले उक्त विचार समाजसेवी पत्रकार प्रभात प्रणय ने विगत रविवार की सांध्यवेला में गांधी पार्क पर आयोजित सभा को सम्बोधित करते हुए व्यक्त किए। देश की राजधानी में घटित शर्मनाक घटनाक्रम और उसके खिलाफ उबाल पर आए जनमानस के दमन हेतु जारी सरकारी और पुलिसिया कोशिशों को बेशर्मी और बेरहमी का प्रतीक बताते हुए उन्होने कहा कि कानून आसमान से नहीं उतरे बल्कि इस धरती पर ही बनाए गए हैं जिनमें समय की मांग के साथ संशोधन किया जा सकता है और हर हालत में किया जाना चाहिए ताकि किसी की अस्मिता और देश की मर्यादा के साथ जघन्य खिलवाड़ ना हो सके। विभिन्न संगठनों से जुड़े अन्यान्य वक्ताओं ने भी इस मौके पर उक्त घटना की कटु निंदा करते हुए पकड़े गए अपराधियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी सजा, कानूनी प्रावधानों में संशोधन और इस तरह के अन्यान्य मामलों में त्वरित व निष्पक्ष न्याय की मांग उठाई। वक्ताओं में वरिष्ठ समाजसेवी तथा मानव मित्र कैलाश पाराशर, पतंजलि योग समिति के मण्डल प्रभारी अनिल सिंह, भारत स्वाभिमान के जिला संयोजक डॉ. सतीश शर्मा, जन अभियान परिषद के खण्ड समन्वयक महेश सिंह परिहार, जिला व्यापार महासंघ के पूर्व अध्यक्ष सूरजमल मंगल, युवजन सभा के जिलाध्यक्ष मदन सिंह भदौरिया, युवा नेता पुणेन्द्र सिंह सिकरवार, गायत्री परिवार के प्रतिनिधि चौथमल शर्मा, महात्मा गांधी सेवा आश्रम की प्रतिनिधि सुश्री राजकुमारी चौहान आदि के नाम विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं।

बालिकाओं का मार्च : नागरिकों की भागीदारी.....


इस सभा से पहले महात्मा गांधी सेवा आश्रम परिसर में संचालित कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय की छात्राओं ने एक मार्च निकालते हुए उक्त घटनाक्रम पर विरोध दर्ज कराया तथा दुष्कर्म के आरोपियों के लिए फांसी और पीडि़ता के लिए न्याय की आवाज बुलंद की। पाली रोड व जयस्तंभ के रास्ते गांधी चौक पहुंचे इस मार्च में विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों व गणमान्य नागरिकों ने अपनी भागीदारी दर्ज कराई तथा नगरी के विभिन्न मार्गों से गुजरते हुए राजधानी के माथे पर कलंक बनकर उभरी घटना सहित सरकार की दमनकारी नीतियों व पुलिसिया दरिन्दगी की खिलाफत नारों के साथ की। 

मार्च और सभा में पतंजलि योग समिति, भारत स्वाभिमान, महात्मा गांधी सेवा आश्रम, एकता परिषद, कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय, गायत्री परिवार, व्यक्तित्व विकास संगठन श्योपुर जेसीज, जन अभियान परिषद, नवांकुर संस्था जी.डी. पŽिलक सोसायटी, गणराज सेवा समिति सहित अन्यान्य संगठनों व संस्थाओं के प्रतिनिधियों व कार्यकर्ताओं की भागीदारी रही।

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तीरंदाज,328,व्ही.एस.भुल्ले,523,
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Village Times: कुछ तो शर्म करों: दिल्ली सम्हलती नहीं,देश क्या सम्हालोगे
कुछ तो शर्म करों: दिल्ली सम्हलती नहीं,देश क्या सम्हालोगे
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