सच से सामना: मनमोहन की मंत्रियों को नसीहत

व्ही.एस.भुल्ले/  यू.पी.ए. टू का सफल नेतृत्व करने में देश जुटे देश के प्रधानमंत्री जब भी  बोलते है। सच के नजदीक और सटीक बोलते है। अपने अन्ति...

व्ही.एस.भुल्ले/ यू.पी.ए. टू का सफल नेतृत्व करने में देश जुटे देश के प्रधानमंत्री जब भी  बोलते है। सच के नजदीक और सटीक बोलते है। अपने अन्तिम मंत्रीमण्डल विस्तार पश्चात लगभग 80 मंत्रियों की बैठक मे वरिष्ठ मंत्रियों को कनिष्ठ मंत्रियों को जबाबदेही और सभी को आरोपों से निडर हो कार्य करने की नसीहत दी है। और सफलता का फॉर्मूला सुझाते हुए यह भी स्पष्ट किया कि बेवजह के व्यान आपसी टकराव से बचे भ्रष्टाचार पर अंकुश व दूसरे मसलों पर आई.बी. से मंजूरी अवश्य ले। ये अलग बात है। कि सूचना अधिकार की सार्थकता बनी रहे। इस पर भी मनमोहन सरकार ने रोल बैक किया है जिसके पीछे सोनिया गांधी की भावना को माना जा रहा है। वे चाहती है कि सूचना का अधिकार यथावत बना रहे।

लगता है,यू.पी.ए. टू का ऐजन्डा साफ है। वर्तमान परिवेश में जिस रास्ते मनमोहन सरकार चल निकली है। उससे वह पलटने वाली नहीं उसी का परिणाम है। कि जब भ्रष्टाचार और शिष्टाचार को लेकर उनकी सरकार पर टीका टिपप्णी समुचे देश में चल रही हो ऐसे में अपनी सरकार के मंत्रियों को आरोपों से निडर हो कार्य करने की नसीहत कई सबाल खड़े  करती है।

किसी भी बड़े राजनैतिक दल की किसी भी लोकतंत्र में काम करने की विचार धारा अनुरुप स्वभाविक प्रक्रिया है। हर दल अपनी विचार धारा अनुरुप देश का विकास और लेागों के बीच समृद्धि लाना चाहता है। उसी रास्ते पर अपने सहयोगी दलों के सहारे कांग्रेस सरकार चलाने में जुटी है। जिसकी कीमत भी कांग्रेस चुकाने में लगी है। भ्रष्टाचार के आरोपों से सनी यू.पी.ए. की हकीकत जो भी हो मगर मलाई उड़ाने वाले छोटे छोटे दल कांग्रेस की तुलना में 'यादा पाक दामन साफ दिखाई पड़ते है। 

मगर स"ााई सबके सामने है। यू.पी.ए. टू के नेतृत्व की कीमत कांग्रेस को भले ही कुछ भी चुकानी पढ़ी हो। मगर कुछ हद तक वह अपने एजेन्डे अनुसार देश में नीतियां लागू करवाने में कामयाव अवश्य रही है। चाहे सूचना का अधिकार म.न.रे.गा. संचार क्षेत्र,ऊर्जा,कृषि,आर्थिक क्षेत्र रहे हो मगर कभी भारतीय समाज में आत्मसात हो चुके भ्रष्टाचार के मुद्दे पर टू जी स्पैक्ट्रम और ऑलम्पि का घोटालों पर कड़ी कार्यवाही के अलावा कुछ खास नहीं कर पायी जिसका मूूल कारण यू.पी.ए. सरकार में क्षेत्रीय दलों की भागीदारी,सरकार चलाने में रही है,जिससे के चलते कांगे्रेस का शोषण भी हुआ है। जहां तक अहम बिलों को पास करवाने जो रणनीति रही। उसने कांग्रेस नेतृत्व को अनचाहे ढंग से भ्रष्टाचार के दल-दल में धकेलने का कार्य किया।

