मोल तोल के चक्कर में उलझी ग्राम रोजगार सहायक सूची

म.प्र.शिवपुरी।  शिवपुरी जिले में ग्राम रोजगार सहायकों की भर्ती में भ्रष्टाचार,अनियमितताओं के आरोपों के चलते लेागों में कोहराम मचा है कारण ...

म.प्र.शिवपुरी। शिवपुरी जिले में ग्राम रोजगार सहायकों की भर्ती में भ्रष्टाचार,अनियमितताओं के आरोपों के चलते लेागों में कोहराम मचा है कारण 3 माह बाद भी रोजगार सहायकों की सूची अन्तिम रुप नहीं ले पा रही है सूत्रों की माने तो सारा बकेड़ा शासन के निर्देशों और विज्ञाप्ति में प्रकाशित दिशा निदे्रर्शो का मनमाफिक ढंग से परिभाषा गढऩा है देखा जाये तो प्राप्त आवेदनों की सूची जिले की आठो जनपदों द्वारा शासन के निदे्र्रशानुसार मैरिठ के आधार पर तैयार कर जिला कमेटी को भेज दी गई।

जिस पर जिला कमेटी द्वारा आवेदकों से आपत्तियां भी ली गई। मगर 400 से अधिक ग्राम रोजगार सहायकों की सूची नहीं प्रकाशित हो सकी। जिसको लेकर आम जन में कई तरह के कयास भी लगाये जा रहे,उनमें से एक कयास भ्रष्टाचार का आरोप भी है।

केन्द्र सरकार की महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना क्रियान्वयन विषयक भारत सरकार द्वारा जारी दिशा निर्देशों के पालन में म.प्र. शासन द्वारा प्रत्येक ग्राम पंचायत में नियुक्ति हेतु परिपत्र जारी किया। जिसके तहत नियुक्ति जिला कार्यक्रम समन्वयक के नेतृत्व में कार्यक्रम अधिकारी के सहयोग से ग्राम पंचायते तारी जावेगी। इस नीति के तहत ग्राम पंचायत वार आवेदन लेकर मेरिट सूची जारी करने का अधिकार जनपद पंचायत मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को सौंपा, लेकिन जनपद पंचायत स्तर पर ग्राम सहायकों की भर्ती में भ्रष्टाचार का बोलबाला रहा। 

जिसके कारण पात्र अभ्यार्थी वंचित हो गये और अपात्रों को प्रथम स्थान मिल गया। भ्रष्टाचार इस बात से स्वत: ही प्रमाणित हो जाता है कि जनपद सीईओ द्वारा जारी सूची में जनपद की सांठ-गांठ से फर्जी प्रमाण पत्र लगाये गये, जो प्रथम दृष्टि में ही प्रमाणित थे, उपरांत उनको अंक दिये गये। इस तरह जनपदों द्वारा कहीं मेट प्रमाण पत्रों के नाम पर तो कहीं मतदाता सूची में नाम के नाम पर, तो कहीं बीकॉम की अंकसूची के नाम पर भ्रष्टाचार किया गया। उदाहरणार्थ जनपदों के पास मेटों की सूची थी, उपरांत सूची में नाम न होने के बाद भी मेट के नंबर दिये, इसी तरह भारत सरकार की निर्वाचनावली में संबंधित ग्राम के मतदाता को मूल निवासी माना गया, इस नियम का भी जनपदों द्वारा अपने-अपने हिसाब से अर्थ लगाया।

 इसी जनपद ने शहरों एवं ग्रामीण दोनों जगह के मतदाता को मान्य किया तो किसी जनपद ने अमान्य। इसी तरह किसी जनपद ने बीकॉम नेट अंकसूची को मान्य किया तो किसी ने नहीं। यह दोहरी नीति स्पष्ट भ्रष्टाचार को प्रमाणित करती है। जबकि शासन की इकजाई नीति है, अलग-अलग नहीं। किसी-किसी जनपद ने तो अभ्यार्थी द्वारा लगाई गई मार्कसीट से मैरिट लिस्ट में अधिक नंबर दिये गये, इस तरह शासन की इस योजना का पूरी तरह पलीता लगाया जा रहा है। 

जिला पंचायत में सांसद प्रतिनिधि हरवीर सिंह रघुवंशी ने बताया कि सर्वविदित है कि जिले में ग्राम सहायक की मैरिट सूची में काफी भ्रष्टाचार हुआ है, जो प्रमाणित है। मेरे पास भी कई अभ्यार्थियों के प्रमाणित आवेदन हैं और यह सब दोहरी नीति जनपद द्वारा की गई है। उपरांत उन्हीं जनपद के सीईओ को जिला स्तरीय अपील कमैटी में रखा गया है, जिनके दवाब के कारण जिला अपील कमैटी द्वारा अंतिम सूची जारी नहीं की जा रही। श्री रघुवंशी ने बताया कि शासन नियमानुसार जिला अपील कमैटी को आपत्तियों की सुनवाई उपरांत चार दिवस के अंदर सूची जारी करने के स्पष्टï निर्देश हैं, उपरांत एक माह हो गया, लेकिन जिला आपत्ति निराकरण समिति द्वारा आपत्ति निराकरण के पश्चात अंतिम सूची जारी नहीं की गई और यह सब सत्ता एवं जनपद सीईओ के दवाब में किया जा रहा है। 

वहीं निचले स्तर पर जनपद में चुने हुये जनप्रतिनिधियों को इस पूरी प्रक्रिया से अवगत नहीं कराया, जबकि शासन की भावना पारदर्शी थी, लेकिन शिवपुरी में सरकार की उस योजना का सत्तापक्ष के नेताओं के दवाब में अधिकारियों द्वारा दुरूपयोग कर भारी भ्रष्टाचार किया जा रहा है। इस भर्ती प्रक्रिया का पूरा अधिकार ग्राम पंचायतों को था, लेकिन जनपद द्वारा ग्राम पंचायत का उपयोग रबर, स्टाम्प के रूप में किया गया। कहीं कोई ग्राम सभा नहीं कराई गई। सचिवों पर दवाब डालकर कागजी खानापूर्ति की गई। सांसद प्रतिनिधि हरवीर सिंह रघुवंशी ने जिला प्रशासन से उम्मीद की है कि वह इस जनहितैशी नीति पर हो रहे भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाकर पात्र अभ्यार्थियों की सूची जिला स्तर से तत्काल जारी करायें। सांसद प्रतिनिधि श्री रघुवंशी ने कहा कि इस केन्द्र सरकार की जनहितैशी योजना में शिवपुरी जिले में सत्ता के संरक्षण में हो रहे भ्रष्टाचार को सप्रमाणित केन्द्र सरकार को सौंपकर इसकी विस्तृत जांच कराई जायेगी।

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मोल तोल के चक्कर में उलझी ग्राम रोजगार सहायक सूची
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