दरकार चमकदार नेतृत्व की: वरिष्ठ,बुजुर्ग दे,पार्टी और सरकार को अनुभवों का लाभ

व्ही.एस.भुल्ले देश और देश  की राजनीति जिस तरह से बड़े बदलाव की ओर इसारा कर रही है। पार्टी और सरकार में जिस तरह से बढ़े बदलाव की बात ...

व्ही.एस.भुल्ले
देश और देश  की राजनीति जिस तरह से बड़े बदलाव की ओर इसारा कर रही है। पार्टी और सरकार में जिस तरह से बढ़े बदलाव की बात उठ रही है उससें इतना तो साफ है। कि कही न कही बदलाव जरुरी है।
अब समय एक बार फिर से सोनिया जी के सामने है। और सबाल करता है। कि एक बार फिर से सटीक निर्णय ले नेहरु गांधी परिवार की मुखिया ही नहीं यू.पी.ए. सरकार तथा कांग्रेस जैसे महान संगठन, की मुखिया होने के नाते देश और वासियों की खातिर वह अपनी चुप्पी तोड़ते हुये सही निर्णय ले। जैसा कि निर्णय उन्होंने भारत की बहु बनने के बाद लिया जैसा कि निर्णय उन्होने स्वर्गीय राजीव जी के असमय जाने के बाद देश और कांग्रेस के हित में लिया। और जैसा कि निर्णय उन्होंने देश का प्रधानमंत्री न बनने के रुप में लिया आज समुचा देश तथा देश के एक अरब से अधिक लोग,कांग्रेस का छोटे से छोटा कार्यकर्žाा सोनिया जी के निर्णय पर टकटकी लगाये देख रहा है।

सबाल साफ है। क्या राहुल को छोटी बड़ी जिम्मेदारी से इतर लेाकसभा 2014 के पूर्व सžाा और संगठन में महत्वपूर्ण पद की जिम्मेदारी सम्हाल देश हित में प्रधानमंत्री बनना चाहिए? जैसी कि मांग विभिन्न हल्को में की जा रही है। सरकार के अन्दर या फिर संगठन में रहनेे वालो के राजनीति जुमलें भले ही राहुल को बड़ी जिम्मेदारी सम्हालने के हो। मगर देश के युवाओं से पूछा जाये तो भले ही वह कांग्रेस में न हो या फिर किसी राजनैतिक दल से जिनका बास्ता न हो, तो एक ही जबाब होगा राहुल 2014 के आम चुनाव से पूर्व और जल्द के प्रधानमंत्री बने जिससे अराजकता की ओर बढ़ते देश तथा सरकार और संगठन के प्रति देश वासियों के बढ़ते अविश्वास को विश्वास में बदला जा सके और यह तभी सम्भव है। जब राहुल जैसे चमकदार नेतृत्व के हाथ सोनिया जी जैसी महान महिला के संरक्षण तथा बुजुर्ग,वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं के अनुभवों की छत्रछाया में सरकार और संगठन की बागडोर हो। क्योकि आज देश जिन हालातों से गुजर रहा है। किसी से छिपा नहीं चहुंओर बढ़ती अराजकता भ्रष्टाचार सरकारों,नेताओं प्रति पनपता आमजन में अविश्वास बेकाबू मंहगाई ने आम देश वासी को तोड़कर रख दिया है।  सरकार और संगठन में बैठे कुछ लेागो ने आम लोगों के प्रति जिस तरह का रुख वर्तमान में अख्तियार कर रखा है। उस पर विराम जरुरी है। और यह तभी सम्भव है। जब राहुल देश के प्रधानमंत्री हो।

किसी को यह कतई बताने की जरुरत नहीं कि जब जब देश या देश के लोगों पर संकट आया। गांधी परिवार हमेशा आग्रिम पत्नि में ही नहीं दिखा बल्कि देश के लिये दो कदम आगे बढ़कर कुर्बानियां भी दी है। मसला चाहे आतंवाद का रहा हो या फिर देश का गांधी परिवार ने बगैर जान की परवा किये देश और देश वासियों के हित में तत्काल लिये,परिणाम भले ही कुर्बानियों के रुप में रहे हो मगर उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

आज समुचे देश में नेतृत्व को लेकर उथलपुथल है सžाा,संगठन और आम जन में राहुल को लेकर चर्चायें है। 42 वर्षीय राहुल,सोनिया जी जैसी सूझबूझ संवेदनशील नेता और डॉ मनमोहन सिंह जैसे प्रधानमंत्री के कुशल मार्गदर्शन में सरकार के बाहर रह विगत 7 वर्षो से कार्य कर रहे है।  साथ ही सरकार में आम गरीब की लड़ाई तो संगठन में युवाओं को तरजीह के लिये देश भर में घूम संंघर्ष कर रहे है। आज उनके पास अनुभव और तजुर्बे की भी कोई कमी नही। केन्द्रीय रा'यमंत्री 'योतिरादित्य सिंह जैसे जमीनी नेता भी राहुल को बढ़ी जिम्मेदारी तो संासदों का एक समूह सदन का नेता बनाये जाने की बात कर रहे है।

ये सही है। कि कांग्रेस में कई ईमानदार,बद्धिमान,अनुभवी वरिष्ठ नेता है। चाहे वह सुशील कुमार शिन्दे,जयराम रमेश, ए.के.एंटनी, अम्बिका सोनी,कपिल सिŽबल,सलमान सुर्शीद,इत्यादि हो मगर देश में जमीनी सर्वमान्य चेहरा नही। देखा जाये तो समुचे भारत वर्ष में सोनिया जी को छोड़ राहुल के अलावा कोई ऐसा चेहरा नहीं जिसे सामने रख कांग्रेस जैसे वृहत संगठन और आम देश वासियों को विश्वास में लिया जा सके। सरकार में बैठे चेहरों का अपने-अपने क्षेत्रों में एक दायरा है। मगर इन चेहरों पर वोट बरसने लगे यह सम्भव नही। या फिर सरकार में कोई ऐसा नहीं जो कोई ऐतिहासिक निर्णय ले सके। यह तभी सम्भव है, जब राहुल जैसा चमकदार नेतृत्व सरकार और संगठन में नेतृत्व करे।

अब यह तो कांग्रेसी नेता आम कांग्रेस जन तथा कांग्र्रेस कि नेता और यू.पी.ए. प्रमुख श्रीमती सोनिया गांधी को ही जल्द तय करना होगा। कि राहुल क्या करे क्योकि सोनिया जी जहां यू.पी.ए. और कांग्रेस की प्रमुख तो है ही, उन पर सबसे बड़ी जबावदेही  गांधी परिवार की प्रमुख होने की है। देखना होगा। वह देश परिवार और संगठन के हित में क्या निर्णय लेती है।

,,भविष्य युवा वर्ग का है,हमें न केवल पूरे विश्वास के साथ उन्हें जिम्मेदारी देना चाहिए,बल्कि यह भरोसा उनके युवा रहते ही सौपना चाहिए,जब वे ऊर्जा,जोश और उम्मीद से भरे होते है। और उनकी आंखों में सपने होते है। ,, स्वर्गीय जे.आर.डी.टाटा

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Village Times: दरकार चमकदार नेतृत्व की: वरिष्ठ,बुजुर्ग दे,पार्टी और सरकार को अनुभवों का लाभ
दरकार चमकदार नेतृत्व की: वरिष्ठ,बुजुर्ग दे,पार्टी और सरकार को अनुभवों का लाभ
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