जानवरों से बदतर होता इन्सान: हैवानियत की हद

म.प्र. ग्वालियर।  इस आक्रोश को में कहा से शुरु और कहा खत्म करु फिलहॉल समझ सें परे है। मगर मेरा सौभाग्य है। कि मैं उस क्षेत्र से हूं। जहां...

म.प्र. ग्वालियर। इस आक्रोश को में कहा से शुरु और कहा खत्म करु फिलहॉल समझ सें परे है। मगर मेरा सौभाग्य है। कि मैं उस क्षेत्र से हूं। जहां आन बान के लिए व्यक्ति कुछ भी कर गुजरता है।

खून का बदला खून यही चम्बल की रीत है। हो सकता है एक सभ्य समाज और राष्ट्र के लिए अब यह कहावत सामायिक न रही हो। मगर जिस तरह हमारे देश की राजधानी की सड़कों पर हमारी माताये बहिनों,बच्चियों की बड़ी ही दरिन्दगी के साथ इज्जत तार-तार हो रही हो जिस तरह से सेक्स को लेकर हैवानियत नंगा नाच कर रही हो किसी भी सभ्य राष्ट्र और समाज को डूब मरने वाली बात है मगर अवशोष की सत्ता में बैठे लेागों या इन दरिन्दों को इनके मुकाम तक पहुंचाने वालों की भुजाओं का खून नहीं खोलता। मुझे शर्म महसूस होती है। कि मेरा जन्म एक ऐसे देश में हुआ है। जहां नारी जाती का अपमान एक ऐसी हैवानियत,दरिन्दगी से होता है। जिसे देखना तो दूर सुनने भर से नजरे झुक जाती है।

कंलकित है। वो मां बाप,बहिने भाई जिन परिवारों की  कोख से ऐसे दरिन्दे जन्म लेते है या फिर ऐसे परिवारों में रहते है। जो मां,बहिनों,बेटियों की इज्जत से दरिन्दगी पूर्ण खिलवाड़ उनका कर्म होता है। ऐसे लेागों को सिर्फ मौत की सजा नहीं, बल्कि ऐसे लेागों को सरेराह सूली पर चढ़ा मौत के घाट उतार देना चाहिए।

जबाब दे अब वो मूर्धन्य विद्वान,आयोग सरकारे जो यह कहते नहीं थकते कि मौत की सजा नहीं होना चाहिए। या फिर ये लेाग देश को बताये कि किसी जीव या जानवरों द्वारा कभी ऐसा कृत्य किया हो। वहा तो न पुलिस है,न कानून न ही मूड़धन्य बिद्धवान जानवरों मे भी मादा जाति का सम्मान है। मेरे संज्ञान में कोई पागल भी नहीं जो वलात्कार जैसे आरोप क्या जानवरों और पागलों से शिकार हो भी गया बीता हो गया इन्सान। अगर भारत भू-भाग पर इन्सान के नाम ऐसा कोई हैवान,दरिन्दा या दरिन्दे है।

तो भारत के नागरिक की सूची से पहले उसका नाम काट फिर सरेयाम उसे सूली पर चढऩा चाहिए। अगर कानून नहीं है तो कानून बनाना चाहिए। चिन्ता,शौक,दुख व्यक्त करने वाले इन सत्तासीनों को। जो अपने वेतन भत्ते बढ़ाने 10 मिनिट में मैजे थपथपा प्रस्ताव पास कर लेते है। क्योकि भारत पहिचान विश्वमान चित्र पर आन,वान,शान और महिला सम्मान से है।

अगर के यह सब दिखाई सुनाई नहीं दे रहा तो वे कान खोल कर सुन ले इतिहास गबाह,व अपराध से परे ग्रन्थ गवाह है जिस देश या भू-भाग पर माता,बहिनों बेटियो की इज्जत असुरक्षित रही है। वहां जो भी शल्लनत,शासन रहा हो उसका नामों निशान तक मिट गया है तो ये सरकारे क्या चीज है। मत खेलो भाई इस आग से अगर इस आग की तीलियां यू ही लो पकड़ती रही। तो सत्तासीनों तुम भी सुरक्षित नहीं रह पाओगे। क्योकि बीमारी जो भी हो उसका पहला गुण बिस्तार ही होता है।