यही चूक देश की आर्थिक नीतियों को लेकर रही। शायद सरकार आज भी यह मानकर चलती है। कि व्यवसायी ,उघोगपति समाज सेवा के लिए व्यवसाय उघोग चलाते है। जबकि दोनों ही क्षेत्रों की किसी भी देश में अलग विधा है। अगर ये कहे कि नदी के दो किनारे जो नदी के प्रवाह को आकार तो देते है। मगर उसके प्रवाह पर कोई प्रभाव नहीं डालते। मगर यू.पी.ए. सरकार का नेतृत्व एक किनारे को न बचा सका जिसके चलते नदी का प्रवाह तो धीमा हुआ ही अŽबल नदी-नदी में रहकर किसी छितरे तालाब में तŽदील हो अब बदबू मारने लगी है। जिसको लेकर आज कोहराम मचा है हर जगह भ्रष्टाचार और नष्ट हो चुके शिष्टाचार की चर्चा है।

अब कांग्रेस की य.पी.ए. सरकार सžाा चलाने की मजबूरी कहे। या फिर सžाा प्रेम। मगर हर गठबन्धन सरकार का नेतृत्व करने वाले दल की मजबूरी होती  है। और अपना आस्तित्व राजनीति में बढ़ाने या बनाये रखनेकी मजबूरी जिससे उसका भविष्य सुरक्षित बना रहे है। मगर कांग्रेेस की मजबूरी या बदकिस्मती यह रही कि केन्द्रीय पूल में न ही उनका कोई जनाधार जो नेताओं के नाम उनके पुत्रों को राजनैतिक बागडोर विरासत में मिली उनमें से देश की राजनीति में राहुल,और जयोतिरादित्य सिंधिया को छोड़ दे तो आधार बनाने का कार्य कोई नहीं कर पाया।

हो सकता है यू.पी.ए. वन और टू का नेतृत्व करते कांग्रेस ने इसी रणनीति पर कार्य किया हो कि जिन रा'रूों में उनका जनाधार खिसका है। केन्द्र की सžाा में रहते केन्द्र की सरकार की नीतियों के सहारे सबार  लिया जाये। मगर उन क्षेत्रों में चमत्कारिक नेतृत्व और पूर्व सžााधारी कांगे्रसियों ने अपने सžाा के दौरान केन्द्र में पूर्व सबन्धों के सहारे नये लेागों को स्वार्थो के चलते पनपते नही दिया। और परिणाम सामने है। केन्द्र सरकार के देश व देश बासियों के हित में लिए गये कहीं अहम निर्णय लागू नीति सूचना अधिकार मनरेगा बी.आर.जी.एफ.आवास योजना,गोदामीकरण व विधुत के लिए एटमी करार जैसे पास कराने क्षेत्रीय दलों के आगे झुकना पढ़ा।

उ.प्र. बिहार,और अब जिस तरह से हिमाचल और गुजरात में कांग्रेस को संघर्ष करना पढ़ रहा है। वह किसी से छिपा नहीं  मगर सब कुछ कांग्रेस आलाकमान स्वयं राहुल की मेहनत पर भी चन्द स्वार्थी बगैर जनाधार वाले नेताओं के चलते पानी फिर गया। इन्ही हॉलातों के संकेत म.प्र. या अन्य प्रदेशों में भी नजर आते है।

