काऔ,काऔ-,सबको मिलेगा। काहे चिल्लातें हों

तीरंदाज/ व्ही.एस.भुल्ले/ भैया-क्या किसी फिल्म की स्क्रिप्ट लिख रहा है। या फिर चायना गेट की नकल कर रहा है। यह डायलॉक तो मारे सागर म.प्र. वाले तिवारी जी ने वर्षो पहले बोला है। मगर तने आज क्यों मुंह खोला है। आखिर मारे महान भारत में ऐसा क्या हो लिया जो तने खुल्लम खुल्ला डायलॉक बाजी पर उतारु है। क्या थारी भी हम गांव के गवई गबारों के लिए कोई नई स्क्रिप्ट या फिर नई फिल्म रिलीज होने वाली है। जो तू गांव गली प्रामोशन को निकला है।

भैये-तने तो बावला शै-कै थारे को मालूम कोणी गरीबों के साथ हाथ वालों का समुचे देश में नई Žलॉक बास्टर फिल्म व सीधे सबसिटी का प्रमोशन चल रहा है। विरेाधी फायनेन्सर कैम्प भी कहा चुप बैठने वाला था। सौ उसका भी कैम्पैन शुरु हो चुका है। ये अलग बात है। कि इस मर्तवा निर्माता कैम्प ने कलाकार संचालकों पर विश्वास न करते हुये फिल्म प्रमोंशन की कमान स्वयं सम्हाल रखी है। और 0 प्रतिशत Žयाज पर माता बहिनों को आर्थिक रुप से शासक्त बनाने पूरी की पूरी योजना बना रखी है। आखिर कै परिणाम हाबेगों  इस मलयुद्ध को।

भैया- मारे जैसे बुद्धिहीन के मगज में थारी ये गुण बात न आवे अब तो हर छड़ हमको मारे मौन मोहन की याद सतावे सुना है। मारे मौन मोहन की सरकार देश के 52 जिलों के दीन हीन गरीब ही नहीं,ठीक ठाक पोजिशन वाले लेागों को सीधे नगद देने वाली है। मैं तो बौल्यू भाया अपनी तो फोकट में ही चांदी कटने वाली है। थारी भावी को भी रोजगार हेतु राष्ट्रबादी 0 प्रतिशत पर नगद देने वाले है। वहीं गरीबों के साथ हाथ वाले भी थारी भावी के खाते में 0 प्रतिशत पर खाता खुला हजारों की रकम डालने वाले है। भाया मने तो पहले ही कहता था। भगवाढ़ है। आज नहीं तो कल इन भ्रष्टचारियों का मुंह अवश्य काला होगा। जैसे हम वर्षो सें पटे हॉल तरसे है। अब उनका भी यहीं हॉल होने वाला है। मगर इन प्रमोशनों के दौर में,मैं तो बस इतना कहना चाहुं भाया दोनेां ही फिल्म हिट होने वाली है।

अब इसमें किसकों कितने दर्शक नसीब होगें यह बात तो 2013 में नहीं 2014 के आम चुनावों में तय होगा। 2013 में फिल्म का टेलर हो सकता है। फिल्म तो 2014 में ही रिलीज होगी।

भैये-अगर फोकट में टेलर ही दिख जायें तों हर्ज क्या। गरीबों के हक पर मची वर्षो की लूट से दीन हीन गरीबों को कुछ मिल जाये तो हर्ज ही क्या...? मगर धन्य हो लिया मारे प्रदेश का मुखिया जिसके शासन के 7 वर्ष पूरा होने पर गांव किसान का बेटा होने के नाते प्रदेश के एक लीडिंग पेपर में इकलौता इन्टर व्यू छपा है। अगर म्हारे आडवाड़ी की माने तो मारा मुख्यमंत्री तो योजनायें बनाने में धन्य हो गया। तभी तो क्षिप्रा-नर्मदा जोडऩे केे शिलायन्स में पधारे आडवाणी कह गये कि भाजपा के अन्य मुख्यमंत्री भी शिवराज सिहं तरह योजनाऐं  क्यों नहीं बनाते।

