वैचारिक विधान से ही संभव है, संकट का निदान, दिल बड़ा, दिमाग और दरवाजा खुला रखने की दरकार मगर, मंच पर मेरा स्थान कहां ?

सवालों का जबाव सत्ता की जबावदेही, सार्थकता सिद्ध हो, यहीं राजधर्म

समृद्ध, खुशहाल राष्ट्र को नीति, नियत, नियोक्ता अहम

ये कैसी सेवा और कल्याण: सुशासन के परखच्चे उड़ाता समस्याओं का हुजूम

निष्ठा पर संदेह, सत्य से वगाबत भोले-भाले, मानस और बैबसी से झूठ, महापाप