मगर देद ही सही दुरुस्त आये जिस तरह का निर्णय ले मनमोहन ने अपनी टीम को चेताया है। कि वह वगैर आरोपों से डरों  दो गुना रफतार से कार्य करे। ऐसा ही निर्णय अगर कांग्रेस आलाकमान स्वयं राहुल दिलचस्वी लेकर जिस तरह से उन्होंने मंत्री मण्डल विस्तार में दिखाई संगठन में भी ऐसे ही कड़े निर्णय ले मनमोहन की तरह साफ कर दे कि हर प्रदेश नेतृत्व और जिलाध्यक्षों को दे कि वह सिर्फ तर्क पूर्ण ढंग से केन्द्र की कंाग्रेस नेतृत्व वाली सरकार की नीतियां और स"ााई को सामने रखे। आरोपों की  परवाह की बगैर  दो। गुना रफतार से  कार्य करे बेवजह की व्यानबाजी,आपसी टकराव और गुटवाजी न करे। तभी कांग्रेस द्वारा गठबन्धन सरकार चलाने की  चुकाई कीमत की भरपाई की जा सकती है। वरना भविष्य सामने है। लेागों तो यहीं कहेंगे। अन्धों की बस्ती में शाही बारात किसने देखी।                                                                                                                                                                              

मण्डी आवक ने रिकार्ड तोड़ा,आय का आंकड़ा 1.60 करोड़ के पार


म.प्र.शिवपुरी। विगत 15 दिनों से बड़ी किसानों की आवक ने मण्डी समीति के आय क सभी रिकार्ड तोड़ते हुये 45 लाख रुपये का शुल्क संघ्रहित किया है। जो विगत वर्ष माह अक्टूबर की आय 36 लाख के विरुद्ध 9 लाख अधिक है। ज्ञात हो कि गत वर्ष अक्टूबर माह में मण्डी की आय सम्पूर्ण आय कृषि उपज आवक जल्द शुरु हो गई थी। मगर इस वर्ष आवक 15 अक्टूबर से श्ुरु हुई। और मात्र 15 रोज में ही कृषि मण्डी शिवपुरी का आकड़ा 45 लाख के पार हो गया। पिछले वर्ष अप्रैल से लेकर अक्टूबर तक आय जहां एक करोड़ 22 लाख थी जो बढ़कर इस वर्ष 1 करोड़ 60 लाख के पार हो गई। जो कुल आय का 30 प्रतिशत अधिक है।

मण्डी सचिव हरी शंकर दुबे का कहना है। कि माननीय भारसाधक महोदय के निर्देशन में हमने कड़ी मेहनत पश्चात यह उपलŽिध हासिल की है। इतना ही नहीं हमने किसानों की सुविधा की दृष्टि गत भोजन के कूपन एवं हममालों के लिए व हममालों के लिए भी विधि सम्बंध व्यवस्था बनाई गई है। लेागों के लिए शुद्ध पेयजल रोशनी की भी व्यवस्था उमदा की गई है। मण्डी में गंदगी की जो सबसेें बड़ी थी उसे हमने एक तरह से समूल नष्ट करने का प्रयास किया है। अभी तक तो हम अपनी व्यवस्था को लेकर संतुष्ट है। जरुरत पड़ी तो मण्डी अन्य व्यवस्थाऐं जुटाने में पीछे नहीं रहेगी। मुझे उम्मीद है। कि हमारे मण्डी कर्मचारी भाई इसी तरह की बेहतर व्यवस्था बनाये रखने में मुश्तेदी निभाते रहेगें। 


छोटी नहर के सीसीकरण में घपला: मापदण्डों की खिलाफत : शासन को लगा पलीता


म.प्र.श्योपुर। जिले में विकास और सुविधा विस्तार के नाम पर जारी निर्माण कार्य हों अथवा योजनाओं का क्रियान्वयन, सभी में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार की आशंकाऐं जताई जाती रही हैं जो समय के साथ स्व-प्रमाणित भी हुई हैं लेकिन शासन या प्रशासन के स्तर पर इस तरह के किसी भी घोटाले के खिलाफ एक भी सख्त कार्यवाही नजीर के तौर पर मौजूद नहीं है। 