अब तो मारे मुख्यमंत्री से मिल हमारे गांव के विकास वाले नई दिल्ली के मंत्री भाई रमेश ने भी कह दिया है। कि 100 करोड़ मनरेगा में तत्काल और आडिट रिर्पोट पश्चात से पूरे 450 करोड़ म.प्र. के 50 जिलों को देंगे। ये अलग बात है,कि हमारे प्रदेश सरकार ने प्रदेश के 51 हजार गांवों की 23 हजार पंचायतों की जल्द आडिट कराने की बात कहीं है। अर्थात सबकों मिलेगा।

भैया-मने समझ गिया गर सब कुछ ठीक ठाक रहा तो गरीब माध्ययम वर्गीय परिवार से लेकर सरकार तक को मिलेगा हर 3 जिलों के बीच लेाकपाल और सीधे नगद से भ्रष्टाचार का खात्मा हों भ्रष्टाचारियों की जमात का बैड़ा गरग होगा। बोल भैया कैसी रही कोई शक मारे मगज और इन्टेलीजेन्सी पर।


 बदमाशों की सक्रियता से संगीन अपराधों की बढ़ा ग्राफ


म.प्र. श्योपुर। प्रदेश के चम्बल संभाग सहित आसपास के जिलों में आतंक का पर्याय रह चुके गड़रिया गिरोह, गट्टा गिरोह व देवा गिरोह के खात्मे के बाद डकैतों के आतंक से पूरी तरह मुक्त माने जाने वाले श्योपुर जिले की अपनी सीमाओं में कहीं कोई नया गैंग तो वजूद नहीं पाने लगा है? बीहड़ों में जीने-मरने वाले दस्युओं की शैली में छुटपुट वारदातों को अंजाम देने वाले बदमाशों की कारगुजारियों से गाहे-बगाहे पीडि़त होते रहने वाले श्योपुर जिले में एक बार फिर से अपनी बादशाहत का परचम लहराने के मकसद से कोई नया गिरोह तो क्रियाशील नहीं हो गया है? यदि यह दोनों सवाल वाजिब नहीं हैं तो फिर वह बदमाश कौन थे, जिन्होने महज तीन दिनों के अन्तराल में श्योपुर, आवदा व कराहल थाना क्षेत्र में लूट-खसोट व चोरी की संगीन वारदातों को पूरी बेफिक्री के साथ अंजाम देने का साहस किया और कामयाब होकर आराम से चलते बने? यह कुछ ऐसे सवाल हैं जो विगत 20 व 21 नवम्बर को श्योपुर कोतवाली क्षेत्र के ग्राम सोईकलां में खेत पर पानी दे रहे किसानों के साथ रायफलों के जोर पर मारपीट और लूटपाट की दुस्साहसिक वारदात के बाद जनमानस में कुलबुलाने लगे हैं। वहीं आवदा थाना क्षेत्र के ग्राम बर्धा व कराहल थाना क्षेत्र के ग्राम पनार के जंगल में दिनदहाड़े महिलाओं के साथ लूट की सनसनीखेज वारदात को लेकर भी लोग जिले की कानून व्यवस्था पर कई तरह के सवालिया निशान खड़े कर रहे हैं। श्योपुर शहर के बड़ौदा रोड से भी उसी रात दस पहिया ट्रोले की चोरी की घटना भी इसी तारतम्य में पुलिस के लिए चुनौती का सबब बनी हुई है। उक्त घटनाओं को घटित हुए करीब एक पखवाड़े का समय बीतने जा रहा है लेकिन अंधेरे में हाथ-पैर मारने वाली पुलिस के हाथ किसी भी तरह की कोई सफलता नहीं लग सकी है। जिससे नागरिकों और ग्रामीणों में अनहोनी की आशंकाओं और भय का माहौल बना रहना स्वाभाविक ही है।