ये अलग बात है कि आज दरिन्दगी की शिकार गरीब मजलूम हो रही हो।

मगर भई देश की राजधानी में इस मर्तवा दरिन्दगी की शिकार डॉक्टरी की शिक्षा ले रही बदनसीब छात्रा हुई है। जो फिलहॉल अस्पताल में जिन्दगी मौत से संघर्ष कर रही है। दिल्ली की सड़कों पर दरिन्दगी का नंगा नांच ऐसा नहीं कि पहली बार हुआ हो। ऐसी कई और घटनाऐं पहले भी हो चुकी है। मगर सभ्य लेाग या फिर इन सत्ता सीनों मे शर्म कहा। जो इन दरिन्दों की दरिन्दगी और हैवानियत पर अंकुश लगा सके। अरे लानत है। ऐसे समाज और व्यवस्था पर जिसके लिए राज,पाठ, सत्ता और सरकारे बनी। ये अलग बात है,कि हर व्यक्ति पर  शौहरत,दौलतअसमान हो सकती है। मगर एक इज्जत ही तो है जो समान होती है। जिसके लिए हर व्यक्ति वह सब कुछ करता है। जो वह अपना अमूल्य जीवन भी दांव पर लगाकर करता है। मगर दुर्भाग्य कि सामूहिक बालात्कार जैसी घटनाऐ किसी गांव गली मोहल्ले मे नहीं देश की राजधानी कि सड़कों पर हो रही है।



स्वर्णिम विकास के लिए हस्तशिल्प जरूरी: विधायक राठौर



शिवपुरी  18 दिसम्बर। स्वर्णिम मध्य प्रदेश और समग्र विकास के लिए हाथों से बने सामग्री का उपयोग हमारे देश के ही लोग करें तो जरूर ही  हमारे देश विकास के लिए अग्रसर होगा। जिससे प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की मंशा पूरी होगी और स्वर्णिम मध्य प्रदेश जरूर बनेगा। उक्त उदगार शिवपुरी विधायक माखन लाल राठौर ने बीते रोज मानसभवन में क्राफ्ट प्रदशर्नी का शुभारंभ करते मुख्य अतिथि की आसंदी से व्यक्त किये। इस अवसर पर विशिष्ठ अतिथि के रूप में नपा अध्यक्ष श्रीमती रिशिका अनुराग अष्ठाना उपस्थित। सर्व प्रथम प्रदर्शनी के शुभारंभ अवसर पर फीता काटकर शुभारंभ किया। यह प्रदर्शनी विकास आयुक्त दिल्ली एवं महिला हैड़लूम हेण्डीक्राफ्ट विकास संस्था स्वर्गीय सतीश मेमोरियल शिक्षा समिति ग्वालियर के तत्वाधान में आयोजित की गई। इस प्रदर्शनी में चंदेरी साडिय़ां,ड्रेस मटेरियल, राजस्थानी मिर वर्क, 'वलैरी, जूट, वर्क, सोफ्ट टॉयज, मेटल, लेदर पर्स, कड़ाई का सामान, कपड़े के हार, बैग आदि 'वेलरी शिवपुरी, सोफे आदि कवर और साडिय़ों, लेदर की लेडीज चप्पलें, पेडी वेयर, क्राफ्ट वस्तु शिल्प, बुड कवरिंग आदि की करीब 14 दुकानें लगाई गई है। समिति सचिव आशा मगोन ने बताया कि इस प्रदर्शनी का उद्देश्य देश भर के शिल्पियों को एक बेहतर और अ'छा मार्केट उपलŽध कराना है जिससे वे अपनी कला का बेहतर प्रदर्शन कर सकें। प्रदर्शनी शुभारंभ अवसर पर नगर पालिका अध्यक्ष रिशिका अष्ठाना, भाजपा नेता अनुराग अष्ठाना सहित अन्य लोग उपस्थित थे।


खैरी के विरूद्व राष्ट्रीय कार्यवाही सुरक्षा अधिनियम के तहत् कार्यवाही


म.प्र. दतिया। कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी श्री जी.पी. कबीरपंथी द्वारा ग्राम सेरसा के आदेश के अनुसार खैरी गुर्जर पुत्र रामसहाय गुर्जर निवासी सेरसा थाना उनाव जिला दतिया म.प्र. को लोक व्यवस्था के अनुरक्षण के प्रतिकूल किसी भी रीति में कार्य करने से रोकने के अभिप्राय से उसको राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम १९८० की धारा-३ की उप धारा २ के अधीन निरूद्व करना आवश्यक है। अधिनियम की धारा-३ की उप धारा २ द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग में लाते हुए खैरी गुर्जर पुत्र रामसहाय गुर्जर निवासी सेरसा थाना उनाव जिला दतिया को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम १९८० की धारा-३ (२) के अधीन निरूद्व किया जाय तथा केन्द्रीय जेल जिला ग्वालियर में रखा जाये।