आलम यह है कि राजनैतिक और प्रशासनिक संरक्षण में भ्रष्टाचार के पौधे बरगद बनकर फूलते-फलते रहे हैं और समूचा जिला एक चरागाह बनकर रह गया है। इसी श्रंखला का एक नया मामला बžाीसा क्षेत्र से सामने आया है जहां छोटी नहर के सीसीकरण की कवायद में नियम-विधानों और निर्धारित मापदण्डों को बला-ए-ताक रखते हुए जहां किसानों के हितों के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है वहीं शासन के कोष को भी लाखों का चूना लगाया जा रहा है जो कार्य की समाप्ति तक लाखों की परिधि से निकलकर करोड़ों में पहुंच जाएगा।

जिम्मेदार अधिकारी मुंह में गुड़ डालकर आंखें मूंदे बैठे हुए हैं और उनके मौन समर्थन के बलबूते सम्बन्धित ठेकेदार द्वारा लाखों रूपए की मद को पानी में बहाने की तैयारी पूरी की जा रही है। निर्माण के क्षेत्र में जानकार सूत्रों से मिली जानकारियों के अनुसार जल संसाधन विभाग के अन्तर्गत आने वाले बड़ौदा उपखण्ड में छोटी नहरों के सीसीकरण का कार्य तकरीबन 10 करोड़ रूपए की लागत से प्रस्तावित है जिनमें से 1 एल और 5 एल पर कार्य की शुरूआत भी हो चुकी है। बताया जाता है कि उक्त निर्माण कार्य में अधिक से अधिक मुनाफाखोरी के लिए गुणवžाा को जरा भी तरजीह नहीं दी जा रही है नतीजतन सीसीकरण की मिट्टी पलीद हो जाना पूरी तरह से तय माना जा रहा है। 

सूत्रों की मानें तो उक्त शाखाओं के सीसीकरण में नियत व मानक सामग्री का उपयोग न करते हुए गुणवžााहीन, दोयम दर्जे की अमानक सामग्री का उपयोग कम मात्रा में किया जा रहा है जिससे काम का टिकाऊपन मुमकिन नहीं है। गड़बडिय़ों का प्रमाण कार्य के शुरूआती दौर में उक्त शाखाओं में मिलने भी लगा है जहां पानी के अभाव में कराई गई सीसी में जगह-जगह दरारें झांकने लगी हंै। कार्य में लापरवाही और भ्रष्टाचार की शिकायतों पर पुष्टि की मोहर जानकार सूत्रों के साथ-साथ 1 एल से सम्बद्ध जल उपभोक्ता संस्था के अध्यक्ष राधेश्याम मीणा तथा 5 एल से सम्बद्ध संस्था के अध्यक्ष रामदयाल मीणा ने भी यह कहते हुए लगा दी है कि नहर की उक्त दोनों शाखाओं में न केवल घटिया सामग्री का उपयोग किया जा रहा है बल्कि निर्माण प्रक्रिया में भी नियमों की ध"िायां उड़ाई जा रही हैं। अध्यक्षद्वय ने आरोप लगाया है कि इस कार्य में संलग्र ठेकेदार विभागीय अधिकारियों के साथ सांठ-गांठ कर चुके हैं लिहाजा दिल खोलकर घटिया कार्य करा रहे हैं। 

उल्लेखनीय है कि समीपस्थ प्रांत राजस्थान स्थित कोटा बैराज से निकलकर मध्यप्रदेश के चंबल संभाग में आने वाले श्योपुर, मुरैना और भिण्ड जिले के हजारों किसानों की लाखों एकड़ जमीन को सिंचित करने वाली चम्बल दाहिनी मुख्य नहर के सुदृढ़ीकरण की कवायद लगभग 400 करोड़ रूपए की लागत से जारी है तथा इसी क्रम में चम्बल दाहिनी मुख्य नहर से निकलने वाली छोटी नहरों में पानी की बर्बादी रोकने के उद्देश्य से रा'य शासन द्वारा सीसीकरण के लिए करोड़ों रूपए का बजट जारी किया गया है। विडम्बना की बात यह है कि जहां चम्बल दाहिनी मुख्य नहर में कराए जा रहे सुदृढ़ीकरण कार्य की गुणवžाा और विश्वसनीयता पर अपनी जगह सवालिया निशान लगते आ रहे हैं वहीं उसकी शाखाओं के सीसीकरण का कार्य भी ईमानदारी से नहीं हो पा रहा है।

ऊपर तक शिकायत का दावा.....