सिर उठाते रहे हैं गोलबंद बदमाश......
मुरैना, शिवपुरी, ग्वालियर तथा समीपस्थ राजस्थान के दस्यु प्रभावित सवाई माधोपुर, करौली जैसे जिलों की सीमाओं से बेहद नजदीकी श्योपुर जिले के वन तथा ग्राम बहुल अंचल में भले ही कोई बड़ा दस्यु गिरोह कभी सक्रिय नहीं रह पाया हो लेकिन छोटे-मोटे गिरोह बनाकर बड़ी वारदातों को अंजाम देने वाले बदमाशों का जिले में कभी भी अकाल नहीं रहा है। खिरकाइयों में मवेशियों की रेवड़ को चराने के लिए आने वाले पशु-पालकों से जबरन वसूली, थोक की तादाद में मवेशियों की चोरी, चरवाहों तथा ग्रामीणों से मारपीट तथा चेहरे पर ढाटे बांधकर ग्रामीण अंचल में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की कोशिशों सहित समय-समय पर वाहन सवारों और ग्रामीणों को लूटे जाने की घटनाऐं ऐसे प्रसंग हैं जो जिले में डकैती उद्योग की स्थापना का संकेत भले ही नहीं देते हों लेकिन कुटीर उद्योग जैसी स्थिति को जरूर प्रमाणित करते रहे हैैं।

कुचले भी जाते रहे हैं दस्यु गिरोह.......
प्रदेश के पड़ौसी जिलों के अलावा समीपस्थ राजस्थान की सीमाओं में पलने तथा आतंक की चादर को आस-पास के जिलों तक फैलाने वाले गिरोहों को जिले की पुलिस अपने दम पर अथवा अन्यान्य जिलों की पुलिस के साथ साझा मुहीम चलाकर निपटाती भी रही है। बीते हुए कुछ वर्षों में गेंगवार की घटना में गट्टा उर्फ राजेन्द्र की मौत के अलावा भूरा काछी, दशरथ खंगार, हल्के रावत, रमेश जाटव जैसे तकरीबन दर्जन भर मंझोले डकैतों का मुठभेड़ में मारा जाना भी इस बात को साबित करता है कि डकैतों ने जिले को अपनी शरणस्थली बनाने और पुलिस को चुनौती पेश करने का सिलसिला अनवरत जारी रखा है। यह बात अलग है कि पुलिस ने सिर उठाने वाले इस तरह के दस्यु गिरोहों को कुचलने में कामयाबी पाई है लेकिन गिरोहों की क्रियाशीलता का कार्यकाल पुलिस की कामयाबी से पहले लोगों के लिए भय तथा आतंक का पर्याय भी साबित होता रहा है, जिसमें पुलिस तंत्र की चूक के साथ-साथ जिले की भौगोलिक दशाओं का भी हाथ रहा है।

कहना आपका......
अपराधों की रोकथाम, अपराधियों की धरपकड़ और कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर पुलिस प्रशासन हमेशा मुस्तैद रहता है। पुलिस की मुस्तैदी का ही परिणाम है कि आज जिले में कोई भी संगठित गिरोह क्रियाशील नहीं बचा है। जहां तक जिले में सक्रिय बदमाशों के आतंक का सवाल है उसके खात्मे के लिए विशेष प्रयास जारी हंै। हाल ही में घटित घटनाओं में लिप्त आरोपियों को चिह्नित कर गिरफ्तार करने के लिए पुलिस पूरी प्रतिबद्धता के साथ जुटी हुई है तथा अ'छे परिणाम भी जल्दी ही सामने आऐंगे।

एम.एस. सिकरवार 
पुलिस अधीक्षक जिला-श्योपुर


तीन सड़कों की सौगात पर: भाजपा-कांग्रेस में घमासान जारी


श्योपुर।
आगामी वर्ष के अंतिम दौर में प्रस्तावित विधानसभा चुनाव की दस्तक सžाारूढ़ और भारतीय जनता पार्टी और विपक्ष में बैठी कांग्रेस सहित अन्यान्य दलों के नेताओं व कार्यकर्ताओं को सुनाई दे चुकी है। चुनावी वर्ष के आगाज से पहले भाजपा और कांग्रेस सहित सभी छोटे-बड़े दलों में सक्रियता नजर आने लगी है और इसी के साथ शुरू हो गया है.

