विक्रय से बर्जित जमीनों में करोड़ों के खेल, कई आदिवासी भूमि हीन

म.प्र. शिवपुरी 14 जुलाई म.प्र. के ग्वालियर चम्बल के यू तो कई जिले आदिवासी बाहूल्य है। जिसमें सर्वाधिक आदिवासी चम्बल के श्योपुर जिले में है। वही दूसरे नम्बर पर ग्वालियर के शिवपुरी जिले में है। जिनकी संख्या मय ब"ो बुजुर्गों के लगभग साढ़े तीन लाख के आसपास है। लगभग एक लाख मतदाता आदिवासी जिले केे 650 राजस्व गांव 60-70 मजरों में रहते जिनमें से अधिकांश मजदूरी खेती किसानी पर निर्भर है। अगर एकता परिषद के राम प्रकाश जी की माने जिन्होंने समुचा जीवन आदिवासियों के हक की लड़ाई में लगा रखा है।


कहते है। कि समुचे शिवपुरी जिले में विक्रय से वर्जित जमीनों मेंं करोड़ों रुपये का भ्रष्टाचार हुआ है। उन्होनें बताया मेरी जानकारी के मुताबिक शासकीय अभिलेखों में वर्ष 2001-02 में शिवपुरी जिले में एक भी भूमि हीन नहीं था मात्र 176 आदिवासी ही भूमिहीन थे। जबकि अकेले करैराअनुभाग मे ही लगभग ढाई हजार अवैध पट्टे बाँटे गये। वर्ष 2007 से लेकर आज तक कई ऐंन्जेसी फर्जी रजिस्ट्रियां जिले की कई तहसीलों में हुई। जिनकी शिकायत जांच के बाद भी आज दिनांक तक कोई कार्यवाही नहीं हो सकी।

उन्होनें उदाहरण बतौर कहा कि करैरा अनुभाग मे ही 3 बहिनों में से दो बहिनो को मृतक बता 16 वीघा भूमि की फर्जी रजिष्ट्री करा दी गई। जिसका शिकायती आवेदन भी जन शिकायत मे है। ग्राम थरखेड़ा में अंगद पुत्र जगुआ की 16 वीघा 2 विशवा भूमि थी। जिसका सर्वे क्रमांक 486,485,486,512,1362,1372,1773,1374 है। अंगद की मृत्यु उपरान्त उसकी तीन पुत्रियों मे से मात्र शीला का नाम तो दर्ज है मगर उसकी 2 पुत्री कला तथा ल"ाा को मृत बता अन्य 3 तीन लेागेां के नमा शासकीय रिकार्ड में दर्ज कर दिये गये। इसी प्रकार शिवपुरी तेहसील में भी ग्राम चिटोरा के मौजे में रतानिया पत्नी घुरु के नाम से सर्वे क्र. 22 रकवा 1.76 हेक्टर भूमि तथा इसी मौजे की सर्वे क्र. 44,58,73,86,88,95,रकवा 1.90 हेक्टेयर भूमि पटवारियों ने फर्जीबाड़ा कर दूसरों के नाम दर्ज करा दी।

ज्ञात हो इसी प्रकार की विक्रम से वर्जित भूमियों का मामला इसी जिले के पौहरी अनुभाग विधान सभा क्षेत्र से विधायक प्रहलाद भारती ने भी एक प्रश्र विधान सभा में लगाया गया है। जिसमें पूछा गया है। कि क्या पौहरी तेहसीलदार द्वारा विक्रम से वर्जित जमीनों की अनुमति प्रदान की है। यदि हाँ तों किन नियमों के तहत और तेहसीलदार को ऐसा करने का अधिकार है सदि नहीं तो ऐसे तेहसीलदार के खिलाफ अवैधानिक कृत्य करने पर क्या कार्यवाही की गई है। देखा जाये तो यह छोटी मोटी नजीरे है। 20 वर्षो से आदिवासियों के हक लिए लड़ रहे एकता परिषद के राम प्रकाश कहते है। म.प्र. के मुख्यमंत्री पंचायतों के माध्ययम से छलावा करते है। उनकी घोषणा के अनुसार आज भी आदिवासी वनवासी अपने हक के लिये भटक रहे। अगर शिवपुरी में हुये भूमि घोटालो की जांच सी.बी.आई से हो तो आधे से अधिक पटवारी अधिकारी कठघरे में होगें।

बहरहॉल मामला बड़ा ही संवेदन शील है, देखना होगा म.प्र. सरकार इसे कैसे लेती है।
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