चम्बल नहर की 1 और 5 एल शाखाओं सहित अन्य छोटी नहरों के घटिया सीसीकरण पर सख्त नाराजगी जताते हुए जल उपभोक्ता संस्था संगठन ने ऊपर तक आवाज पहुंचाए जाने की प्रतिबद्धता जताई है। बताया गया है कि उक्त घटिया कार्यो की असलियत से वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराने की मांग के साथ दोषी अधिकारियों व ठेकेदार के खिलाफ कार्यवाही तय कराने के लिए जल संसाधन विभाग के प्रमुख सचिव राधेश्याम जुलानिया को एक ज्ञापन विगत दिनों प्रेषित किया जा चुका है जिसकी प्रतिलिपियां जिलाधीश, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत तथा कार्यपालन यंत्री जल संसाधन विभाग को भी प्रेषित की गई हैं। संगठन ने किसी भी स्तर पर कार्यवाही की सुगबुगाहट न पाते हुए अपनी शिकायतों को उ"ा स्तर तक पहुंचाने का मानस बनाया है। अब देखना यह है कि खुले भ्रष्टाचार के इस मामले में शासन क्या रूख अपनाता है?

आपका कहना है.....

चम्बल दाहिनी मुख्य नहर का पानी संभाग के भिण्ड और मुरैना सहित श्योपुर जिले के किसानों के लिए अमृत की तरह है जिसे किसी भी सूरत में में बेकार नहीं जाने दिया जाएगा। शासन द्वारा इसी अनमोल पानी की बर्बादी को रोकने की मंशा से नहरों को पक्का कराया जा रहा है, लेकिन इस कार्य में होने वाला भ्रष्टाचार शासन की मंशा को पलीता लगा रहा है। शासन-प्रशासन के अधिकारियों ने इस बारे में जल्दी ही ध्यान नहीं दिया तो संगठन आन्दोलन पर बाध्य होगा।

सुग्रीव मीणा
अध्यक्ष
जल उपभोक्ता संस्था संगठन

* नहर की शाखाओं के सीसीकरण के कार्य में गुणवžाा का ध्यान नहीं रखे जाने तथा मापदण्डों की अवहेलना किए जाने की शिकायतें मिली हंै, जिन्हें विभाग पूरी गंभीरता से ले रहा है। जल्दी ही प्राप्त हुई शिकायतों के आधार पर कार्य की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और शिकायत सही पाए जाने पर सर्वसम्बन्धितों के विरूद्ध नियमानुसार उचित कार्यवाही की भी जाएगी।

