एक वर्ष बाद कुपोषितों की सुध

खबर का असर/ ग्वालियर म.प्र. शिवपुरी-श्योपुर के विकासखण्ड क्रमश: पोहरी,कराहल में गत वर्ष बारिस के दौरान और पश्चात बच्चों की आज्ञात बीमारियों से मौत का सिलासिला चल ही रहा था व अखबारों में भी ब'चों की मौत सुर्खिया बन शासन और सरकार की व्यवस्था पर प्रश्र चिन्ह लगा सबाल दाग ही रहे थे कि उसी दौरान राष्ट्रीय बाल आयोग की और से भी दौरा करना व यथा स्थति से अवगत होने दिल्ली से दल भी आया।
हॉलाकि दल ने मौजूद व्यवस्था पर सन्तोष भी व्यक्त किया मगर कुपोषण या फिर अज्ञात बीमारी से मौत जैसा की प्रशासन का जुमला रहता है पर खबर नबीसों की कलम नहीं रुकी इसी दौरान विलेज टाईम्स ने पोहरी Žलॉक के छर्च पर श्योपुर जिले के Žलॉक कराहल के कुछ दूरान्चल ग्रामों में एक एन.जी.ओ. की मदद से कुपोषण के यथार्थ को जाना। और पाया कि खान पान,संसासन स्व'छता व स्वास्थ सेवाओं सहित गांव-गांव फैली आदिवासी इलाकों में शराब खोरी की प्रवृति ने नौ निहालों का सुनहरा बचपन नरक बना दिया है।

कहने को खासकर शिवपुरी जिले में यूनिसेफ की मदद से हर विकास खण्ड पर जिला स्तर पर रिहेबीलेशन सेन्टर स्थापित है। मगर चौकाने बाला मामला जिला मुख्यालय पर लुधावली आदिवासी बस्ती में देखने आया। इस मामले को भी स्वास्थ महकमें ने कुपोषण न मान एक बार फिर से बीमारी करार दिया। हॉलाकि विलेज टाईम्स की इस संकलित खबर को भी एक राष्ट्रीय इंग्लिस चैनल पर दिखाया गया। फिर क्या था एक बार फिर से शिवपुरी-श्योपुर में कुपोषण की खबरे अखबारों की सुर्खिया बनने लगी जो क्रम अभी तक जारी था हालाकि म.प्र. शासन द्वारा कुपोषण को देखते हुई अटल आरोग्य मिशन नाम से एक योजना भी स्वीकृत की।

मगर जिले भर में खासकर शिवपुरी जिले के 64 हजार से अधिक कुपोषित बच्चों पर क्या प्रभाव पढ़ा यह शासन प्रशासन ही जाने मगर हॉल ही में आंगनबाड़ी कार्यकर्त्ता सम्मेलन में जिला महिला बाल विकास अधिकारी ने कड़ी ताकीत अवश्य की अगर अब किसी भी थाना क्षेत्र में कुपोषण से मौत हुई तो धारा 302 का प्रकरण दर्ज होगा। और पोहरी विकास खण्ड में इसकी शुरुआत भी दिखी है।

इतना ही नहीं कुछ दिन पूर्व स्वास्थ आयुक्त और म.प्र. शासन के मुख्य सचिव आर.परशुराम भी इन क्षेत्रों में दौरा कर व्यवस्थायें देख चुके उसके बाद महिला विकास मंत्री भी भ्रमण कर चुकी है।

सूत्र बताते है। कि पूरे एक के बाद एक समुचे म.प्र. शासन का श्योपुर शिवपुरी के आदिवासी क्षेत्रों की खाक छानने के पीछे राष्ट्रीय बाल आयोग की सरकार को फटकार है। वरना कराहल,पोहरी ही क्या,पिछोर,खनियाधाना और नरवर शिवपुरी विकास खण्डों मे भी हजारों आदिवासी बसते है। जिनकी सुध आज भी शासन को नहीं।
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