म.प्र. मनेरगा में, गड़बलझाला,जांच CBI को सौपने के संकेत

म.प्र.ग्वालियर। यू तों मनरेगा में आवंटन न मिलने को लेकर जनपद सी.ईओ. एसोसियेसन काम बन्द करने की धुड़की दे। केन्द्र से कुछ राशि हासिल कर...


म.प्र.ग्वालियर। यू तों मनरेगा में आवंटन न मिलने को लेकर जनपद सी.ईओ. एसोसियेसन काम बन्द करने की धुड़की दे। केन्द्र से कुछ राशि हासिल करने में सफल रही। वही केन्द्रीय मंत्री जयराम रमेश पहले ही मनरेगा की राशि और किस्त को लेकर रा'य सरकार को कठघरे में खड़ा कर चुके है उन्होंने स्पष्ट कहा था कि इस योजना में मैनेजमेंट इन्फॉर्मेशन (एम.आई.एस.)के तहत एंट्री नहीं हो रही है।



वहीं राशि का उपयोगिता पत्र भी नहीं दिया जा रहा वही केन्द्र ने मनरेगा में जो 54 शिकायते चिन्हित की है उन पर भी रा'य सरकार ने कोई कार्यवाही नहीं कि वहीं सूत्रों की माने तो माननीय सुप्रीमकोर्ट ने भी उड़ीसा ,उžार प्रदेश के बाद अब म.प्र. मनरेगा में हुई गड़बडिय़ों की जांच सी.बी.आई को सौपने के  संकेत दिये है। हालाकि केन्द्र सरकार ने मनरेगा की मैदानी हकीकत जानने साख्यकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय के राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण संगठन से म.प्र. के 304 गांवों में सर्वे भी कराया है। जिसमें लाभान्वित परिवार संख्या,मानव दिवस संख्या,भुगतान की स्थति,मनरेगा क प्रति जागरुकता भागीदारी इत्यादि बिन्दु प्रमुख रहे।

देखा जाये तो भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारन्टी अब महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारन्टी 2005 अधिनियम पारित किया। जिसके तहत म.प्र. में भी मनरेगा का सृजन किया। जिसका मूल उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्र में निवास करने वाले प्रत्येक परिवार का वह व्यस्क सदस्य जो अकुशल श्रमिक है। और मजदूरी करने का इन्छुक आजीविका की सुरक्षा बढ़ानें प्रत्येक विžाीय वर्ष में 100 दिन का रेाजगार उपलŽध कराना था। जिससे ग्रामीण क्षेत्र के अकुशल श्रमिकों (मजदूरों) की आर्थिक स्थति मजबूत,गरीबी उन्मूलन रोजगार के लिए पलायन करने वाले पलायन न करे साथ ही स्थानीय स्तर पर सम्मान जनक जीवन जी सके। और ग्रामीण क्षेत्रों में स्थाई परिसम्पžिायों का सृजन हो सके इस योजना के तहत इतना ही नहीं अगर एक परिवार में अधिक व्यस्क है। और उनकी आयु 18 से अधिक नहीं है। तो वह भी 100 दिन का रोजगार पाने के पात्र होगें। मनरेगा अधिनियम में यह भी प्रावधान था कि श्रमिक द्वारा मांग की गई तारीख से 15 दिन के अन्दर उसे मजदूरी नहीं दी गई तो वह बेरोजगारी भžाा प्राप्त करने के लिए पात्र होगा।

योजना क्रियान्वयन में भी स्पष्ट निर्देश थे कि योजना आरम्भ के समय जिले का पर्सपेक्टिव प्लान से कार्य कराये जाये जिसमें ग्रामसभा की अनुसंशा पर ग्राम पंचायत कार्ययोजना तैयार कर जनपद को भेजेगी और जनपद स्तर पर जनपद सी.ई.ओ. जनपद के अनुमोदन पश्चात जिला पंचायत को भेजेगी वह जिला पंचायत जनपद बार योजनाओं के अनुमोदित करेगी।

इस योजना के तहत जल सरंक्षण एवं सबर्धन वृक्षारोपण,नहरे,लघु माध्ययम सिंचाई कार्य भूमि सुधार, इन्दिरा आवास,परम्परागत जल संरचनाओं का पुनरुद्वार तालाब सफाई भूमि विकास, बाढ़ नियंत्रण,12 मासी सड़कें इत्यादि कार्यो का उल्लेख किया गया था। जिन पर प्रदेश भर में विगत वर्षो में हजारों करोड़ रुपये खर्च कर अकुशल मजदूरों को रेाजगार मुहैया कराया गया।