राकेश अग्रवाल

कार्यपालन यंत्री

जल संसाधन विभाग-श्योपुर

पुरानी रंजिश बनी हत्या की वजह: लापता युवक के तीन हत्यारोपी किए गए चिह्नित


म.प्र.श्योपुर। जिलान्तर्गत बरगवां पुलिस को तकरीबन दस दिन पहले एक महिला द्वारा लाकर सौंपे गए नरकंकाल की गुत्थी को डी.एन.ए. टेस्ट की मदद से पुलिस द्वारा न केवल सुलझा लिया गया है वरन् इस मामले में तीन आरोपियों को भी चिह्नित कर लिया गया है, जिनके विरूद्ध हत्या का मामला कायम कर दिया गया है। पुलिस की जांच के दौरान यह निष्कर्ष सामने आया है कि उक्त नरकंकाल एक युवक का है जिसकी हत्या उसके अपने गांव के ही तीन लोगों ने धारदार हथियार से जानलेवा हमला बोलते हुए की थी। ज्ञातव्य है कि विगत 22 अक्टूबर को कल्याणी बाई (40 साल) निवासी मदनपुर एक नरकंकाल लेकर बरगवां थाने पहुंची थी, जिसने उक्त नरकंकाल को लगभग 20 दिनों से गायब अपने पति मुन्ना आदिवासी का बताया था। इस मामले में महिला की आत्मविश्वास भरी आशंका को पूरी-पूरी तरजीह देते हुए बरगवां पुलिस ने नरकंकाल की हड्डियों को डीएनए टेस्ट के लिए ग्वालियर भेजते हुए दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 174 के तहत मर्ग प्रकरण कायम कर विवेचना में ले लिया था। इसके बाद टेस्ट रिपोर्ट में नरकंकाल की शिनाख्त मुन्ना आदिवासी के रूप में होने के बाद बरगवां पुलिस ने थाना प्रभारी माता प्रसाद विमल के नेतृत्व में अपनी विवेचना को और गति दी तथा मुन्ना के तीन हत्यारोपियों को चिह्नित कर लिया। प्रकरण का खुलासा करते हुए थाना प्रभारी बरगवां श्री विमल ने बताया है कि मुन्ना आदिवासी की हत्या रामहेत पुत्र फाबू आदिवासी, घनश्याम पुत्र रामहेत आदिवासी और रमले पुत्र बगीता आदिवासी निवासी-मदनपुर ने की थी , जिनके खिलाफ भारतीय दण्ड विधान की धारा 302, 201 के तहत मामला कायम कर लिया गया है तथा तीनों आरोपियों की सरगर्मी से तलाश की जा रही है। उन्होने भरोसा दिलाया है कि आरोपियों को जल्दी ही दबोच लिया जाएगा।

शक और दहशत के बदले मिली मौत....


थाना प्रभारी माता प्रसाद विमल द्वारा विवेचना के दौरान सामने आए तथ्यों के बारे में जो जानकारी दी गई है उनके मुताबिक संदेह के आधार पर उग्र होकर दहशत फैलाना मुन्ना की मौत की वजह बना। बताया गया है कि मुन्ना आदिवासी का बेटा जीतू कुछ समय पहले किसी रिश्तेदारी में गया था, जहां उसकी बाइक एक पेड़ से टकरा जाने से उसकी मौत हो गई थी। 

इस घटना को एक हादसा मानने के बजाय मुन्ना को शक था कि उसके बेटे की हत्या उसके ही गांव के रामहेत, घनश्याम और रमले ने धोखे से कुछ खिलाकर की है। इसी शक की बिना पर मुन्ना उक्त तीनों से बदला लेने की ताक में बना हुआ था। मुन्ना के घातक इरादों के चलते दोनों परिवारों के बीच बार झड़प भी हो चुकी थी तथा दिन-रात शराबखोरी व उपद्रव के आदी मुन्ना के खटके से परेशान होकर उक्त तीनों आरोपियों ने उसे ठिकाने लगाने का इरादा कर लिया। 

इसके बाद तयशुदा योजनानुसार आरोपियों ने खेत से घर आते मुन्ना को रास्ते में रोक लिया और कुल्हाड़ी सहित अन्य धारदार हथियारों से उसकी हत्या करने के बाद शव को निर्वस्त्र कर झाडिय़ों में छुपा दिया। देवयोग से इस घटना को गांव के ही कुछ लोगों ने देख लिया, जो पुलिस के लिए विवेचना के दौरान मददगार साबित हुए। बताया गया है कि मुन्ना व आरोपियों के बीच किसी जमीन को लेकर भी रंजिश चली आ रही थी। विडम्बना की बात तो यह है कि उक्त प्रकरण में चिह्नित एक आरोपी घनश्याम मृतक मुन्ना के साले का ही पुत्र है।