गेहॅू उर्पाजन वर्ष २०१३-१४ का पंजीयन १ जनवरी १३ से ३१ जनवरी २०१३ तक

प्राप्त जानकारी के अनुसार गेहॅू उर्पाजन वर्ष २०१३-१४ का पंजीयन १ जनवरी २०१३ से ३१ जनवरी २०१३ तक किया जायेगा। उर्पाजन केन्द्र पर पंजीयन के समय किसानों को बैंक खाता पासबुक, चालू वर्ष की खसरा नकल एवं अन्य दस्तावेजों के साथ किसान वही (भू-अधिकार ऋण पुस्तिका) लाना होगा। इस हेतु किसान के पंजीयन के समय ही भू-अधिकार ऋण पुस्तिका पर उर्पाजन केन्द्र के पंजीयन के प्रभारी की सील लगायेंगे। सील में उर्पाजन केन्द्र का नाम पूर्व से ही मुद्रित रहेगा। जिसमें किसान का पंजीयन क्रमांक, पंजीयन के उपरांत पंजीयन प्रभारी द्वारा हाथ से भरा जावेगा एवं उसमें हस्ताक्षर किये जावेंगे। किसानों के लिए प्रदेश स्तर पर खरीफ में हैल्प लाईन सेंटर रबी उर्पाजन के लिए भी कार्यरत रहेगा। किसानों से आग्रह है कि पटवारी एंव राजस्व अधिकारियों से सम्पर्क कर १ जनवरी से पूर्व पंजीयन हेतु वांछित दस्तावेज तैयार कर लें।



गसवानी के जंगल में: सशस्त्र बदमाशों ने ग्रामीणों पर बोला हमला


श्योपुर। जिले के गसवानी थाना क्षेत्रान्तर्गत जंगल में लकड़ी लेने गए दो ग्रामीणों को पांच हथियारबंद बदमाशों द्वारा घेराबंदी करते हुए बेहरमी से पीटने तथा रात भर बंधक बनाकर रखने का मामला सामने आया है। पता चला है कि बदमाशों के चंगुल में फंसे उक्त ग्रामीण अपनी जान बचाने के लिए 50 हजार रूपए की फिरौती देने के बाद ही छूटकर घर लौट पाए। 

घटना की सूचना मिलने के बाद अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक संजय सिंह के निर्देशन में गसवानी सहित आस-पास के थानों की पुलिस टीम बदमाशों की तलाश में जुट गई है, लेकिन उनका कोई सुराग समाचार लिखे जाने तक नहीं लग पाया है। दूसरी ओर इस घटना ने सम्बन्धित क्षेत्र में दहशत का माहौल बना दिया है। 

प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम सहसराम निवासी लखन पुत्र बाबूलाल धाकड़ व सन्तू धाकड़ जो रिश्ते में चाचा-भतीजे हैं बीते सोमवार को गांव से सटे जंगली इलाके में लकड़ी लेने के लिए गए हुए थे, जिन्हें अपराह्न तीन बजे के आसपास पांच अज्ञात बदमाशों ने घेर लिया, जिन्होने पहले तो उन्हें धमकाते हुए उनके साथ बेहरमी से मारपीट की और फिर फिरौती के लिए दवाब बनाते हुए दोनों को जान से मारने की धमकी देने लगे। 

भयभीत ग्रामीणों की मान-मनुहार से पसीजे बदमाशों ने रात के अंधेरे में लखन को बंधक बनाकर रखते हुए उसकी जान की सलामती का भय दिखाकर सन्तू को फिरौती की रकम लाने के लिए छोड़ दिया, जो दहशत के माहौल में गांव लौटा और जैसे-तैसे 50 हजार रूपए की व्यवस्था करके बदमाशों के पास ले गया। बताया गया है कि रकम हाथ लगने के बावजूद बदमाशों ने अतिरिक्त सतर्कता का परिचय देते हुए दोनों बंधकों को सूर्योदय के बाद छोड़ा और खुद जंगल में समा गए। 

माना जा रहा है कि बदमाशों की मंशा रात के अंधेरे में जंगल की ओर कूच करने के बजाय दिन के उजाले में सुरक्षित तरीके से भाग निकलने की रही होगी तथा उन्होने एहतियात के तौर पर बंधकों को पकड़े रखा ताकि वे गांव वालों या पुलिस को सूचना देकर उनके पकड़े जाने की वजह ना बन पाऐं। बंधक रहे ग्रामीणों की मानें तो पांच में से चार बदमाशों के पास बन्दूकें थीं, जबकि एक गंडासा लिए हुए था। बहरहाल, पुलिस द्वारा दावा किया गया है कि बदमाशों को जल्दी ही चिह्नित करते हुए दबोच लिया जाएगा।

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जानवरों से बदतर होता इन्सान: हैवानियत की हद
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