आरोप-प्रत्यारोपों के साथ उपलŽिधयों और कामयाबियों को भुनाने और अपना बताने का सिलसिला जिसमें दोनों प्रमुख दल अग्रणी बने हुए हैं। आलम यह है कि आम मतदाताओं की मानसिकता को अपने पक्ष में प्रभावित करने के लिए जहां भाजपा प्रदेश सरकार की घोषणाओं, योजनाओं और कार्यक्रमों का प्रचार-प्रसार पूरे जोर-शोर से कर रही है वहीं कांग्रेस केन्द्र में बैठी अपनी सरकार की सौगातों के भाजपाईकरण का आरोप लगाते हुए प्रदेश सरकार की तमाम उपलŽिधयों पर पानी फेरने की कोशिश में जुट गई है। 

इसी का प्रमाण है श्योपुर जिले को तीन करोड़ रूपए से अधिक की लागत वाली तीन सड़कों की ताजा स्वीकृति, जिसका श्रेय हासिल करने को लेकर भाजपाइयों और कांग्रेसियों में पारम्परिक नूराकुश्ती बयानों और दावों के रूप में छिड़ गई है। ज्ञातव्य है कि हाल ही में श्योपुर विकासखण्ड के अंतर्गत बžाीसा क्षेत्र के सीमावर्ती ग्राम मकड़ावदा से लेकर राजस्थान की सीमा से सटे कालापट्टा, अंतर्रा'यीय श्योपुर-खातोली मार्ग पर स्थित ग्राम प्रेमसर से बिलवाड़ा तथा तहसील मुख्यालय बड़ौदा से ग्राम इन्द्रपुरा तक के मार्ग निर्माण हेतु स्वीकृति प्रदान की गई है और सड़कों की इस बहुप्रतीक्षित सौगात से सम्बद्ध ग्राम क्षेत्र के वाशिंदों में खुशी की लहर दौड़ी हुई है, जिसे अपनी पार्टी की देन बताने को लेकर भाजपा और कांग्रेस के महारथी कमर कसे नजर आ रहे हैं। 

भाजपा इन सौगातों को जहां क्षेत्रीय सांसद के तौर पर भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव नरेन्द्र सिंह तोमर के प्रयासों का परिणाम बता रही है, वहीं कांग्रेस के जिलाध्यक्ष तथा क्षेत्रीय विधायक बृजराज सिंह चौहान इसे अपनी उपलŽिध के रूप में गिना रहे हैं। कांगे्रस व भाजपा के बीच सौगातों को लेकर छिड़े इस जुबानी और कागजी घमासान से हाल-फिलहाल पूरी तरह से अप्रभावित नजर आती सम्बद्ध जनता को राहत सिर्फ इस बात की है कि उक्त सड़कों के निर्माण की स्वीकृति के बाद उनके लिए उक्त मार्गों पर आवागमन सुलभ हो जाएगा, फिर चाहे वह कांग्रेस की वजह से हो या भाजपा की वजह से।

श्योपुर-खातौली मार्ग पर दोनों मौन.....
मजे की बात तो यह है कि जहां हरेक छोटी-बड़ी उपलŽिध को अपनी पार्टी की सौगात बताने वाले भाजपा और कांग्रेस के नेता कथित विकासशीलता व जनहित की दुहाई देने में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं वहीं जिले के विकास हेतु लाजमी अंतर्रा'यीय महत्व वाले श्योपुर-खातोली मार्ग के कायाकल्प को लेकर दोनों दलों के महारथी मौन साधे बैठे हैं। 

गौरतलब है कि प्रदेश में भाजपा और केन्द्र में कांग्रेसनीत गठबंधन सरकार के नेताओं की टसल और अड़ंगेबाजी की वजह से उक्त मार्ग के उन्नयन और जीर्णाेद्धार पर ऐसा ग्रहण लगा हुआ है जो खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। कथित मंजूरी और उसे लेकर पीटे जाने वाले ढिंढोरों के माध्यम से भाजपा और कांग्रेस दोनों के दिग्गजों के लिए किरकिरी का सबब बन चुके श्योपुर-खातोली मार्ग को दुर्दशा के दंश से छुटकारा दिलाने की कामयाब पहल क्षेत्रीय सांसद अथवा विधायक द्वारा आज तक क्यों नहीं की गई है, इस सवाल का जवाब ना तो फूल पार्टी के अलमबरदारों के पास है और ना ही पंजा दल के कर्णधारों से देते बन पा रहा है। 

गौरतलब है कि श्योपुर-खातौली मार्ग के नवीनीकरण के नाम पर दोनों दलों द्वारा जमकर वाह-वाही लूटी जा चुकी है लेकिन सड़क की बदतर हालत आज भी नहीं सुधर पाई है, जिसका खामियाजा इस मार्ग से दिन-रात गुजरने वाले सैंकड़ों वाहनों और हजारों यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है।
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