महिला काँग्रेस अध्यक्ष श्रीमती राजे आज पहुंचेंगी दिल्ली


ण्दतिया। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी के आव्हान पर 4 नवम्बर 2012 को नई दिल्ली के रामलीला मैदान में राष्ट्रीय स्तर की एक विशाल आमसभा रखी गयी है। केन्द्र सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी आमजन तक पहुंचाने हेतु उक्त रैली रखी गई है। श्रीमती अर्चना जायसवाल प्रदेश अध्यक्ष महिला कांग्रेस के दिशा निर्देशानुसार दतिया से श्रीमती परिणीता राजे जिलाध्यक्ष महिला कांग्रेस 4 नवम्बर को भारी महिलाओं के साथ दलबल से दिल्ली पहुंचेंगी। समस्त  पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं से अनुरोध है कि अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर आयोजन को सफल बनाएं।

जगह-जगह खुले आम बिक रहा है पेट्रोल कभी भी हो सकता है गम्भीर हादसा


भाण्डेर- नगरीय क्षेत्र में इन दिनों खुले आम पेट्रोल की बिक्री का कारोबार धड़ल्ले से बेखौफ होंकर चल रहा है। वहीं पुलिस की मिली भगत से चल रहें इस अवेध कारोबार पर स्थानीय प्रशासन चुप्पी साधे हुये यह तमाशा अपनी आॅखो से देख रहा है। पेट्रोल के इस गोरख धंधे से कुछ वर्ष पहले एक गम्भीर हादसा घटित हो चुका है। इस हादसे में एक व्यक्ति की जान भी चली गई थी। क्योंकि वह अपनी दुकान में पेट्रोल नापते समय आग भड़कने से उक्त घटना घटित हुई थी। इस घटना के बाद जरूर कुछ समय के लिये यह गोरख धंधा बंद हो गया था

परन्तु फिर से भाण्डेर नगर में अवैध पेट्रोल का कारोबार जगह-जगह चल रहा है। क्षेत्र के सबसे व्यस्तम बाजार रामदयाल की पुलिया से लेकर खटिकयाने तक की पुलिया तक पसरटो की दुकान से लेकर जनरल स्टोरो तक एवं चाहे पंचर जोड़ने वाली दुकान हो या फिर मोटरसाईकिलों की मरम्मत की दुकान हो जगह-जगह एक केन में पेट्रोल रखकर अवैघ तरीके से ओने पोने दामों में बेचा जा रहा है। 

भाण्डेर नगर में भाण्डेर चिरगाॅव मार्ग पर संकट मोचन मंदिर के सामने मोटरसाईकिल की मरम्मत की दुकान, भाण्डेर दतिया चैराहे पर व एस. डी. ओ. पी. कार्यालय के सामने लहार मार्ग पर भाण्डेर सरसई रोड पर यह लांेग या तो नगर पंचायत की दुकानों व कुछ अपनी गुमठियो में यह कारोबार संचालित कर रहें है। यही हाल आस-पास के ग्रामीण इलाकों का है। यहाॅ पर रोड किनारे पेट्रोल का अवैध बिक्री कारोबार चरम सीमा पर पहुच गया है।इन पेट्रोल बेचने बालों को यह नही पता कि खुले में पेट्रोल रखकर बेचने से कितनी हानि होती है और कभी कोई गम्भीर हादसा भी हो सकता है। परन्तु स्थानीय प्रशासन इस और ध्यान नही दे रहा है। जिससे यहाॅपर पेट्रोल की बिक्री जगह-जगह हो रही है।  

इनका कहना है कि जगह-जगह जो अवैध पेट्रोल विक्रेता पेट्रोल बेंच रहे है उन विक्रेताओ पर पुलिस प्रशासन द्वारा छापा मार कर एक वैधानिक कार्यवाही की जायेगी।

जी.एस.तोमर

ए.एस.आई थाना प्रभारी भाण्डेर

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तीरंदाज,328,व्ही.एस.भुल्ले,523,
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Village Times: सच से सामना: मनमोहन की मंत्रियों को नसीहत
सच से सामना: मनमोहन की मंत्रियों को नसीहत
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