मगर खर्च हिसाब किताब और राशि मुहैया कराने को लेकर जिस तरह की तलवारे केन्द्र और रा'य सरकार के बीच खिची है। वह काबिले गौर है। जिसके चलते केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने स्पष्ट किया है। कि वह हर वर्ष 1 लाख करोड़ ग्रामीण विकास पर खर्च करते है। इसलिये लेागों को यह जानने का हक है। कि वह पैसा कहां खर्च हो रहा है। इसलिये अब इस मंत्रालय के हर काम का ऑडिट नियंत्रक एवं महालेखा (कैग) से कराने का निर्णय लिया गया है।

फिलहॉल जिस तरह के आरोप प्रत्यारोप म.प्र. मनरेगा को लेेकर चल रहे। उसे देखते हुये अगर म.प्र. के शिवपुरी जिले की चर्चा की जाये जहां आय दिन गड़बडिय़ों की शिकायते और चर्चायें आम है। सच क्या है? ये तो केन्द्र व रा'य सरकारें ही जाने मगर सूत्रों की माने तो म.प्र. के शिवपुरी जिले में 2 फरवरी 2006 से लेकर सितम्बर 2012 तक रोजगार उपलŽध कराने गरीबी हटाने,सम्मान जनक जीवन जीने श्रमिकों का पलायन रेाकने और स्थाई परिसंम्पžिायों बढ़ाने पर साढ़े पांच अरब रुपये खर्च किये जा चुके है। जबकि योजना प्रारंभ 2 फरवरी 2006 को कुल पंजीकृत परिवारों की 2,67,158 थी जबकि वर्ष 2006-07 में रोजगार मांग करने और मजदूरी पाने वाले श्रमिक परिवारों की संख्या 1,29,189 थी तथा आवेदकों की संख्या 222296 थी, जिन पर 78 करोड़ से अधिक की राशि व्यय हुई। वहीं वर्ष 2007-8 में 1,70,450 श्रमिक परिवारों के 293147 आवेदकों पर 121 करोड़ से अधिक तथा वर्ष 2008-9 में 1,51,749 श्रमिक परिवारों के 2,57,973 आवेदकों को रोजगार मुहैया कराने 130 करोड़  से अधिक और वर्ष 2009-10 में 1,84,534 आवेदकों को मजदूरी मुहैया कराने 81 करोड़ की राशि खर्च की गयी। वर्ष 2010-11 में 71 करोड़ से अधिक वर्ष 2011-12 में 62 करोड़ से अधिक तथा वित वर्ष 2012-13 में सितम्बर माह तक 25 करोड़ से अधिक की राशि व्यय की जा चुकी है। जबकि सितम्बर 2012 में जॉव कार्ड परिवारों की संख्या 183501 है।

ज्ञात हो कि इस जिले में रोजगार गांरटी से पहले भी जिले में वर्ष 1996 से 1999 तक बड़े पैमाने पर कूप क"ाी सड़क,स्टॉप डेम,उदवहन सिंचाई,राष्ट्रीय जलग्रहण मिशन,तालाब बचाओं,पानी रोकों अभियान,जलाअभिषेक अभियान इत्यादि क तहत फरवरी 2006 से पूर्व हजारों स्थाई परिसंपžिायों भी सेकड़ों करोड़ रुपये खर्चा किया गया। उस पर से राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारन्टी अब मनरेगा पर साढ़े पांच अरब का खर्च कितनी संरचनाओं स्थाई परिसम्पžिायों। और लेागों की गरीबी दूर कर अनका पलायन रोक सम्मान जनक जीवन मुहैया करा पाया फिलहॉल भविष्य के गर्भ में है। मगर इतना तो तय है कि अगर वर्ष 2006 में कुल पंजीकृत जॉव कार्ड धारी गरीब परिवार 2,67,158 जिनकी अब वर्ष 2012-13 में संख्या मात्र 183501 है अब यहां एक ही यक्ष प्रश्र बचता है। 2,67,158 जॉव कार्ड धारी गरीबों में से 83,657 परिवारों की या तो गरीबी दूर हो गई या फिर वह जिले से पलायन कर गये। अगर 83,657 परिवार का जीवन स्तर सम्पन्न हुआ तो जिले को पुरुषकार मिलना चाहिए। अगर मजदूरों परिवारों ने पलायन किया है। तो सजा आखिर कहां गये 83657 परिवार जो 2006 में गरीब जॉव कार्ड धारी थे। यह चर्चा समुचे जिले में आम है।

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तीरंदाज,328,व्ही.एस.भुल्ले,523,
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Village Times: म.प्र. मनेरगा में, गड़बलझाला,जांच CBI को सौपने के संकेत
म.प्र. मनेरगा में, गड़बलझाला,जांच CBI को सौपने के संकेत
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